फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Greed for goods and money is turning illiterate women into debtors

Kushinagar News: सामान और रुपयों का लालच अनपढ़ महिलाओं को बना रहा कर्जदार

Thu, 26 Dec 2024 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 26 Dec 2024 12:55 AM IST
विज्ञापन
Greed for goods and money is turning illiterate women into debtors
पडरौना/दुदही। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का मकड़जाल भोली-भाली ग्रामीण महिलाओं को कर्ज के दलदल में डुबो रहा है। छोटे से सामान या कुछ पैसों की लालच में शिकार बनी इन महिलाओं की एक के बाद एक कई जगहों से लोन लेकर बचने की कोशिशें उन्हें उबारने के बजाए और कर्जदार बना दे रही हैं। ऐसी कई महिलाओं ने अपनी स्थिति बताई, जिसमें वह एक कर्ज को चुकाने के चक्कर में कई कंपनियों से कर्ज चुकी हैं।
विज्ञापन

सूत्रों की मानें तो माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी ऋण देने की आड़ में पहले तो ऐसे लोगों का चयन करते हैं जो अनपढ़ हो और आसानी से उनके जाल में फंस जाएं। इसमें उनका सबसे आसान निशाना ग्रामीण क्षेत्र की अनपढ़ महिलाएं हैं। इन्हें फाइनेंस के नियम कानून का ज्ञान न तो ज्ञान है और न ही फॉर्म या दूसरे कोरम पूरा करने की समझ। बस वह लोन के चक्कर में कागजों पर कहीं भी अंगूठा लगाने के लिए तैयार हो जा रही हैं। इसका पूरा फायदा ब्याज पर लोन देने वाली माइक्रो फाइनेंस कंपनियां उठाती हैं। ऋण देने के नाम पर समूह के सदस्यों से इन लोगों का हस्ताक्षर किया हुआ ब्लैंक चेक भी बतौर गारंटी ये रख लेते हैं। बाद में किस्त देने के नाम पर इतनी ब्याज राशि भी जोड़ दी जाती है, जो मानक के मापदंडों के विपरीत होती है।
विज्ञापन

माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारियों और समूह लीडर मिलकर भोले-भाले गरीब अनपढ़ लोगों को निशाना बना कर मोटी रकम कमा रहे है। विशुनपुरा पुलिस ने करीब छह माह पूर्व माइक्रो फाइनेंस कंपनी के वर्कर समेत चार लोगों पर केस दर्ज किया था, जिसमें पडरौना शहर के एक मोहल्ले का रहने वाला जालसाज भी शामिल था। ऋण लेने वाली महिलाओं का माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के वर्करों के कहने पर फर्जी पहचान पत्र बनाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि फर्जी आईडी तैयार कर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज दिलाने की कई शिकायतें मिल चुकी है। इस बिंदु पर पुलिस काम कर रही है। ऐसे गिरोह पर बहुत जल्द शिकंजा कसा जाएगा।
------------

केस नंबर एक
- दुदही निवासी मनोज की पत्नी रीना देवी एक महिला के बहकावे में आ गई। पायल देने की बात कहकर वह समूह से जुड़ गई और ऋण निकलवाने के बाद वह महिला रुपये लेकर फरार हो गई। ऐसे ही लालच देकर तीन समूह से ऋण निकलवाकर कर रुपये ले लिए। कुछ दिन रुपये किस्त भरने के बाद किस्त भरना बंद कर दिया। अब वसूली वाले रीना के घर पहुंचकर उसे प्रताड़ित करने लगे। यहां तक की एक दिन गैस चूल्हा घर से निकाल कर उठा ले गए। इस डर से रीना डर से मायके रह रही है।

--------------
केस नंबर दो
- दुदही निवासी गीता देवी अपने पति से चुपके साड़ी और 500 रुपये की लालच में आकर एक महिला ने पांच अलग-अलग कंपनियों से ऋण निकलवा दिया। इससे गीता की पति की जगह दूसरे से पहचान पत्र और फाॅर्म पर हस्ताक्षर करा लिया गया। रुपये लेने वाली महिला ने कुछ दिन तक किस्त जमा करने के बाद बंद कर दिया। कंपनी वाले फिर गीता को प्रताड़ित करने लगे। इसको लेकर पति-पत्नी में विवाद बढ़ गया। गीता रात को दूसरे घर सोने लगी। एक दिन लकड़ी लेकर आ रही थी। बैंक के कर्मचारी ने रोका तो लकड़ी फेंककर भागने लगी। इस दौरान चार पहिया वाहन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई।
-------------
महिला के नाम पर कर्ज, पति गारंटर
- माइक्रो फाइनेंस कंपनियां आम तौर पर महिलाओं के नाम पर कर्ज देती हैं। उनकी दलील होती है कि पुरुष दुरुपयोग कर सकता है। मगर कर्ज स्वीकृत करने के लिए पति-पत्नी दोनों की फोटो ली जाती है। दोनों से हस्ताक्षर कराए जाते हैं। उसके घर, चल-अचल संपत्ति का सर्वे कराया जाता है, ताकि किश्त न मिलने पर वे इसकी रिकवरी संपत्ति से कर सकें। लेकिन कुछ कंपनियों के कर्मचारियों ने एक-दो महिलाओं को समूह का टीम लीडर बना रखा है। पति के स्थान पर किसी दूसरे से हस्ताक्षर करा लेते हैं और पति को इसकी कानों-कान भनक तक नहीं लगता है। जब किस्त के लिए समूह के कर्मचारी पहुंचते है तो उन्हें इसकी जानकारी होती है।
---------------
ताक पर रखते हैं नियम
एमएफआई का नियम है कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम दो लाख और शहरी क्षेत्र के लिए तीन लाख तक ऋण दिया जा सकता है, लेकिन एक कर्मचारी आधार और वोटर कार्ड बनाकर अगल-अलग माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से पांच लाख तक ऋण दे दे रहे हैं। जब महिला ऋण लेने जाती है तो आधार कार्ड और पैन कार्ड से सिबिल स्कोर की जांच होती है। इसमें सिबिल स्कोर के साथ यह भी बता देता है कि कहा-कहा से यह महिला ऋण लिया है। सिबिल स्कोर अच्छा होने पर 20 हजार से दो लाख तक ऋण देने का प्राविधान है। कुछ ग्राहकों ने बताता कि जब माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कर्मचारियों से अच्छी ताल-मेल हो जाती है तो 500 से 1000 हजार लेते हैं। किसी अन्य व्यक्ति की आधार पर नाम बदल कर नकली आधार तैयार कर ऋण दे देते है।

------------------------
प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर काट लेते हैं रुपये
- माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के मकड़जाल में ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार फंस चुके हैं। इन कंपनियों की कार्यप्रणाली पुराने जमाने के साहूकारों से भी जटिल बताई जाती है। जानकार लोगों का कहना है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद रकम का एक हिस्सा प्रोसेसिंग चार्ज व बीमा के नाम पर काट लिया जाता है। यानी अगर किसी का 30 हजार रुपये ऋण स्वीकृत हुआ तो उसके हाथ में बमुश्किल 24-25 हजार रुपये ही आते हैं। आसानी से कर्ज मिलने की लालच में जरूरतमंद ग्रामीण इनकी हर बात मानते चले जाते हैं, मगर एक बार रकम ले लेने के बाद इसे अदा करने में उनकी उम्र बीत जाती है। बाद में किस्त जमा न होने पर परिवार को प्रताड़ित करते हैं। जिले में विभिन्न नामों से दस से ज्यादा कंपनियां कस्बों में कार्यालय खोलकर अपने एजेंट के जरिए मजदूर वर्ग का समूह बनाकर ऋण देने का काम कर रही हैं। इलाज, जरूरत का सामान खरीदने, शादी-विवाह या अन्य आवश्यकता होने पर गरीब तबका यह सोचकर उनसे ऋण लेता है कि धीरे-धीरे कमाई करके किस्त भर देंगे। भारी भरकम ब्याज के कारण वह समय से किस्त अदा नहीं हो पाती है।

मेरठ--------सेंट जॉन्स स्कूल में हुआ क्रिसमस कार्यक्रम

मेरठ--------सेंट जॉन्स स्कूल में हुआ क्रिसमस कार्यक्रम- फोटो : संवाद

मेरठ--------सेंट जॉन्स स्कूल में हुआ क्रिसमस कार्यक्रम

मेरठ--------सेंट जॉन्स स्कूल में हुआ क्रिसमस कार्यक्रम- फोटो : संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed