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Kushinagar News: 17 साल का लंबा इंतजार... अब खुलेंगे विकास के नए द्वार

Sat, 28 Dec 2024 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 28 Dec 2024 12:25 AM IST
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Long wait of 17 years... now new doors of development will open
पडरौना। लंबे इंतजार और संघर्षों के बाद छितौनी-तमकुही रेल परियोजना के पूरा होने की उम्मीदें परवान चढ़ीं। यह रेल परियोजना से कुशीनगर और बिहार के करीब 200 गांवों के लिए लाइफ लाइन साबित होगी। इसके पूरा हो जाने पर विकास तथा व्यापार के नए द्वार खुलेंगे। दियारा क्षेत्र के लोगों को भी इससे काफी हद तक सहूलियत मिलेगी। रेलवे लाइन और स्टेशन के आस-पास की खेती वाली कृषि योग्य जमीनों की कीमत भी बढ़ जाएगी। नए साल में रेल परियोजना का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर व बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के अंतिम छोर पर छितौनी-तमकुही रेल परियोजना दूर-सुदूर दियारा इलाकों को मुख्यालय क्षेत्र जोड़ने के लिए छितौनी-तमकुही रेल परियोजना को मंत्रालय की स्वीकृत मिल चुकी है। इस परियोजना के कुल लागत 265 करोड़ के सापेक्ष 106 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 20 फरवरी 2007 को तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। इस परियोजना के अंतर्गत रेल लाइन बनकर तैयार है लाइट इंजन के जरिए ट्रायल की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। छितौनी में भव्य रेलवे स्टेशन बनकर तैयार है जो अब खंडहर में तब्दील हो रहा है। पनियहवा रेलवे ढाला पर ओवरब्रिज के पाया लगभग बनकर तैयार हो चुका है।
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वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा की माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ। उस समय के तत्कालीन रेल मंत्री ने घोषणा की थी कि जो भी रेल परियोजनाएं अधूरी हैं ,उन परियोजनाओं को पहले बजट देकर काम पूरा करने के बाद अन्य नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी जाएगी। 2014 में बहुमत से सरकार बनने के बाद इस परियोजना को सरकार की ओर से धन भी आवंटित किया और काम भी शुरू हो गया। बिहार राज्य सरकार ने अपने क्षेत्र की जमीन का अधिग्रहण करके अपने क्षेत्र के काश्तकारों को मुआवजा देकर संपूर्ण राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश कर ली, लेकिन काश्तकारों की जमीन का अधिग्रहण करके मुआवजा का भुगतान नहीं दिया गया। कोराेना काल में अचानक काम बंद होने के बाद से अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। लोकसभा चुनाव से पूर्व सांसद विजय कुमार दूबे की पहल पर रेलवे बोर्ड ने संज्ञान लिया और फाइलों में बंद पड़ी 62 किलोमीटर रेल परियोजना को चालू करने के लिए हरी झंडी दी।
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बिहार के चार ब्लाॅक मुख्यालय भितहा, मधुबनी, ठकरहा और पिपरासी इससे जुड़े हैं। वहीं यूपी के छितौनी, सेवरही और तमकुहिराज नगर पंचायतों का इससे सीधा जुड़ाव है। साथ ही जटहा, धनहा, तमकुहवा, मंझरिया, बरवापट्टी बाजार आदि अनेकों छोटे-बड़े बाजार भी इससे जुड़े हैं। कृषि योग्य जमीनों की कीमत जहां बढ़ जाएगी। वहीं छितौनी, खड्डा, पनियहवा, तमकुहीरोड समेत बिहार के सब्जी की खेती करने वाले या अन्य व्यापारिक गतिविधियों को संजीवनी मिलेगी। इस परियोजना के पूर्ण होने पर्यटकों को भी आने जाने में सुविधा होगी। पश्चिमी चंपारण जो आज भी विकास से कोसों दूर है, यहां रोजगार व विकास के द्वार खुलेंगे। इस इलाके से होकर नारायणी नदी गुजरती हैं जो हर साल तबाही मचाती है रेल लाइन बनने से दोनों राज्यों के लाखों लोगों को बाढ़ से भी राहत मिलेगी।
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सांसद ने भी दिखाई दिलचस्पी

-सांसद विजय दूबे पहली बार 2019 में जब सदन चुनकर पहुंचे तभी से छितौनी तमकुही रेल परियोजना को बजट दिलाने की मांग उठाने लगे। सांसद ने सदन में इसकी मांग करने के साथ रेल मंत्री व रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से मिलकर इस परियोजना के लिए बजट आवंटित करने की मांग कर चुके हैं। चुनाव में जनता ने भी सांसद से फाइलों में बंद पड़ी परियोजना का चालू कराने की मांग की थी। सांसद ने बताया कि इस परियोजना के चालू हो जाने से कुशीनगर जिले के साथ-साथ पश्चिमी चंपारण का विकास तेजी से होगा। इससे जिले को एक नई पहचान मिलेगी।
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निर्माण कार्य शुरू होने पर संघर्ष समिति के महामंत्री शैलेश यदुवंशी ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि संघर्ष समिति के आवाज को सांसद ने प्रमुखता से रखा संघर्ष समिति के संघर्ष रंग लगाया। अब निर्माण कार्य हो रहा है। एक बड़े बजट की उम्मीद है, जिससे जनहित की यह परियोजना पूरी हो।

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सामाजिक कार्यकर्ता कर्मवीर साहनी ने भी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि परियोजना के पूर्ण होने से विकास के द्वार खुलेंगे क्षेत्रीय लोगों की मांग लंबे समय से थी। संघर्ष समिति के संघर्ष से इस परियोजना पर फिर निर्माण कार्य शुरू हुआ है।

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छितौनी में रेलवे स्टेशन बनकर तैयार है। छितौनी के बाद ही बिहार दुर्गम इलाके शुरू हो जाते हैं। इन इलाकों में आवागमन की कोई सुविधा नहीं है। इस परियोजना के पूरा होने क बाद वर्षों पुराने बाजार जटहा का भी कायाकल्प हो जाएगा। जटहा में रेलवे स्टेशन भी प्रस्तावित है तो मधुबनी, धनहा, खैरा टोला, पिपराही में भी स्टेशन है तीन हाल्ट प्रस्तावित हैं। परियोजना के पूर्ण होने से जिले के छितौनी नगर पंचायत, तमकुहीराज, जटहा बाजार समेत जिले के सैकड़ों गांवों के अलावा सीमावर्ती बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के गंडक पार के पिपरासी, मधुबनी, भितहा और ठकराहा प्रखंड का आपस में जुड़ाव हो जाएगा।
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