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संकोच न करें, खुलकर बताएं समस्याएं: सीओ

Wed, 01 Dec 2021 11:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:27 AM IST
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संकोच न करें, खुलकर बताएं समस्याएं: सीओ
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- खड्डा के सरस्वती देवी महाविद्यालय में आयोजित हुई पुलिस की पाठशाला
- अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मंगलवार को खड्डा के सरस्वती देवी महाविद्यालय में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। पाठशाला में खड्डा के सीओ शिवाजी सिंह ने पुलिस प्रशासन की तरफ से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। वह छात्रों के समक्ष एक शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने छात्र-छात्राओं के सवालों के जवाब भी दिए। पाठशाला में महाविद्यालय की 403 छात्र-छात्राएं शामिल रहीं।
मंगलवार को दिन के करीब 11 बजे सरस्वती देवी महाविद्यालय में सीओ शिवाजी सिंह, एसएसआई भगवान सिंह, महिला आरक्षी सिंह को तिलक लगाकर व बैज लगाकर स्वागत किया गया। इसके बाद मां सरस्वती व भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पण कर एवं दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया।
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कॉलेज की छात्रा आसिया खातून व अंशिका पांडेय ने सीओ से सवाल किया कि स्कूल आते-जाते समय या कहीं अन्य स्थान पर कोई अप्रिय घटना सामने आ जाए तथा घिर जाएं तो किस तरह से पुलिस की मदद ले सकती हैं। इस पर सीओ ने बताया कि समस्या आने पर घबराएं नहीं, अपने मोबाइल से महिला हेल्पलाइन 1090, 181, 112 आदि नंबर पर काल करें। पुलिस तुरंत पहुंचकर मदद करेगी। सीओ ने बताया कि अगर किसी कारण से रास्ते में रात हो जाए, घर जाने में दिक्कत हो रही हो, रास्ते में अप्रिय घटना की आशंका हो तो 112 नंबर पर कॉल करें। पुलिस सुरक्षित घर तक पहुंचा देगी।
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सवाल के क्रम में तनु जायसवाल और शीलम मद्धेशिया ने पूछा कि कोई ऐसी महिला की समस्या हो, जो पुरुष से साझा नहीं की जा सकती तो ऐसे में पुलिस कैसे सहयोग करेगी। इसके जवाब में सीओ ने कहा कि हर थाने में महिला हेल्प डेस्क बनाया गया है। वहां महिला पुलिस तैनात रहती है। वहां पहुंचने पर खुलकर अपनी समस्या को मौखिक एवं लिखित रूप से बता सकती हैं। समस्या का समाधान हो जाएगा। किसी भी दशा में घबराना नहीं है। अगर कोई पीछा करता हो, फब्तियां कसता हो या गलत तरीके से पेश आता हो, तो झिझकें नहीं, शिकायत करें। पुलिस आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार है।
वरिष्ठ उपनिरीक्षक भगवान सिंह ने भी सुरक्षा के बारे में छात्राओं के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि अचानक कोई संकट आ जाए और आसपास कोई न हो, तो जोर-जोर से चिल्लाइए ताकि आसपास मौजूद लोग पहुंच जाएं और जब तक पुलिस पहुंचे, तब तक आप सुरक्षित रहें।
महिला सिपाही प्रीति सिंह ने छात्राओं को बताया कि सबसे जरूरी है कि सब लोग शिक्षित हों, जिससे अपने कानूनी अधिकार व पुलिस की सहायता के बारे में जान सकें।
महाविद्यालय की शिक्षिका विभा सिंह ने कहा कि महिलाएं कमजोर नहीं है। हर समय आपके साथ कोई नहीं रहेगा। आप खुद सक्षम बनिए। उन्होंने अरुणिमा सिन्हा का उदाहरण दिया। जिन्होंने पैर नहीं होने के बावजूद एवरेस्ट फतह कर लिया था।
91 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली बीए तृतीय वर्ष की छात्रा दिव्या यादव ने कहा कि हमें हारना नहीं है। अगर समस्या है तो समाधान भी है ।
अंत में कॉलेज के प्राचार्य दीपक मिश्रा ने अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजित पुलिस की पाठशाला की सराहना की। उन्होंने इस कार्यक्रम को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे छात्र-छात्राओं को कानून के विषय में जानकारी हासिल करने में मदद मिली है। गलत कार्य करने वाले लोगों के लिए ही कानून बना है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कानून की मदद लेकर अच्छे समाज की रचना में भागीदारी निभाने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में श्रेया पांडेय, जिब्राइल, राकेश पाल, सागर जायसवाल आदि ने भी सवाल पूछे, जिनका उत्तर पुलिस अधिकारियों ने दिया। कार्यक्रम का संचालन नत्थू शर्मा ने किया। पाठशाला में संजय पांडेय, विभा सिंह, डॉ. अजीत शुक्ला, राकेश कुशवाहा, अभिषेक श्रीवास्तव, अमरनाथ कुशवाहा, दीपक शास्त्री, शिवम पांडेय, राघवेंद्र मिश्रा, शिल्पी जायसवाल, उमाशंकर यादव, दीनबंधु राय, सुनील वर्मा सहित अन्य छात्र-छात्राएं मौजूद थीं।

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छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत है पाठशाला-
- कॉलेज की छात्रा गुंजा मद्घेशिया ने कहा कि पुलिस की पाठशाला में बड़ी अच्छी जानकारी मिली। छात्राएं मुसीबत में किस तरह खुद की मदद कर सकती हैं, इस बारे में बताया गया।
- दिव्या यादव का कहना था कि महिला हेल्प डेस्क के बारे में जानकारी मिली, जहां महिलाएं अपनी समस्याएं बेझिझक कह सकती हैं।
- शीलम मद्घेशिया का कहना था कि पुलिस अधिकारी ने महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी, जो जीवन में काम आएगी।
- तन्नु जायसवाल का कहना था कि इस तरह के आयोजन स्कूल-कॉलेजों में होते रहने चाहिए। इससे जागरुकता बढ़ेगी।
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राकेश कुमार गौंड़ ।
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