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Kushinagar News: जेडी ने सात अस्पतालों का जांच किया, नोटिस जारी कर मांगा जवाब
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कसया। सख्ती के बाद भी कसया में अवैध अस्पतालों का मकड़जाल खत्म नहीं हो रहा है। शासन में शिकायत पहुंचने के एडी हेल्थ के निर्देश पर इसकी जांच जेडी ने शुरू कर दिया है। कसया सीएचसी पर जेडी पहुंचे। इसके बाद हाईवे किनारे और कस्बे में संचालित सात अस्पतालों की जांच किया। खामियां मिलने और पंजीकरण का कागजात नहीं दिखाने पर नोटिस जारी किया। कोई डॉक्टर अस्पताल में नहीं मिला। तीन दिन के अंदर अस्पताल संचालकों से जवाब मांगा है। नहीं तो इन अस्पताल संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य फुलबदन कुशवाहा ने स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में अवैध तरीके से निजी अस्पतालों के संचालन होने की शिकायत शासन में की है। इसकी जांच एडी हेल्थ गोरखपुर को मिली है। शुक्रवार को जेडी हेल्थ के नेतृत्व में टीम कसया पहुंची। हाईवे पर संचालित दीन दयाल हॉस्पिटल, वरदान हॉस्पिटल, किलकारी अस्पताल, आशीर्वाद अस्पताल, आकृष्ट हॉस्पिटल, सरस्वती चाइल्ड केयर और ओम सिटी हॉस्पिटल की जांच के बाद नोटिस दिया। जांच के दौरान अधिकांश अस्पतालों के संचालक पंजीकरण का कागज नहीं दिखा सके और डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। इसके पूर्व कसया में संचालित दीनदयाल हॉस्पिटल के संचालक पर बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने के मामले में प्राथमिकी कसया के सीएचसी अधीक्षक डॉ. मारकंडेय चतुर्वेदी दर्ज करा चुके हैं। बावजूद संचालक अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा हैं और बेखौफ होकर बिना पंजीकृत अस्पताल का संचालन कर रहा है। टीम में शामिल जेडी हेल्थ डॉ. अरुण कुमार गर्ग और मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. वीके श्रीवास्तव शामिल रहे। डॉ. अरुण कुमार गर्ग ने बताया कि शासन के निर्देश पर जांच हो रही है। तीन दिन के अंदर नोटिस का जवाब नहीं देने पर संचालकों पर कार्रवाई होगी।
सीएचसी का किया औचक निरीक्षण
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को सीएचसी कसया का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का हाल जाना। इस दौरान दवा स्टॉक के रखरखाव और रजिस्टर संधारण में खामियां सामने आई, जिस पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई।
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गोरखपुर मंडल के जेडी हेल्थ डॉ. अरुण गर्ग और मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. वी. के. श्रीवास्तव ने ओपीडी कक्ष से निरीक्षण की शुरुआत की। सबसे पहले डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पंजिका की जांच की गई। इसके बाद डॉक्टर कक्ष, इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड और ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण किया गया। दवा वितरण कक्ष और स्टॉक रूम में दवाओं की उपलब्धता, भंडारण व्यवस्था, एक्सपायरी दवा रजिस्टर, समाप्त दवाओं के विवरण तथा कोल्ड चेन की स्थिति की बारीकी से जांच की गई। टीकाकरण फ्रीजर के तापमान यंत्र का भी परीक्षण किया गया। डेंगू वार्ड में दवाओं की उपलब्धता, भर्ती मरीजों की संख्या और ऑक्सीजन सिलेंडर की स्थिति के संबंध में जानकारी ली गई। कुछ दवाएं अनुपलब्ध मिलने पर अधीक्षक को तत्काल सूची तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के बाद जेडी हेल्थ डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि ईटीसी (एंटेरिक फीवर) वार्ड में तीन मरीज भर्ती पाए गए, जबकि यह बीमारी का सामान्य सीजन नहीं है। उन्होंने दवा स्टॉक व रजिस्टरों के रखरखाव में सुधार के निर्देश दिए। टीम स्टॉक और प्रबंधन से जुड़े कुछ रजिस्टर जांच के लिए अपने साथ ले गई। इस दौरान अधीक्षक डॉ. मार्कण्डेय चतुर्वेदी, डॉ. जलज गुप्ता, फार्मासिस्ट बशीर अहमद सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
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उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य फुलबदन कुशवाहा ने स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में अवैध तरीके से निजी अस्पतालों के संचालन होने की शिकायत शासन में की है। इसकी जांच एडी हेल्थ गोरखपुर को मिली है। शुक्रवार को जेडी हेल्थ के नेतृत्व में टीम कसया पहुंची। हाईवे पर संचालित दीन दयाल हॉस्पिटल, वरदान हॉस्पिटल, किलकारी अस्पताल, आशीर्वाद अस्पताल, आकृष्ट हॉस्पिटल, सरस्वती चाइल्ड केयर और ओम सिटी हॉस्पिटल की जांच के बाद नोटिस दिया। जांच के दौरान अधिकांश अस्पतालों के संचालक पंजीकरण का कागज नहीं दिखा सके और डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। इसके पूर्व कसया में संचालित दीनदयाल हॉस्पिटल के संचालक पर बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने के मामले में प्राथमिकी कसया के सीएचसी अधीक्षक डॉ. मारकंडेय चतुर्वेदी दर्ज करा चुके हैं। बावजूद संचालक अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा हैं और बेखौफ होकर बिना पंजीकृत अस्पताल का संचालन कर रहा है। टीम में शामिल जेडी हेल्थ डॉ. अरुण कुमार गर्ग और मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. वीके श्रीवास्तव शामिल रहे। डॉ. अरुण कुमार गर्ग ने बताया कि शासन के निर्देश पर जांच हो रही है। तीन दिन के अंदर नोटिस का जवाब नहीं देने पर संचालकों पर कार्रवाई होगी।
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सीएचसी का किया औचक निरीक्षण
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को सीएचसी कसया का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का हाल जाना। इस दौरान दवा स्टॉक के रखरखाव और रजिस्टर संधारण में खामियां सामने आई, जिस पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई।
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गोरखपुर मंडल के जेडी हेल्थ डॉ. अरुण गर्ग और मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. वी. के. श्रीवास्तव ने ओपीडी कक्ष से निरीक्षण की शुरुआत की। सबसे पहले डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पंजिका की जांच की गई। इसके बाद डॉक्टर कक्ष, इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड और ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण किया गया। दवा वितरण कक्ष और स्टॉक रूम में दवाओं की उपलब्धता, भंडारण व्यवस्था, एक्सपायरी दवा रजिस्टर, समाप्त दवाओं के विवरण तथा कोल्ड चेन की स्थिति की बारीकी से जांच की गई। टीकाकरण फ्रीजर के तापमान यंत्र का भी परीक्षण किया गया। डेंगू वार्ड में दवाओं की उपलब्धता, भर्ती मरीजों की संख्या और ऑक्सीजन सिलेंडर की स्थिति के संबंध में जानकारी ली गई। कुछ दवाएं अनुपलब्ध मिलने पर अधीक्षक को तत्काल सूची तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के बाद जेडी हेल्थ डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि ईटीसी (एंटेरिक फीवर) वार्ड में तीन मरीज भर्ती पाए गए, जबकि यह बीमारी का सामान्य सीजन नहीं है। उन्होंने दवा स्टॉक व रजिस्टरों के रखरखाव में सुधार के निर्देश दिए। टीम स्टॉक और प्रबंधन से जुड़े कुछ रजिस्टर जांच के लिए अपने साथ ले गई। इस दौरान अधीक्षक डॉ. मार्कण्डेय चतुर्वेदी, डॉ. जलज गुप्ता, फार्मासिस्ट बशीर अहमद सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।