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कृषि विवि : कृषि शिक्षा विभाग को हस्तांतरित होगी गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान की 276.21 एकड़ भूमि

Thu, 24 Aug 2023 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 24 Aug 2023 12:15 AM IST
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genda singh sugar research center land will be given to agriculture university
कृषि विवि : कृषि शिक्षा विभाग को हस्तांतरित होगी गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान की 276.21 एकड़ भूमि
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लखनऊ में मंत्रिपरिषद की बैठक में कुशीनगर में बनने वाले कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बारे में कैबिनेट ने लिया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। लखनऊ में मंत्रिपरिषद की बैठक में कुशीनगर में बनने वाले कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के विषय में एक बार पुनः कैबिनेट ने निर्णय लिया। अब कैबिनेट में यह मुहर लगी है कि कुशीनगर में बनने वाले कृषि विश्वविद्यालय के लिए गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान की 276 एकड़ 21 डिस्मिल भूमि कृषि शिक्षा विभाग के नाम की जाएगी।
इसके पहले पिछले सात जुलाई को होने वाली प्रधानमंत्री की जनसभा के पहले यह सुगबुगाहट थी कि उस भूमि पर कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं की जाएगी। तब प्रशासन ने कसया के मैत्रेय भूमि और कृषि बीज प्रक्षेत्र गाजीपुर की भूमि स्थानांतरित करने की कार्यवाही शुरू की थी। तब से ही क्षेत्र में कृषि विवि के बभनौली से कुशीनगर जाने पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी। अब कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही के गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान की भूमि के स्थानांतरण की बात ने पुनः क्षेत्रवासियों में जोश भर दिया।
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390.54 एकड़ भूमि की है जरूरत, अकेले गेंदा सिंह संस्थान के पास 276.21 एकड़ भूमि उपलब्ध

बभनौली के गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान परिसर में स्थापित होने वाले कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि से न केवल विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं किसानों को फायदा होगा, बल्कि यह विवि पूर्वांचल के बड़े शहरों से कुशीनगर की कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट माध्यम बनेगा। विवि खुल जाने से बाॅर्डर पर स्थित इन इलाकों का सामाजिक पिछड़ापन तो दूर होगा ही, इसके साथ ही एशिया स्तर के गेंदा सिंह गन्ना अनुसंधान केंद्र और पास में ही स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की महत्ता बढ़ जाएगी। तीनों कृषि से जुड़े संस्थान के एक साथ काम करने से दो छोर से बिहार से जुड़ा होने वाला कुशीनगर समृद्धि की तरफ अग्रसर होगा।
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कुशीनगर में बनने वाले कृषि विश्वविद्यालय के लिए लगभग 390.54 एकड़ भूमि की जरूरत होगी, जिसमे लगभग 750 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 390.54 एकड़ की जरूरत पड़ने वाली भूमि में अकेले गेंदा सिंह के पास 276.21 एकड़ भूमि है। इसके बाद जरूरत बची सिर्फ 145 एकड़ की भूमि और इसके लिए शासन के पास कई विकल्प हैं। शासन अब 145 एकड़ की भूमि कृषि बीज प्रक्षेत्र गाजीपुर, मैत्रेय परियोजना की भूमि और सरगटिया की भूमि में से उपयुक्त चुनकर हस्तांतरित करेगा, जिसके बाद अब कृषि विवि का शिलान्यास होगा।


निर्माण के साथ ही गन्ना विकास व शुगर टेक्नोलॉजी पर होगा काम

जिले में कृषि विश्वविद्यालय की घोषणा हो चुकी है। पुनः कैबिनेट में मंत्री परिषद की बैठक के बाद निर्णय से यह कयास लगाया जा रहा है कि जल्द इसका शिलान्यास भी होगा। कुशीनगर का कृषि विवि किसानों के साथ आगामी लोकसभा चुनाव के लिए ट्रंप कार्ड साबित होगा।
मंत्री परिषद की बैठक के प्रेस कांफ्रेंस में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि कुशीनगर में महात्मा बुद्ध कृषि विवि के निर्माण के साथ ही यहां शुगर केन (गन्ना) विकास व गन्ना टेक्नोलॉजी पर कार्य किया जाएगा।इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और मूलतः किसानों को फायदा होगा।


एशिया का सबसे बडसा और दूसरे नंबर पर शुमार होने वाला गेंदा सिंह गन्ना अनुसंधान संस्थान बभनौली, तमकुही में ही बनना चाहिए। यह किसानों के साथ उनके नेता गेंदा सिंह को समर्पित होगा। कृषि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र के किसानों का अनेक वर्षों से सपना रहा है, जो इस वर्तमान भाजपा सरकार में पूरा किया गया। जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान के नारे को चरितार्थ किया जा रहा है।

-जयंत कुमार सिंह, पूर्व प्रदेश मंत्री, भाजपा किसान मोर्चा, यूपी


सरकार ने कृषि विश्वविद्यालय देकर बहुत बड़ा उपकार किया है। कुशीनगर कृषि आधारित जिला है। यहां काफी संख्या में किसान कृषि कार्य करते हैं। यहां के किसानों के बच्चे बाहर पढ़ाई करने जाते हैं। अब जिले में जब कृषि विश्वविद्यालय हो जाएगा तो यहां के किसान अब वैज्ञानिक खेती करने में माहिर हो जाएंगे। इससे जिले को बहुत बड़ा लाभ होगा। किसानों की आय बढ़ेगी और पैदावार भी बढ़ेगी। शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार तीनों मामले में काम होगा। विभिन्न तकनीकों में किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। चाहे अनाज हो या दलहन हो या तिलहन। केला, सब्जी सहित अन्य फसलों के बारे में किसानों युवाओं को सटीक जानकारी मिलेगी। वहीं, शिक्षण संस्थान के माध्यम से जो बच्चे जुड़ रहे हैं, उन्हें स्थानीय रूप में बड़ा अवसर मिलेगा।

-डॉ अशोक राय, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, सरगटिया
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