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बावन मोर्चा गांव में कुषाण कालीन अवशेष मिले
कुशीनगर
Updated Fri, 08 Apr 2016 11:58 PM IST
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जांच के बाद टीले की खुदाई में मिले अवशेष का नमूना परीक्षण के लिए ले गई थी।
- फोटो : अमर उजाला
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कुशीनगर। इंडियन नेशनल ट्रस्ट आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) की टीम ने शुक्रवार को सुबह उप्र पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ देवरिया जनपद के देसही बरवा ब्लाक के कोटवा बावन मोर्चा गांव के बावन बीघा टीले की जांच पड़ताल की। इंटेक की टीम बावन बर्छा में लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु का किला होने की जानकारी मिलने पर बीते साल दिसंबर माह में भी यहां आई थी और जांच के बाद टीले की खुदाई में मिले अवशेष का नमूना परीक्षण के लिए ले गई थी। जिसमें यहां कुषाण कालीन अवशेष होने की बात सामने आई।
इसके बाद इंटेक और पुरातत्व विभाग की टीम ने शुक्रवार को बावन बीघा क्षेत्र में पुरावशेषों का मुआयना किया। हेतिमपुर हाइवे से तीन किमी दक्षिण देवरिया जनपद के देसही बरवा ब्लाक का कोटवा बावन मोर्चा गांव का बावन बीघा का टीला पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण का विषय बना हुआ है।
इतिहासकारों की मानें तो इसी स्थल पर पहले लक्ष्मण के पुत्र चन्द्रकेतु का राज्य रहा होगा। यहीं पर सात राजाओं के बीच बुद्ध की अस्थियों का बंटवारा किया गया था। कुछ अवशेष मध्य काल में थारु जाति के लोगों के रहने की ओर इशारा करते हैं। इंटेक के एमके खंडुई संस्था की टीम और पुरातत्वविद् पीके लहरी और उप्र पुरातत्व विभाग के नर्सिंग त्यागी के साथ शुक्रवार को सुबह बावन बीघा टीला पहुंचे।
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यहां इन लोगों ने टीले के चारों ओर से जांच पड़ताल कर मिट्टी के नमूने लिए। साथ ही कुछ ईट भी साथ ले गए। उन्हीं ईटों में एक वह ईट भी शामिल है जिसके प्रारंभिक जांच के आधार पर लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु का किला होने की संभावना जताई जा रही है।
टीम ने जांच में पाया कि टीले के चारों ओर दो मीटर चौड़ी कुषाण काल की ईटों की दीवारें हैं। जो भगवान बुद्ध के समकालीन प्रतीत होती हैं। टीला क्षेत्र के तहत सात कुंए के अवशेष भी मौजूद हैं। इनमें से एक कुएं का व्यास करीब 19 फीट है।
टीम में शामिल लोगों ने संभावना जताई कि मध्य काल में यहां आकर बसे थारू समुदाय के लोगों ने यह खोदे होंगे। इंटेक की टीम में शामिल लोगों की मानें तो फिलहाल मौके पर कोई मृदभांड नहीं मिला है। जो ईट मिले हैं, उनमे से कुछ की साइज 32 सेमी लंबी, 21.5 सेमी चौड़ी है। जबकि ईट की मोटाई 5 सेमी है। टीम के लोगों के मुताबिक सात कुओं में से एक के अंदर 15 फीट गहराई के बाद एक सुरंग भी है।
जिसका एक मोहाना करीब 800 मीटर की दूरी पर स्थित छोटी गंडक नदी में खुलता है जबकि दूसरा सिरा वहां से करीब आठ किमी दूर कुशीनगर तक जाने की संभावना जताई। टीम ने करीब तीन घंटे तक बावन बीघा टीला क्षेत्र का मुआयना किया।
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इसके बाद इंटेक और पुरातत्व विभाग की टीम ने शुक्रवार को बावन बीघा क्षेत्र में पुरावशेषों का मुआयना किया। हेतिमपुर हाइवे से तीन किमी दक्षिण देवरिया जनपद के देसही बरवा ब्लाक का कोटवा बावन मोर्चा गांव का बावन बीघा का टीला पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण का विषय बना हुआ है।
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इतिहासकारों की मानें तो इसी स्थल पर पहले लक्ष्मण के पुत्र चन्द्रकेतु का राज्य रहा होगा। यहीं पर सात राजाओं के बीच बुद्ध की अस्थियों का बंटवारा किया गया था। कुछ अवशेष मध्य काल में थारु जाति के लोगों के रहने की ओर इशारा करते हैं। इंटेक के एमके खंडुई संस्था की टीम और पुरातत्वविद् पीके लहरी और उप्र पुरातत्व विभाग के नर्सिंग त्यागी के साथ शुक्रवार को सुबह बावन बीघा टीला पहुंचे।
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यहां इन लोगों ने टीले के चारों ओर से जांच पड़ताल कर मिट्टी के नमूने लिए। साथ ही कुछ ईट भी साथ ले गए। उन्हीं ईटों में एक वह ईट भी शामिल है जिसके प्रारंभिक जांच के आधार पर लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु का किला होने की संभावना जताई जा रही है।
टीम ने जांच में पाया कि टीले के चारों ओर दो मीटर चौड़ी कुषाण काल की ईटों की दीवारें हैं। जो भगवान बुद्ध के समकालीन प्रतीत होती हैं। टीला क्षेत्र के तहत सात कुंए के अवशेष भी मौजूद हैं। इनमें से एक कुएं का व्यास करीब 19 फीट है।
टीम में शामिल लोगों ने संभावना जताई कि मध्य काल में यहां आकर बसे थारू समुदाय के लोगों ने यह खोदे होंगे। इंटेक की टीम में शामिल लोगों की मानें तो फिलहाल मौके पर कोई मृदभांड नहीं मिला है। जो ईट मिले हैं, उनमे से कुछ की साइज 32 सेमी लंबी, 21.5 सेमी चौड़ी है। जबकि ईट की मोटाई 5 सेमी है। टीम के लोगों के मुताबिक सात कुओं में से एक के अंदर 15 फीट गहराई के बाद एक सुरंग भी है।
जिसका एक मोहाना करीब 800 मीटर की दूरी पर स्थित छोटी गंडक नदी में खुलता है जबकि दूसरा सिरा वहां से करीब आठ किमी दूर कुशीनगर तक जाने की संभावना जताई। टीम ने करीब तीन घंटे तक बावन बीघा टीला क्षेत्र का मुआयना किया।