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Kushinagar News: कटवासी नाला भी उफनाया, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
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मरचहवा दक्षिण टोला की दुश्वारी। पानी से होकर चारा लाते किसान। संवाद
खड्डा। नारायणी नदी (गंडक) के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। रोहुआ नाला के बाद अब कटवासी नाला भी उफान पर है। इससे खड्डा ब्लॉक के नदी उस पार के गांवों के चारों तरफ पानी भर गया है। लोगों के आवागमन के अलावा दिनचर्या प्रभावित हो गई है।
बाढ़ से बचाव या मदद के नाम पर प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इससे गांव वालों में नाराजगी है। मरचहवा गांव के लोगों की दुश्वारियों कम नहीं हुई हैं। गांव के दक्षिण और पूरब टोला की करीब एक हजार की आबादी को सर्वाधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
गांव वालों ने बताया कि मरचहवा से बसंतपुर जाने वाली सड़क पर कई स्थानों पर पानी भरा हुआ है। कटबासी/बसंतपुर नाला में उफान आने से स्थिति और गंभीर हो गई है। गांव को जोड़ने वाली कई सड़कों पर जलभराव होने से लोगों को पशुओं के चारे, खेती-किसानी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी पार कर आना-जाना पड़ रहा है। गांव के विनोद, राजेश, चंद्रिका, राधेश्याम समेत अन्य लोगों का कहना है कि गांव में पानी नहीं घुसा है लेकिन चारों तरफ पानी है। गांव से निकलना है तो पानी पैदल पार करनी ही होगी ।विकट स्थिति के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई विशेष सहयोग या राहत व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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नाव की व्यवस्था न होने से लोगों को जोखिम उठाकर जलमग्न रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। पूरब टोला से बालगोविंद छपरा जाने वाले मार्ग समेत कई संपर्क रास्तों पर पानी भरा है। खेतों में भी जलभराव हो गया है। खेती-किसानी प्रभावित है। जलभराव के कारण दैनिक कार्यों में भी कठिनाई हो रही है। लोगों का कहना है कि पानी के बीच आवागमन के दौरान मगरमच्छ, जहरीले जीव-जंतु अथवा जंगली जानवरों का भय भी बना रहता है। जलस्तर कम होने के बावजूद गांव के लोगों का जीवन अब भी सामान्य नहीं हो सका है।
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बाढ़ से बचाव या मदद के नाम पर प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इससे गांव वालों में नाराजगी है। मरचहवा गांव के लोगों की दुश्वारियों कम नहीं हुई हैं। गांव के दक्षिण और पूरब टोला की करीब एक हजार की आबादी को सर्वाधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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गांव वालों ने बताया कि मरचहवा से बसंतपुर जाने वाली सड़क पर कई स्थानों पर पानी भरा हुआ है। कटबासी/बसंतपुर नाला में उफान आने से स्थिति और गंभीर हो गई है। गांव को जोड़ने वाली कई सड़कों पर जलभराव होने से लोगों को पशुओं के चारे, खेती-किसानी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी पार कर आना-जाना पड़ रहा है। गांव के विनोद, राजेश, चंद्रिका, राधेश्याम समेत अन्य लोगों का कहना है कि गांव में पानी नहीं घुसा है लेकिन चारों तरफ पानी है। गांव से निकलना है तो पानी पैदल पार करनी ही होगी ।विकट स्थिति के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई विशेष सहयोग या राहत व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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नाव की व्यवस्था न होने से लोगों को जोखिम उठाकर जलमग्न रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। पूरब टोला से बालगोविंद छपरा जाने वाले मार्ग समेत कई संपर्क रास्तों पर पानी भरा है। खेतों में भी जलभराव हो गया है। खेती-किसानी प्रभावित है। जलभराव के कारण दैनिक कार्यों में भी कठिनाई हो रही है। लोगों का कहना है कि पानी के बीच आवागमन के दौरान मगरमच्छ, जहरीले जीव-जंतु अथवा जंगली जानवरों का भय भी बना रहता है। जलस्तर कम होने के बावजूद गांव के लोगों का जीवन अब भी सामान्य नहीं हो सका है।