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Kushinagar News: छुट्टा पशुओं को पहुंचाएंगे गोशाला, दान में जुटाएंगे भूसा
Thu, 06 Apr 2023 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 06 Apr 2023 01:16 AM IST
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हाटा में गोशाला में पहुंचे शासन से नामित नोडल अधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी और पशुपालन विभाग के
पहले दिन शासन और पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारियों ने किया गोशालाओं का निरीक्षण
- जनपद की गोशालाओं में हैं 1,762 गोवंश
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। छुट्टा पशुओं से हो रहे नुकसान को रोकने और इन्हें संरक्षित करने के लिए बुधवार को तीन दिवसीय अभियान शुरू कर दिया गया। इसके लिए कुशीनगर जनपद में दो नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। एक शासन से तो दूसरे पशुपालन विभाग के हैं। इन दोनों नोडल अधिकारियों ने तीन गोशालाओं का निरीक्षण किया तथा वहां पशुओं के लिए चारा, पानी, इलाज और सफाई का पूरा ध्यान रखने का निर्देश दिया।
छुट्टा पशुओं के चलते फसलों को नुकसान तो होता ही है, सड़कों पर इनके चलते दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके अलावा आवागमन भी बाधित होता है। बताया जा रहा है कि छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में संरक्षित करने के लिए शासन ने 31 मार्च तक का समय मुकर्रर किया था, फिर भी अधिकांश गोवंश अभी भी सड़कों और खेतों में दिख रहे हैं। इसलिए शासन स्तर से प्रत्येक जनपद में दो-दो नोडल अधिकारियों को नामित कर छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए पांच से सात अप्रैल तक तीन दिन का अभियान चलाने का निर्देश दिया गया था।
इसी क्रम में कुशीनगर जनपद के लिए शासन की ओर से लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी तथा पशुपालन विभाग से गोरखपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. विकास साठे को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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बुधवार को इन दोनों नोडल अधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ हाटा, कप्तानगंज और रामकोला के गोशाला का निरीक्षण किया। नोडल अधिकारी डॉ. विकास साठे ने बताया कि गोशालाओं में पशुओं के लिए चारा, पानी, उपचार और सफाई में कोई कमी न रहे, इसकी हिदायत दी गई। यह भी जोर दिया गया कि भूसा दान में ही एकत्र किया जाए। जहां भी छुट्टा पशु घूम रहे हैं, उन्हें पकड़कर गोशाला में पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने बताया कि जिले में 1,588 गोवंशीय पशुओं को संरक्षित करने का लक्ष्य मिला था, लेकिन उससे बढ़कर 1,762 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। शाम को सीडीओ गुंजन द्विवेदी ने टीम के साथ बैठक कर शासन के निर्देश के अनुसार छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव कुमार सक्सेना, डॉ. उज्जवल खरवार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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- जनपद की गोशालाओं में हैं 1,762 गोवंश
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। छुट्टा पशुओं से हो रहे नुकसान को रोकने और इन्हें संरक्षित करने के लिए बुधवार को तीन दिवसीय अभियान शुरू कर दिया गया। इसके लिए कुशीनगर जनपद में दो नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। एक शासन से तो दूसरे पशुपालन विभाग के हैं। इन दोनों नोडल अधिकारियों ने तीन गोशालाओं का निरीक्षण किया तथा वहां पशुओं के लिए चारा, पानी, इलाज और सफाई का पूरा ध्यान रखने का निर्देश दिया।
छुट्टा पशुओं के चलते फसलों को नुकसान तो होता ही है, सड़कों पर इनके चलते दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके अलावा आवागमन भी बाधित होता है। बताया जा रहा है कि छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में संरक्षित करने के लिए शासन ने 31 मार्च तक का समय मुकर्रर किया था, फिर भी अधिकांश गोवंश अभी भी सड़कों और खेतों में दिख रहे हैं। इसलिए शासन स्तर से प्रत्येक जनपद में दो-दो नोडल अधिकारियों को नामित कर छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए पांच से सात अप्रैल तक तीन दिन का अभियान चलाने का निर्देश दिया गया था।
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इसी क्रम में कुशीनगर जनपद के लिए शासन की ओर से लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी तथा पशुपालन विभाग से गोरखपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. विकास साठे को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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बुधवार को इन दोनों नोडल अधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ हाटा, कप्तानगंज और रामकोला के गोशाला का निरीक्षण किया। नोडल अधिकारी डॉ. विकास साठे ने बताया कि गोशालाओं में पशुओं के लिए चारा, पानी, उपचार और सफाई में कोई कमी न रहे, इसकी हिदायत दी गई। यह भी जोर दिया गया कि भूसा दान में ही एकत्र किया जाए। जहां भी छुट्टा पशु घूम रहे हैं, उन्हें पकड़कर गोशाला में पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने बताया कि जिले में 1,588 गोवंशीय पशुओं को संरक्षित करने का लक्ष्य मिला था, लेकिन उससे बढ़कर 1,762 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। शाम को सीडीओ गुंजन द्विवेदी ने टीम के साथ बैठक कर शासन के निर्देश के अनुसार छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव कुमार सक्सेना, डॉ. उज्जवल खरवार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।