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Kushinagar News: कस्तूरबा विद्यालय के भवन निर्माण में भ्रष्टाचार की दोबारा जांच, डीएम ने तलब की फाइल
Thu, 10 Jul 2025 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 10 Jul 2025 12:07 AM IST
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मथौली। मोतीचक ब्लॉक के मथौली नगर में बना कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का भवन में भ्रष्टाचार का ऐसा घुन लगा कि पांच साल में जर्जर हो गया।
पूर्व में हुई जांच के बाद भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ तो बीएसए कार्यालय में इसकी फाइल दबा दी गई। निर्माण कराने वाली फर्म को नोटिस जारी कर जिम्मेदार अपना बचाव करते रहे और यहां के छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया।
संज्ञान में आने के बाद भवन निर्माण में हुए भ्रष्टाचार का दोबारा जांच कराने के लिए डीएम ने फाइल तलब कर ली है। सीडीओ के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित की गई है। निष्पक्ष तरीके से इसकी जांच हो जाए तो फर्म मालिक के साथ-साथ कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है। मोतीचक ब्लॉक में कस्तूरबा विद्यालय वर्ष 2008-2009 में 36 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। भवन दो अक्टूबर 2010 को बेसिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर किया गया था। पांच साल बाद ही भवन का फर्श टूटने लगा। दीवारों के प्लास्टर गिरने और छत में कंपन होने लगा।
इससे बच्चे डर गए और शिक्षक भी भवन के अंदर जाने से कतराने लगे। पूर्व विधायक रामानंद बौद्ध ने तत्कालीन डीएम से इसकी शिकायत की तो इसकी जांच टेक्निकल टीम की मदद से की गई। टीम ने विद्यालय भवन को जर्जर बताते हुए इस भवन में बच्चों को पढ़ाना खतरनाक बताया। आनन-फानन में इसे खाली कर मोतीचक बीआरसी परिसर स्थित विद्यालय भवन में शिफ्ट करा दिया गया।
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सूत्र बताते हैं कि उस दौरान हुए जांच में बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों के अलावा भवन का निर्माण कराने वाली फर्म दोषी मिली थी, लेकिन कार्रवाई के बजाए इस फाइल को बीएसए कार्यालय में दबा दिया गया। डीएम के निर्देश पर जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है, लेकिन टीम अभी जांच के लिए मौके पर नहीं पहुंची है।
कुछ दिन बाद में वहां से बच्चों को कसया व रामकोला विद्यालय में शिफ्ट किया गया। इसके बाद बच्चों की संख्या बढ़ी तो मोतीचक ब्लॉक के गांव नरायनपुर के राजकीय जूनियर हाईस्कूल के भवन में शिफ्ट कर दिया गाय।
इन दिनों बाद मथौली नगर पंचायत के वार्ड नंबर चार पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय परिसर में छात्राओं के रहने के लिए एक नया भवन का निर्माण कराया गया है। इसमें बालिकाएं रहती हैं और पढ़ाई भी उसी भवन में होती है।
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पूर्व में हुई जांच के बाद भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ तो बीएसए कार्यालय में इसकी फाइल दबा दी गई। निर्माण कराने वाली फर्म को नोटिस जारी कर जिम्मेदार अपना बचाव करते रहे और यहां के छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया।
संज्ञान में आने के बाद भवन निर्माण में हुए भ्रष्टाचार का दोबारा जांच कराने के लिए डीएम ने फाइल तलब कर ली है। सीडीओ के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम जांच के लिए गठित की गई है। निष्पक्ष तरीके से इसकी जांच हो जाए तो फर्म मालिक के साथ-साथ कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है। मोतीचक ब्लॉक में कस्तूरबा विद्यालय वर्ष 2008-2009 में 36 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। भवन दो अक्टूबर 2010 को बेसिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर किया गया था। पांच साल बाद ही भवन का फर्श टूटने लगा। दीवारों के प्लास्टर गिरने और छत में कंपन होने लगा।
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इससे बच्चे डर गए और शिक्षक भी भवन के अंदर जाने से कतराने लगे। पूर्व विधायक रामानंद बौद्ध ने तत्कालीन डीएम से इसकी शिकायत की तो इसकी जांच टेक्निकल टीम की मदद से की गई। टीम ने विद्यालय भवन को जर्जर बताते हुए इस भवन में बच्चों को पढ़ाना खतरनाक बताया। आनन-फानन में इसे खाली कर मोतीचक बीआरसी परिसर स्थित विद्यालय भवन में शिफ्ट करा दिया गया।
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सूत्र बताते हैं कि उस दौरान हुए जांच में बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों के अलावा भवन का निर्माण कराने वाली फर्म दोषी मिली थी, लेकिन कार्रवाई के बजाए इस फाइल को बीएसए कार्यालय में दबा दिया गया। डीएम के निर्देश पर जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है, लेकिन टीम अभी जांच के लिए मौके पर नहीं पहुंची है।
कुछ दिन बाद में वहां से बच्चों को कसया व रामकोला विद्यालय में शिफ्ट किया गया। इसके बाद बच्चों की संख्या बढ़ी तो मोतीचक ब्लॉक के गांव नरायनपुर के राजकीय जूनियर हाईस्कूल के भवन में शिफ्ट कर दिया गाय।
इन दिनों बाद मथौली नगर पंचायत के वार्ड नंबर चार पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय परिसर में छात्राओं के रहने के लिए एक नया भवन का निर्माण कराया गया है। इसमें बालिकाएं रहती हैं और पढ़ाई भी उसी भवन में होती है।