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हैंडओवर के पहले ही बदहाल हो गए कई सामुदायिक शौचालय
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फाजिलनगर ब्लॉक क्षेत्र के सुमही बुजुर्ग में बदहाल सामुदायिक शौचालय।
- फोटो : KUSHINAGAR
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हैंडओवर के पहले ही बदहाल हो गए कई सामुदायिक शौचालय
पडरौना। जिले के गांवों में बने कई शौचालय हैंडओवर से पहले ही बदहाल हो गए हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं, जो उपयोग के कुछ ही दिनों बाद मरमम्त कराने लायक हो गए हैं। शौचालयों के बदहाल से गांव के लोगों को खुले में जाना पड़ रहा है।
जिले में 1470 राजस्व गांव और 1003 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें से नौ गांव ऐसे हैं, जहां भूमि उपलब्ध नहीं होने से सामुदायिक शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि जमीन की तलाश की जा रही है। जिले के 964 गांवों में सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार है। इसमें 932 शौचालय ग्राम सभा को हैंडओवर भी किए जा चुके हैं। जिले के 32 गांवों में बने सामुदायिक शौचालय अब तक ग्रामसभा को हैंडओवर नहीं हो सके हैं। इसमें से अधिकांश शौचालय बदहाल हो चुके हैं। फाजिलनगर ब्लॉक क्षेत्र सुमही बुजुर्ग गांव में बने सामुदायिक शौचालय का फर्श से लेकर सीट तक टूट चुका है। नेबुआ नौरंगियां और पडरौना ब्लॉक क्षेत्र में बने कई ऐसे सामुदायिक शौचालय हैं, जिनका उपयोग तो शुरू हो गया है, लेकिन फर्श टूटे हैं।
कोट
सामुदायिक शौचालय निर्माण के समय लोगों को उम्मीद थी कि अब खुले में शौच जाने से मुक्ति मिलेगी, लेकिन निर्माण के बाद हैंडओवर होने से पहले ही बदहाल हो गया।
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अवनीश राय, सुमही बुजुर्ग।
गांव में शौचालय निर्माण के समय ही गांव के लोगों ने मानक की अनदेखी की शिकायत की थी। लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। परिणाम अब लोगों के सामने है।
हैदर अली, निवासी सुमही बुजुर्ग
गांव में बने सामुदायिक शौचालय की मरम्मत की मांग कई बार की गई। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे गांव के लोगों में नाराजगी है।
ऋषिकेश गुप्ता, निवासी सुमही
गांव में बना सामुदायिक शौचालय उपयोग में है। समय-समय पर रखरखाव भी होता है, लेकिन शौचालय का फर्श एक-दो स्थान पर टूट गया है। इससे मानक पर सवाल उठ रहा है।
सुभाष कुशवाहा, निवासी विजयपुर
अप्रैल तक जिले में बनकर तैयार सभी सामुदायिक शौचालय का हैंडओवर करा लिया जाएगा। जो सामुदायिक शौचालय क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी मरम्मत कराई जाएगी। जिन शौचालय के निर्माण में लापरवाही बरती गई है, उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अभय कुमार यादव, डीपीआरओ
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पडरौना। जिले के गांवों में बने कई शौचालय हैंडओवर से पहले ही बदहाल हो गए हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं, जो उपयोग के कुछ ही दिनों बाद मरमम्त कराने लायक हो गए हैं। शौचालयों के बदहाल से गांव के लोगों को खुले में जाना पड़ रहा है।
जिले में 1470 राजस्व गांव और 1003 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें से नौ गांव ऐसे हैं, जहां भूमि उपलब्ध नहीं होने से सामुदायिक शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि जमीन की तलाश की जा रही है। जिले के 964 गांवों में सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार है। इसमें 932 शौचालय ग्राम सभा को हैंडओवर भी किए जा चुके हैं। जिले के 32 गांवों में बने सामुदायिक शौचालय अब तक ग्रामसभा को हैंडओवर नहीं हो सके हैं। इसमें से अधिकांश शौचालय बदहाल हो चुके हैं। फाजिलनगर ब्लॉक क्षेत्र सुमही बुजुर्ग गांव में बने सामुदायिक शौचालय का फर्श से लेकर सीट तक टूट चुका है। नेबुआ नौरंगियां और पडरौना ब्लॉक क्षेत्र में बने कई ऐसे सामुदायिक शौचालय हैं, जिनका उपयोग तो शुरू हो गया है, लेकिन फर्श टूटे हैं।
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सामुदायिक शौचालय निर्माण के समय लोगों को उम्मीद थी कि अब खुले में शौच जाने से मुक्ति मिलेगी, लेकिन निर्माण के बाद हैंडओवर होने से पहले ही बदहाल हो गया।
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अवनीश राय, सुमही बुजुर्ग।
गांव में शौचालय निर्माण के समय ही गांव के लोगों ने मानक की अनदेखी की शिकायत की थी। लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। परिणाम अब लोगों के सामने है।
हैदर अली, निवासी सुमही बुजुर्ग
गांव में बने सामुदायिक शौचालय की मरम्मत की मांग कई बार की गई। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे गांव के लोगों में नाराजगी है।
ऋषिकेश गुप्ता, निवासी सुमही
गांव में बना सामुदायिक शौचालय उपयोग में है। समय-समय पर रखरखाव भी होता है, लेकिन शौचालय का फर्श एक-दो स्थान पर टूट गया है। इससे मानक पर सवाल उठ रहा है।
सुभाष कुशवाहा, निवासी विजयपुर
अप्रैल तक जिले में बनकर तैयार सभी सामुदायिक शौचालय का हैंडओवर करा लिया जाएगा। जो सामुदायिक शौचालय क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी मरम्मत कराई जाएगी। जिन शौचालय के निर्माण में लापरवाही बरती गई है, उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अभय कुमार यादव, डीपीआरओ