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आवास ‘घोटाले’ से कांपा गरीबों का घरबार
कुशीनगर
Updated Sat, 09 Apr 2016 11:29 PM IST
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बांसगांव खाखड़ टोले में इंदिरा आवास तो नहीं मिला प्रथम किस्त की धनराशि चुकाने की नोटिस अवश्य दे दी गई है।
- फोटो : अमर उजाला
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आवास ‘घोटाले’ से कांपा गरीबों का घरबार
हेमंत मधुप
दुदही। सरकारी मदद के दम से झोपड़ी से निकलकर पक्के मकान में बसने का सपना संजोए चार गरीब आज उस पल को कोस रहे हैं, जब उन्होंने यह अरमान पाला था।
छह साल पहले बांसगांव खाखड़ टोला के इन लोगों ने इंदिरा आवास के लिए आवेदन तो किया, लेकिन उनके सपने का घर जमीन पर न उतर सका। थकहार कर इन बेचारों ने इंदिरा आवास आवंटित होने की उम्मीद छोड़ दी।
लेकिन अब एक बार फिर इंदिरा आवास के नाम पर ये परेशान हैं। अंतर यह है कि अब इनकी परेशानी की वजह आवास आवंटन की आस नहीं बल्कि उस सरकारी धन की रिकवरी का नोटिस है, जो उन्हें कभी मिला ही नहीं। बांसगांव खाखड़ टोला के लल्लन कुशवाहा, रामचंद्र, रामू चौहान और दशरथ चौहान की यही कहानी है।
दुदही बाजार में ठेला लगाने वाले इन गरीबों के घरौंदे का पैसा किसी जालसाज की जेब में पहुंच चुका है। जर्जर झोपड़ी में अपने परिवारों के साथ गुजर-बसर करने वाले इन लोगों को इसका पता तब चला, जब अधिकारियों से इन्होंने छह साल पहले किए आवेदन के बाद भी आज तक आवास आवंटित न होने की शिकायत की। इस पर एक माह पहले जांच हुई तो पता चला कि वर्ष 2012-13 में इनके नाम पर इंदिरा आवास की प्रथम किश्त 33750.00 रुपये आवंटित हुए थे। लेकिन इन गरीबों तक धन नहीं पहुंचा।
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जानकारी से सन्न हुए ये गरीब 25 दिन पहले इसकी शिकायत लेकर बीडीओ से लेकर डीएम दफ्तर तक गए। उम्मीद थी कि जांच में सब ठीक हो जाएगा। मगर अब तक राहत देने वाली कोई कार्रवाई नहीं हुई। अलबत्ता गुरुवार को उन्हें एक सप्ताह के भीतर प्रथम किश्त की रकम सरकारी खाते में जमा करने की नोटिस भेज दी गई। नोटिस मिलने से इन गरीबों का परिवार बेचैन हो उठा है।
पशोपेश में डूबा पूरा परिवार यह नहीं समझ पा रहा है कि अब क्या करें? लल्लन कुशवाहा, रामचंद्र, रामू चौहान और दशरथ चौहान कह रहे हैं कि जो धन उन्हें मिला ही नहीं अब उसकी वसूली के लिए हमें परेशान किया जा रहा है।
ठेले की कमाई से किसी तरह परिवार की गाड़ी चलती है, ऐसे में अगर अधिकारियों से राहत नहीं मिली तो झोपड़ी का तिनका-तिनका भी बिक जाएगा। इस संबंध में बीडीओ संजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रकरण की जानकारी हुई है। सोमवार को जाकर जांच करेंगे।
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हेमंत मधुप
दुदही। सरकारी मदद के दम से झोपड़ी से निकलकर पक्के मकान में बसने का सपना संजोए चार गरीब आज उस पल को कोस रहे हैं, जब उन्होंने यह अरमान पाला था।
छह साल पहले बांसगांव खाखड़ टोला के इन लोगों ने इंदिरा आवास के लिए आवेदन तो किया, लेकिन उनके सपने का घर जमीन पर न उतर सका। थकहार कर इन बेचारों ने इंदिरा आवास आवंटित होने की उम्मीद छोड़ दी।
लेकिन अब एक बार फिर इंदिरा आवास के नाम पर ये परेशान हैं। अंतर यह है कि अब इनकी परेशानी की वजह आवास आवंटन की आस नहीं बल्कि उस सरकारी धन की रिकवरी का नोटिस है, जो उन्हें कभी मिला ही नहीं। बांसगांव खाखड़ टोला के लल्लन कुशवाहा, रामचंद्र, रामू चौहान और दशरथ चौहान की यही कहानी है।
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दुदही बाजार में ठेला लगाने वाले इन गरीबों के घरौंदे का पैसा किसी जालसाज की जेब में पहुंच चुका है। जर्जर झोपड़ी में अपने परिवारों के साथ गुजर-बसर करने वाले इन लोगों को इसका पता तब चला, जब अधिकारियों से इन्होंने छह साल पहले किए आवेदन के बाद भी आज तक आवास आवंटित न होने की शिकायत की। इस पर एक माह पहले जांच हुई तो पता चला कि वर्ष 2012-13 में इनके नाम पर इंदिरा आवास की प्रथम किश्त 33750.00 रुपये आवंटित हुए थे। लेकिन इन गरीबों तक धन नहीं पहुंचा।
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जानकारी से सन्न हुए ये गरीब 25 दिन पहले इसकी शिकायत लेकर बीडीओ से लेकर डीएम दफ्तर तक गए। उम्मीद थी कि जांच में सब ठीक हो जाएगा। मगर अब तक राहत देने वाली कोई कार्रवाई नहीं हुई। अलबत्ता गुरुवार को उन्हें एक सप्ताह के भीतर प्रथम किश्त की रकम सरकारी खाते में जमा करने की नोटिस भेज दी गई। नोटिस मिलने से इन गरीबों का परिवार बेचैन हो उठा है।
पशोपेश में डूबा पूरा परिवार यह नहीं समझ पा रहा है कि अब क्या करें? लल्लन कुशवाहा, रामचंद्र, रामू चौहान और दशरथ चौहान कह रहे हैं कि जो धन उन्हें मिला ही नहीं अब उसकी वसूली के लिए हमें परेशान किया जा रहा है।
ठेले की कमाई से किसी तरह परिवार की गाड़ी चलती है, ऐसे में अगर अधिकारियों से राहत नहीं मिली तो झोपड़ी का तिनका-तिनका भी बिक जाएगा। इस संबंध में बीडीओ संजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रकरण की जानकारी हुई है। सोमवार को जाकर जांच करेंगे।