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Kushinagar News: डोल जुलूस पर फेंका कचरा, 18 गांवों ने रोका; दो समुदाय आमने-सामने; 106 वर्ष से चल रही परंपरा

Tue, 27 Aug 2024 05:50 PM IST
रोहित सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, पडरौना
संवाद न्यूज एजेंसी, पडरौना Published by: रोहित सिंह Updated Tue, 27 Aug 2024 05:50 PM IST
सार

मंगलवार को दिन के करीब 11 बजे से रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना गांव से डोल जुलूस निकाला गया। काली मंदिर से जुलूस भ्रमण कर वापस गांव में लौट रहा था। तभी गांव के एक घर के समीप डीजे की गाड़ी फंस गई और इसी दौरान जुलूस पर किसी ने कचरा फेंक दिया। इसकी जानकारी होते ही जुलूस में साथ चल रहे लोग आक्रोशित हो उठे। जुलूस को रोक दिया गया।

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Garbage thrown at Dol procession in Padrauna of Kushinagar, dispute broke out between two parties
डोल जुलूस में विवाद के बाद मौके पर तनाव बना रहा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मिश्रौली समेत 18 गांवों से मंगलवार को निकले डोल जुलूस पर सोहरौना में एक पक्ष की ओर से कचरा फेंक दिया गया। इससे मौके पर दो समुदाय आमने-सामने आ गए। सूचना पाकर मौके पर एडिशनल एसपी समेत कई थानों की पुलिस फोर्स पहुंच गई।

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एहतियात के तौर पर गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। उधर, डोल जुलूस पर कचरा फेंके जाने की जानकारी के बाद 18 गांवों से निकले 35 से अधिक डोल जुलूस को रोक दिया गया। मामले की गंभीरता को देख पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत चार लोगों को हिरासत में ले लिया है।

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Garbage thrown at Dol procession in Padrauna of Kushinagar, dispute broke out between two parties
डोल जुलूस में विवाद के बाद मौके पर तनाव बना रहा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कई दौर की चली वार्ता बेनतीजा रही। एक पक्ष का कहना था कि जिस रास्ते पर डोल रखा गया है, उसी रास्ते से डोल जुलूस गुजरेगा। जबकि, दूसरे पक्ष से कुछ लोगों को नए रास्ते से जुलूस ले जाने पर आपत्ति थी।

मंगलवार को दिन के करीब 11 बजे से रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना गांव से डोल जुलूस निकाला गया। काली मंदिर से जुलूस भ्रमण कर वापस गांव में लौट रहा था। तभी गांव के एक घर के समीप डीजे की गाड़ी फंस गई और इसी दौरान जुलूस पर किसी ने कचरा फेंक दिया।

इसकी जानकारी होते ही जुलूस में साथ चल रहे लोग आक्रोशित हो उठे। इसके बाद लोगों ने जुलूस को रोक दिया। इसकी जानकारी होते ही मौके पर भारी पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया। सूचना मिलने पर पहुंचे एडिशनल एसपी रितेश कुमार सिंह, एएसपी अभिनव त्यागी,

Garbage thrown at Dol procession in Padrauna of Kushinagar, dispute broke out between two parties
डोल जुलूस में विवाद के बाद मौके पर तनाव बना रहा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसडीएम सदर व्यास नारायण उमराव, सीओ सदर अभिषेक प्रताप अजेय, सीओ कसया कुंदन सिंह, हाटा इंस्पेक्टर राजप्रकाश सिंह, कप्तानगंज एसओ राजकुमार बरवार, रामकोला एसओ विनय कुमार सिंह ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराते हुए डोल उठाने का आग्रह किया।

इस दौरान लोगों ने ग्राम प्रधान समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत चार लोगों को हिरासत में केस दर्ज कर लिया। कार्रवाई के बाद एक पक्ष के लोगों ने यह कहकर मना कर दिया कि अब जिस रास्ते पर डोल जुलूस रुका है, उसी रास्ते से डोल ले जाया जाएगा।

हालांकि, प्रशासनिक अफसरों ने किसी भी नई परम्परा अथवा नए रास्ते से जुलूस ले जाने की मनाही का हवाला भी दिया। वहीं, दूसरी तरफ इस बात की जानकारी जैसे ही अन्य गांव के लोगों को हुई तो।मिश्रौली क्षेत्र के 18 गांवों से निकलने वाले 35 से अधिक डोल को भी गांव वालों ने रोक दिया।

मामला बढ़ता देख एडिशनल एसपी रितेश कुमार सिंह व अभिनव त्यागी ने कई दौर की वार्ता की। मगर, यह वार्ता भी बेनतीजा रहा। शाम 4.30 बजे तक प्रशासनिक अफसरों व लोगों के बीच वार्ता चल रही थी।
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Garbage thrown at Dol procession in Padrauna of Kushinagar, dispute broke out between two parties
डोल जुलूस में विवाद के बाद मौके पर तनाव बना रहा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

106 वर्ष पुरानी है परंपरा
 जन्माष्टमी का त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1918 में स्वर राधा रमण सिंह ने की थी। तभी से जन्मोत्सव कार्यक्रम के बाद अगली सुबह डोल जुलूस निकाला जाता है। इसमें घारी वार्ड, चनुकी मोड़, पिपरा चौराहा सहित 24 से अधिक स्थानों पर रखे डोल मेले में आते हैं।

सभी मुख्य चौराहा से एकत्रित होकर धीरे धीरे गाजे बाजे और जय श्रीकृष्ण के जय घोष करते हुए आगे बढ़ते हैं। भगवान की मनोरम झांकी भी प्रस्तुत करते हैं। इस दौरान घरों की छतों से लोग फूल बरसा डोल जुलूस का स्वागत करते हैं। शाम को सभी डोल कतारबद्ध तरीके से स्वर राधा रमण सिंह के दरवाजे पर पहुंचता है, जहां उनके परिजनों द्वारा भगवान की आरती कर समापन किया जाता है।

इस दौरान दरवाजे पर पहुंचे लोगों को जलपान कराया जाता है। इसके अलावा बेहतर झांकी प्रदर्शन पर पुरस्कृत किया जाता है।

 

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