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गंडक की कटाने से साल दर साल सिमट रहा अहिरौलीदान, अब डीह टोला पर संकट

Sun, 02 Aug 2020 07:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2020 07:18 PM IST
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gradually shorten ahiraulidan due to flood
नरवाजोत पिपराघाट बांध पर बचाव कार्य करते मजदूर । - फोटो : KUSHINAGAR
गंडक की कटाने से साल दर साल सिमट रहा अहिरौलीदान, अब डीह टोला पर संकट
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तमकुहीरोड। बिहार बार्डर पर स्थित अहिरौलीदान गांव का वजूद पिछले पांच साल से खतरे में है। हर साल गांव का कुछ न कुछ हिस्सा गंडक नदी की धारा में विलीन होता जा रहा है। कंचन टोला व बैरिया टोला तो पूरी तरह से कट चुका है। इसके अलावा कचहरी टोला, खैरखूटा, नोनियापट्टी व मदरहा में भी कटान हो चुका है। इस बार नदी ने डीह टोला को निशाना बना रखा है। इस टोला के लोग भी अब अपने पक्के मकानों को तोड़ रहे हैं।
तमकुहीराज तहसील का गांव अहिरौलीदान गंडक नदी के किनारे बसा है। करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव के बीच से होकर एपी बांध बना है। गांव के पांच टोले खैरखूटा, नोनियापट्टी, मदरही, कचहरी टोला व डीह टोला बांध के उत्तर तरफ नदी के किनारे हैं। जबकि लोकनहा, छितौनी समेत कई पुरवे बांध के दक्षिण तरफ हैं। उत्तर तरफ बसे कंचन टोला वर्ष 2012 में बैरिया टोला व 2014 में कंचन टोला पूरी तरह से कट गया। इसके अलावा 2017 में कचहरी टोला के करीब डेढ़ सौ मकान भी कट गए। खैरखूटा, नोनियापट्टी व मदरही भी आंशिक रूप से प्रभावित हो गए। इस साल नदी का सीधा दबाव डीह टोला पर है। पिछले तीन सप्ताह से गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार चढ़ाव के कारण कटान तेज हो गया है। लगभग 800 आबादी वाले डीह टोला में कटान तेज होने के कारण अब तक राजपत यादव, नथुनी यादव, जवाहर यादव, विश्वनाथ यादव, दीनानाथ यादव आदि ने कटान के भय से अपने पक्के मकानों को तोड़ दिया है। नदी के दक्षिण तरफ खेती की जो जमीन थी, उसी में झोपड़ी डालकर जीवन बसर कर रहे हैं। डीह टोला निवासी सुरेश यादव, धुरंधर, केदार, लालबाबू, श्रीकिशुन, हरीलाल, लालू, सुजीत यादव, सुरेंद्र, सुबाष, नंदकिशोर आदि का कहना है कि उनके गांव को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। अब अपने हाथों अपना घर उजाड़कर यहां से पलायन करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
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अब तक 88 लोगों को मिला मुआवजा
यहां 2017 में कचहरी टोला के लगभग डेढ़ सौ मकान गंडक नदी की कटान की भेंट चढ़ गये थे। इनमें केवल 88 लोगों को ही सरकारी मुआवजा मिला। 2018 में नोनियापट्टी, खैरखुटा और मदरही में 50 से अधिक रिहायशी घर नदी की धारा में विलीन हो गए। इनमें से भी अधिकांश लोगों को अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली। बैरिया टोला व कंचन टोला को तो प्रशासन कई वर्ष पहले ही भूल चुका है।
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नदी के कहर से बचाना मुश्किल : एसडीओ
बाढ़ खंड डिवीजन तृतीय के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि अहिरौलीदान गांव के डीह टोला समेत कई पुरवे नदी क्षेत्र में बसे हैं। नदी के कहर से इन्हें बचाना मुश्किल है। बरसात में इन गांवों तक आने जाने का सुरक्षित मार्ग भी नहीं है। गंडक नदी के तेज बहाव को रोकने के लिए यहां कोई विकल्प नहीं है। फिर भी कटान रोकने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
दुर्व्यवहार से नाराज नाविकों ने रोक दी नाव
सोहगी बरवा नहीं जा पाए मरचहवा व बसंतपुर के लोग
नाविकों को मनाया गया, सोमवार से चलेंगी नावें : ग्राम प्रधान
अमर उजाला ब्यूरो
खड्डा। क्षमता से अधिक लोगों को नाव में बैठाने से मना करने पर कुछ लोगों ने नाविकों के साथ दुर्व्यवहार किया। इससे नाराज नाविकों ने नाव चलाना बंद कर दिया। गंडक नदी की बाढ़ से प्रभावित मरचहवा व बसंतपुर के लोगों को सोहगी बरवा तक लाने-ले जाने के लिए लगी नाव भी रुक गई है। ग्राम प्रधान का दावा है कि नाराज नाविकों को मना लिया गया है। सोमवार से नावें चलेंगी।
खड्डा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित मरचहवा व बसंतपुर के करीब चार हजार लोगों के लिए दो छोटी नावें ही आवागमन का साधन हैं। प्रशासन के आदेश पर संचालित नाव के नाविक अक्सर उन लोगों के गुस्से का शिकार हो जाते हैं जो नाव पर सवार नहीं हो पाते हैं। लोगों को दवा या अन्य जरूरत के लिए सोहगीबरवा जाना पड़ता है। लेकिन एक बार नाव जाती है तो दूसरे चक्कर के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। नाविकों का कहना है कि घाट पर पहुंचे सभी लोग एक ही बार में नाव पर बैठना चाहते हैं। क्षमता से अधिक सवारी होने पर नाव डूबने का खतरा रहता है। नाव पर नहीं बैठ पाने से नाराज कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसीलिए नाव संचालन बंद कर दिया गया है। नाव बंद होने के चलते रविवार को लोग सोहगीबरवा नहीं जा पाए।

मरचहवा के ग्राम प्रधान इजहार ने बताया कि कुछ लोगों के दुर्व्यवहार से नाराज नाविकों ने नाव चलानी बंद कर दी थी। नाविकों को समझा बुझाकर मना लिया गया है। सोमवार से नावों का दोबारा संचालन शुरू हो जाएगा।
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