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कर्म और दायित्व दोनों का निर्वहन जरूरी : प्रद्युम्न
Sat, 22 Jun 2024 04:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 22 Jun 2024 04:30 AM IST
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पकवा इनार। कुशीनगर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को कथा वाचक प्रद्युम्न प्रियाचार्य ने कथा कर्म दायित्व को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि कर्म और दायित्व दोनों का निर्वहन करना व्यक्ति के लिए बेहत ही महत्वपूर्ण हैं।
कथावाचक ने कहा कि धन व ऐश्वर्य की शक्ति व्यक्ति को अंधा बना देता है। जो नहीं समझ पाता, वह नष्ट हो जाता है। गोविंद का अर्थ त्रिगुणातीत व गौ रक्षक होता है। कर्म का निर्वहन करते हुए दायित्व निभाना चाहिए। संतानों की उपलब्धियां पर बहुत इठलाने की जरूरत नहीं है। सफलता भगवान को निवेदित कर देना चाहिए। इसके पूर्व व्यास गद्दी का मुख्य यजमान रहे वेदप्रकाश जायसवाल व पत्नी सुषमा जायसवाल, उमेश गुप्ता व पत्नी सुनीता देवी,प्रेम कुमार व पत्नी पिंकी कुमारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर आरती उतारी। कथा में बेहतर व्यवस्था को बनाने में गोपाल गुप्ता व पंकज कुमार जुटे रहे। इस दौरान संत इंद्रासन प्रसाद, डाॅ. हरिओम मिश्र, अशोक कुमार, अशोक प्रियदर्शी, दिनेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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कथावाचक ने कहा कि धन व ऐश्वर्य की शक्ति व्यक्ति को अंधा बना देता है। जो नहीं समझ पाता, वह नष्ट हो जाता है। गोविंद का अर्थ त्रिगुणातीत व गौ रक्षक होता है। कर्म का निर्वहन करते हुए दायित्व निभाना चाहिए। संतानों की उपलब्धियां पर बहुत इठलाने की जरूरत नहीं है। सफलता भगवान को निवेदित कर देना चाहिए। इसके पूर्व व्यास गद्दी का मुख्य यजमान रहे वेदप्रकाश जायसवाल व पत्नी सुषमा जायसवाल, उमेश गुप्ता व पत्नी सुनीता देवी,प्रेम कुमार व पत्नी पिंकी कुमारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर आरती उतारी। कथा में बेहतर व्यवस्था को बनाने में गोपाल गुप्ता व पंकज कुमार जुटे रहे। इस दौरान संत इंद्रासन प्रसाद, डाॅ. हरिओम मिश्र, अशोक कुमार, अशोक प्रियदर्शी, दिनेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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