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स्वयं को पहचानना ही ईश्वर भक्ति : सुषमा
Fri, 18 Oct 2024 04:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 18 Oct 2024 04:33 AM IST
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फाजिलनगर। कस्बा के पावानगर महावीर इंटर काॅलेज परिसर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से आयोजित पांच दिवसीय हरि कथा के दूसरे दिन ईश्वर के भक्ति की महत्ता बताई गई। कथा वाचक साध्वी सुषमा भारती ने कहा संसार एक दिवास्वप्न है। स्वयं को पहचानना ही ईश्वर की भक्ति या प्राप्ति है। जीवन में दिखने वाली भौतिक वस्तुएं छलावा मात्र है। यह हमेशा परिवर्तित होते रहती हैं। यदि कोई स्थिर है तो केवल भगवान ही है। जब भगवान से जुड़ाव होगा, तो यह संसार खुद ही नश्वर लगने लगेगा।
उन्होंने राजा जनक का कथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने सपना देखा कि वे एक युद्ध हार गए हैं, अपना राज्य खो चुके हैं। अपनी जान बचाने के लिए जंगल में भाग गए हैं। अब वे भूखे थे और भोजन की तलाश में एक भिखारी बन गए थे। बहुत भूख और प्यास से व्याकुल होकर वे एक झोपड़ी के पास पहुंचे, जहां एक वृद्ध महिला ने उन्हें चावल और दाल दी। वृद्ध महिला ने कहा कि वे अपना भोजन स्वयं पका लें। भोजन पकाते समय दो पशु लड़ते हुए वहां पहुंचें और उसी पतीली पर गिर गए, जिसमें भोजन बन रहा था। उनकी नींद टूटी, तो वे पसीने से लथपथ थे। सुबह इस सपने के बारे अष्टावक्र से जानने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने बताया कि आप न तो भिखारी हैं और न ही सम्राट, आप ही वास्तविक हैं। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हम यहां आगंतुक हैं। सबको भगवान के धाम जाना है जो स्थायी है।
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उन्होंने राजा जनक का कथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने सपना देखा कि वे एक युद्ध हार गए हैं, अपना राज्य खो चुके हैं। अपनी जान बचाने के लिए जंगल में भाग गए हैं। अब वे भूखे थे और भोजन की तलाश में एक भिखारी बन गए थे। बहुत भूख और प्यास से व्याकुल होकर वे एक झोपड़ी के पास पहुंचे, जहां एक वृद्ध महिला ने उन्हें चावल और दाल दी। वृद्ध महिला ने कहा कि वे अपना भोजन स्वयं पका लें। भोजन पकाते समय दो पशु लड़ते हुए वहां पहुंचें और उसी पतीली पर गिर गए, जिसमें भोजन बन रहा था। उनकी नींद टूटी, तो वे पसीने से लथपथ थे। सुबह इस सपने के बारे अष्टावक्र से जानने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने बताया कि आप न तो भिखारी हैं और न ही सम्राट, आप ही वास्तविक हैं। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हम यहां आगंतुक हैं। सबको भगवान के धाम जाना है जो स्थायी है।
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