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मां ने बढ़ाया हौसला तो बेटे बन गए अधिकारी
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मां इंदू देवी के साथ डॉक्टर बृजेश कुमार पांडेय।संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
मां ने बढ़ाया हौसला तो बेटे बन गए अधिकारी
फर्ज और ममता की मिसाल हैं ये मां
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। न रिश्ता निभाने की औपचारिकता, न भावनाओं का लेखाजोखा। सीधा संबंध होता है बच्चों का अपनी मां के साथ। मां भगवान की दूसरी रूप होती हैं। हर मां अपने विवेक के अनुसार अपनी संतान में ईमानदारी, साहस, निडरता, न्यायप्रियता व परिश्रम इत्यादि के बीज बचपन में ही बो देती है। बड़ा होने पर यही आदर्श उस बच्चे के व्यक्तित्व की पहचान बनते हैं। ऐसी ही कुछ माताओं के हौसले और उत्साह से ऊंचे पदों तक पहुंचे बेटों से ‘अमर उजाला’ ने मातृ दिवस की पूर्व संध्या पर बात की।
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जीवन की छाया थी मां : संजय
दुनिया में मां से बड़ा पथप्रदर्शक और कोई नहीं हो सकता। जब भी मातृ दिवस का दिन आता है, मैं अपनी मां को बहुत याद करता हूं। यह कहना है सोंदिया बुजुर्ग की लालदेयी देवी के बेटे संजय सिंह का। वर्ष 2015 में एक बड़ी निजी कंपनी में सहायक प्रबंधक के पद पर नौकरी मिली। मां की मेहनत से बेटे को बड़ी उपलब्धि मिली, लेकिन वर्ष 2017 में ही मां का निधन हो गया।इसके बाद संजय की पोस्टिंग गुजरात के एक कंपनी में 2019 में हुई। यहां संजय को बड़ी उपलब्धि मिली और उन्हें बतौर इस बड़ी कंपनी का मुख्य प्रबंधक नियुक्त किया गया। संजय ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि मां हमेशा हौसला बढ़ाती रहीं। उन्हीं की मेहनत और प्रेरणा से यह मुकाम हासिल किया।
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मां की प्रेरणा से संवर गया जीवन : बृजेश
तरयासुजान क्षेत्र के तरयाकारी गांव के निवासी डॉ. बृजेश पांडेय बनारस में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में बतौर चिकित्सक तैनात हैं। वह कहते हैं कि कठिन परिस्थितियों में मां ने पालन-पोषण और शिक्षा दिलाया। उन्हीं की बदौलत आज इस मुकाम पर हूं।
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फर्ज और ममता की मिसाल हैं ये मां
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। न रिश्ता निभाने की औपचारिकता, न भावनाओं का लेखाजोखा। सीधा संबंध होता है बच्चों का अपनी मां के साथ। मां भगवान की दूसरी रूप होती हैं। हर मां अपने विवेक के अनुसार अपनी संतान में ईमानदारी, साहस, निडरता, न्यायप्रियता व परिश्रम इत्यादि के बीज बचपन में ही बो देती है। बड़ा होने पर यही आदर्श उस बच्चे के व्यक्तित्व की पहचान बनते हैं। ऐसी ही कुछ माताओं के हौसले और उत्साह से ऊंचे पदों तक पहुंचे बेटों से ‘अमर उजाला’ ने मातृ दिवस की पूर्व संध्या पर बात की।
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जीवन की छाया थी मां : संजय
दुनिया में मां से बड़ा पथप्रदर्शक और कोई नहीं हो सकता। जब भी मातृ दिवस का दिन आता है, मैं अपनी मां को बहुत याद करता हूं। यह कहना है सोंदिया बुजुर्ग की लालदेयी देवी के बेटे संजय सिंह का। वर्ष 2015 में एक बड़ी निजी कंपनी में सहायक प्रबंधक के पद पर नौकरी मिली। मां की मेहनत से बेटे को बड़ी उपलब्धि मिली, लेकिन वर्ष 2017 में ही मां का निधन हो गया।इसके बाद संजय की पोस्टिंग गुजरात के एक कंपनी में 2019 में हुई। यहां संजय को बड़ी उपलब्धि मिली और उन्हें बतौर इस बड़ी कंपनी का मुख्य प्रबंधक नियुक्त किया गया। संजय ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि मां हमेशा हौसला बढ़ाती रहीं। उन्हीं की मेहनत और प्रेरणा से यह मुकाम हासिल किया।
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मां की प्रेरणा से संवर गया जीवन : बृजेश
तरयासुजान क्षेत्र के तरयाकारी गांव के निवासी डॉ. बृजेश पांडेय बनारस में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में बतौर चिकित्सक तैनात हैं। वह कहते हैं कि कठिन परिस्थितियों में मां ने पालन-पोषण और शिक्षा दिलाया। उन्हीं की बदौलत आज इस मुकाम पर हूं।

संजय कुमार सिंह।संवाद।- फोटो : KUSHINAGAR
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