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Kushinagar News: गाय के गोबर से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और दीयों की धूम
Mon, 20 Oct 2025 01:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 20 Oct 2025 01:30 AM IST
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सिधुआ मिश्रौली में गाय के गोबर से दीये बनातीं महिलाएं। स्रोत-सोशल मीडिया
पडरौना। पीओपी की बनी मूर्तियां और दीये अभी तक आपने देखी होंगी, लेकिन इस बार गाय के गोबर से बने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और दीये बाजार में धूम मचा रहे हैं। ग्राहक गाय के गोबर से बने दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खरीदारी कर रहे हैं। शहर के बाजारों में गोबर से निर्मित मूर्तियों के साथ-साथ दीये, हवन सामग्री और धूपबत्ती भी उपलब्ध है, जिनकी लोगों में खासी दिलचस्पी देखी जा रही है।
पडरौना क्षेत्र के सिधुआ मिश्रौली की मेनका कुशवाहा बताती हैं कि इस वर्ष राधाकृष्ण स्वयं सहायता समूह का गठन किया है। उनकी समूह में गांव की कई महिलाएं जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि दीपावली को खास बनाने के लिए समूह से जुड़ी महिलाओं के साथ मिलकर गाय के गोबर के दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाई गई हैं। इन मूर्तियों की मांग इतनी रही कि दीपावली से करीब तीन दिन पहले ही बिक गईं। इसके अलावा अलग-अलग त्योहारों पर उसके अनुरूप सामग्री बनाई जाती है।
इससे समूह से जुड़ी महिलाएं हर माह 4000 रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा बाजार में पारंपरिक पूजन सामग्री भी खूब बिक रही है। प्रसाद में प्रयोग करने के लिए चावल का लावा 50 से 60 रुपये, चीनी से बने हाथी, घोड़ा समेत अन्य खिलौने 100 रुपये बिक में रहे हैं। पीओपी की मूर्तियों का क्रेज भी कम नहीं है, जबकि मिट्टी के दीयों और गुल्लक की भी अच्छी डिमांड है। पीओपी की मूर्तियां 200 रुपये तक बाजार में उपलब्ध हैं।
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पडरौना क्षेत्र के सिधुआ मिश्रौली की मेनका कुशवाहा बताती हैं कि इस वर्ष राधाकृष्ण स्वयं सहायता समूह का गठन किया है। उनकी समूह में गांव की कई महिलाएं जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि दीपावली को खास बनाने के लिए समूह से जुड़ी महिलाओं के साथ मिलकर गाय के गोबर के दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाई गई हैं। इन मूर्तियों की मांग इतनी रही कि दीपावली से करीब तीन दिन पहले ही बिक गईं। इसके अलावा अलग-अलग त्योहारों पर उसके अनुरूप सामग्री बनाई जाती है।
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इससे समूह से जुड़ी महिलाएं हर माह 4000 रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा बाजार में पारंपरिक पूजन सामग्री भी खूब बिक रही है। प्रसाद में प्रयोग करने के लिए चावल का लावा 50 से 60 रुपये, चीनी से बने हाथी, घोड़ा समेत अन्य खिलौने 100 रुपये बिक में रहे हैं। पीओपी की मूर्तियों का क्रेज भी कम नहीं है, जबकि मिट्टी के दीयों और गुल्लक की भी अच्छी डिमांड है। पीओपी की मूर्तियां 200 रुपये तक बाजार में उपलब्ध हैं।
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