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Kushinagar News: भारत के स्वाभिमान और वीरता का प्रतीक थीं महारानी दुर्गावती

Thu, 25 Jun 2026 01:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 25 Jun 2026 01:45 AM IST
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Maharani Durgavati was a symbol of India's self-respect and bravery
डाक बंगले में महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाते हुए।
कसया। गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस बुधवार को पीडब्ल्यूडी के डाक बंगला परिसर में महारानी दुर्गावती सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। लोगों ने महारानी दुर्गावती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके शौर्य, त्याग और बलिदान को याद किया।
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मुख्य अतिथि कुशीनगर विधायक पीएन पाठक ने कहा कि महारानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की सेना को कई बार पराजित कर भारत के स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और स्वाभिमान की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि महारानी दुर्गावती ने अपने राज्य, संस्कृति और सम्मान की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया और अंत तक संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका जीवन महिलाओं के साहस और नेतृत्व का अनुपम उदाहरण है। कार्यक्रम संयोजक एवं भारतीय जनता पार्टी एसटी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री राधेश्याम गोंड ने महारानी दुर्गावती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म वर्ष 1524 में कालिंजर दुर्ग में हुआ था। उनके पिता कीरत राय चंदेल वंश के प्रसिद्ध शासक थे। बचपन से ही उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और तीरंदाजी का विशेष शौक था। उनका विवाह गोंडवाना के प्रतापी शासक संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ। पति के निधन के बाद उन्होंने अपने पुत्र वीर नारायण के संरक्षक के रूप में राज्य की बागडोर संभाली और कुशल नेतृत्व का परिचय दिया। कार्यक्रम को डा टीएन राव, अमित पांडेय, अमीय गुप्त, बलराम यादव, रामदयाल गोंड, भूमक ललन गोंड ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने महारानी दुर्गावती के जीवन संघर्ष, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोवर्धन गोंड ने और संचालन सूचित गोंड ने किया। इस अवसर पर डॉ. केपी गोंड, रामधनी गोंड, अध्यालाल गोंड, संजय गोंड, रवि गोंड, मणिराज गोंड, मनोज सिंह मरावी, रंजीत गोंड आदि मौजूद रहे।
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