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Kushinagar News: सनातन संस्कृति में ऋषियों का बड़ा महत्व
Wed, 20 Mar 2024 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 20 Mar 2024 12:42 AM IST
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फाजिलनगर। सनातन संस्कृति में ऋषियों का बड़ा महत्व रहा है। राजा महाराजा इनसे आशीर्वाद प्राप्त करते थे। सनातन संस्कृति में सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलयुग की मान्यता है। कलयुग की शुरुआत शृंगी ऋषि के द्वारा राजा परीक्षित को दिए शाप से मानी जाती है।
ये बातें कथावाचक विष्णु दास ने कहीं। वे मंगलवार को सठियांव गांव स्थित राम जानकी मंदिर में भागवत कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित अर्जुन के पौत्र तथा अभिमन्यु के पुत्र थे। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने विभांडक ऋषि से पीने के लिए पानी मांगा, लेकिन ध्यान में होने के चलते ऋषि ने कोई जवाब नहीं दिया। राजा ने अपना अपमान समझकर ध्यानमग्न ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया। इसकी जानकारी जब उनके पुत्र ऋषि शृंगी को हुई, तो वे क्रोधित हो गए और ऋषियों का अपमान मानते हुए राजा को शाप दे दिया कि सात दिन में नागराज तक्षक के डसने से राजा परीक्षित की मृत्यु हो जाएगी। शाप के मुताबिक, सात दिन बाद नागराज तक्षक ने राजा को डसा, जिससे उनकी मौत हो गई। यहीं से कलयुग की शुरुआत मानी जाती है। इससे पहले यज्ञाचार्य राकेश पांडेय ने विधि-विधान से व्यास गद्दी का पूजन किया। महंत बलराम दास ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।
इस दौरान नगर पंचायत चेयरमैन शत्रुमर्दन प्रताप शाही, सभासद जेपी सिंह, पूर्व प्रधान दिनेश कुमार सिंह, केदार सिंह, कृपाशंकर सिंह, राणा प्रताप सिंह, रामसेवक सिंह, राकेश कुमार सिंह, ओमप्रकाश सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, ब्रजेश कुमार सिंह, शिव शंकर तिवारी, सुनील पांडेय आदि मौजूद रहे।
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ये बातें कथावाचक विष्णु दास ने कहीं। वे मंगलवार को सठियांव गांव स्थित राम जानकी मंदिर में भागवत कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित अर्जुन के पौत्र तथा अभिमन्यु के पुत्र थे। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने विभांडक ऋषि से पीने के लिए पानी मांगा, लेकिन ध्यान में होने के चलते ऋषि ने कोई जवाब नहीं दिया। राजा ने अपना अपमान समझकर ध्यानमग्न ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया। इसकी जानकारी जब उनके पुत्र ऋषि शृंगी को हुई, तो वे क्रोधित हो गए और ऋषियों का अपमान मानते हुए राजा को शाप दे दिया कि सात दिन में नागराज तक्षक के डसने से राजा परीक्षित की मृत्यु हो जाएगी। शाप के मुताबिक, सात दिन बाद नागराज तक्षक ने राजा को डसा, जिससे उनकी मौत हो गई। यहीं से कलयुग की शुरुआत मानी जाती है। इससे पहले यज्ञाचार्य राकेश पांडेय ने विधि-विधान से व्यास गद्दी का पूजन किया। महंत बलराम दास ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।
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इस दौरान नगर पंचायत चेयरमैन शत्रुमर्दन प्रताप शाही, सभासद जेपी सिंह, पूर्व प्रधान दिनेश कुमार सिंह, केदार सिंह, कृपाशंकर सिंह, राणा प्रताप सिंह, रामसेवक सिंह, राकेश कुमार सिंह, ओमप्रकाश सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, ब्रजेश कुमार सिंह, शिव शंकर तिवारी, सुनील पांडेय आदि मौजूद रहे।
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