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बैंकों के विलय से फंसा चार हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय

Tue, 17 May 2022 11:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 11:48 PM IST
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Honorarium of four thousand Anganwadi workers trapped by the merger of banks
बैंकों के विलय से फंसा चार हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय
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तीन से सात महीने तक का बाकी है मानदेय, परिवार का भरण-पोषण करने में आ रही दिक्कत
कुशीनगर। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में कार्यरत ज्यादातर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं को बैंकों के विलय के बाद से मानदेय नहीं मिल पा रहा है। करीब चार हजार कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय आईएफएससी कोड न बदले जाने व अन्य कारणों से बाधित है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को परिवार का भरण-पोषण या अन्य जरूरी कार्यों को करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 1003 ग्राम पंचायतें तथा 1,540 राजस्व गांव हैं, जहां बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई है। इन्हें गांव की गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए पुष्टाहार तथा अन्य सरकारी सुविधाएं मुहैया करानी होती है। विभाग के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिले में संख्या 6,961 है। इनमें ज्यादातर का खाता पूर्वांचल बैंक की शाखाओं में था। जब पूर्वांचल बैंक सहित कुछ अन्य बैंकों का विलय (प्रवर्तन) बड़ौदा यूपी बैंक सहित अन्य बैंक शाखाओं में हुआ तो आईएफएससी कोड सहित अन्य व्यवधान आने की वजह से उनके खाते में मानदेय की रकम जानी बंद हो गई। कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं तथा विभागीय प्रयास से 1,699 का खाता तो सुधर गया और उनका मानदेय जाने लगा, लेकिन 5,262 का मानदेय अब भी फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि यह बकाया तीन से सात माह तक का है।
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जिलाध्यक्ष बोलीं- मानदेय की गुजर-बसर का आधार
उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी राज्य कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष ममता मिश्रा का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 5,500 रुपये, सहायिका और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का 3,500-3,500 रुपये मानदेय है। इनमें ज्यादातर का तीन से सात माह का मानदेय बाकी है। इनमें कई ऐसी हैं, जिनके पति गुजर चुके हैं। मानदेय ही गुजर-बसर का आधार है, लेकिन वह भी बकाया होने के कारण समस्या आ री है। पूर्व में डीएम की मौजूदगी में एडीएम को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। अब पुन: डीएम से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराया जाएगा तथा इसका निदान कराने की मांग की जाएगी।
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कोट
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या जनपद में 6,961 है। पूर्वांचल बैंक में ज्यादातर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का खाता है। इस बैंक का बड़ौदा यूपी बैंक में विलय होने के बाद आईएफएससी कोड सहित अन्य चीजें न ठीक होने के कारण मानदेय रुक गया है। इनमें से 1,699 का ठीक करा दिया गया है। उनका मानदेय जा रहा है। अन्य का भी ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है।
शैलेंद्र राय, जिला कार्यक्रम अधिकारी,
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग
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