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Kushinagar News: पहाड़ी बारिश से उफनाई गंडक लाल निशान से ऊपर, डिस्चार्ज बढ़ने की आशंका

Sat, 13 Jul 2024 05:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 13 Jul 2024 05:20 AM IST
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Gandak swollen due to mountain rains above red mark, fear of increase in discharge
पडरौना। नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में हो रही भारी बारिश के कारण एक सप्ताह में दूसरी बार बड़ी गंडक नदी उफना गई है। इस बार गंडक खतरा यानि लाल निशान से 28 सेमी ऊपर बह रही है। शुक्रवार को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 3 लाख 30 हजार क्यूसेक पानी नदी में डिस्चार्ज किया गया है। अभी और डिस्चार्ज बढ़ने की संभावना है। ऐसे में लगातार नदी के बढ़ते जलस्तर को देख रेताक्षेत्र के लोगों की सांसें अटकी हैं। दूसरी बार रेता क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण जिले के तटबंधों पर भी दबाव बढ़ गया है।
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नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में हो रही भारी बारिश के कारण कुशीनगर जिले में बह रही बड़ी गंडक नदी उफान पर है। शुक्रवार की सुबह तक 2 लाख 85 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज रहा। अचानक दोपहर के वक्त डिस्चार्ज बढ़कर 3 लाख 30 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर दबाव बढ़ने से सभी 36 फाटकों को चार से फीट ऊपर कर दिया गया है। इससे लगातार गंडक के डिस्चार्ज में इजाफा हो रहा है। जलस्तर बढ़ने के बाद नदी खड्डा भैंसहा गेज पर खतरा निशान से 28 सेमी ऊपर बह रही है।
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माना जा रहा है कि आधी रात डिस्चार्ज में और वृद्धि होगी, जिससे फिर खड्डा रेताक्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुसने की आशंका है। महदेवा गांव के नदी महज 25 मीटर की दूरी बह रही है। वहीं, जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण छितौनी तटबंध के संवेदनशील बिंदुओं पर नदी का दबाव बढ़ गया है। स्पर-सी, किमी 9.752 व किमी 10.500 वीरभार ठोकर पर नदी का दबाव बढ़ने से बाढ़ खंड विभाग के अभियंताओं ने पेट्रोलिंग शुरू कर दी है।
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बाढ़ खंड के एसडीओ मनोरंजन कुमार अपने कर्मियों के साथ तटबंधों का निरीक्षण कर रहे हैं। रेता क्षेत्र के गांव बसंतपुर, मरिचहवा, विंध्याचलपुर, शाहपुर, शिवपुर व महदेवा में रहने वाले लोगों का कहना है कि सप्ताह में दूसरी बार गंडक उफान पर है। जलस्तर लगातार बढ़ने से फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। अगर दूसरी बार गंडक नदी में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज किया गया तो न सिर्फ गांव डूबेंगे बल्कि महदेवा के अस्तित्व पर भी संकट मंडराने लगेगा।


तीन दिन पहले ही गांवों से निकला था पानी, अब फिर बाढ़ का खतरा
पिछले सप्ताह शनिवार को बड़ी गंडक नदी में साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था। इससे उफनाई गंडक नदी के बाढ़ का पानी खड्डा रेताक्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में घुस गया। अभी तीन दिन पहले ही निचले इलाकों के गांवों से पानी निकला था। दुश्वारियों को झेलते हुए बाढ़ पीड़ित परिवारों के लोग शरणालयों को छोड़ अपने आशियानों की तरफ लौट गए थे। ऐसे में दूसरी बार गंडक के उफान पर आते ही बाढ़ पीड़ित परिवारों के चेहरे पर साफतौर से मायूसी देखने को मिल रही है। शुक्रवार की दोपहर जब गंडक के डिस्चार्ज में इजाफा हुआ तो कई परिवारों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे।
महदेवा के अस्तित्व पर संकट
मानसून अपने चरम पर है। बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। नदी के उफनाने से महदेवा गांव के अस्तित्व पर ही इस बार संकट के कालेमेघ मंडरा रहे हैं गांव के महज 25 मीटर की दूरी पर नदी बह रही है। इससे यहां के लोग अब कहीं और शरण लेने की तैयारी में है। कटान रोकने को विभाग की ओर से तमाम प्रयास किए गए। प्रयोग के तौर पर विभाग ने परक्यूपाइन भी लगाया, लेकिन यह प्रयोग भी सफल नहीं हो सका।
तहसीलदार ने लिया बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा
तमकुहीरोड। तमकुहीराज तहसीलदार चंदन शर्मा ने शुक्रवार को गोलाघाट समेत बाढ़ प्रभावित कई गांवों का जायजा लिया। गंडक और बांसी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर उन्होंने लोगों से सावधान रहने की सलाह दी। इसके अलावा तहसीलदार ने गोलाघाट में लगाए गए सरकारी नाव का संचालन कार्य का भी जायजा लिया।

तहसीलदार चंदन शर्मा ने बाढ़ प्रभावित मोतीराय टोला, नरवाजोत, दहारी टोला, तवक्कल टोला, बुटन टोला आदि कई गांवों में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। गोलाघाट पर बांसी नदी में लोगों व छात्रों के आवागमन के लिए लगाए गए सरकारी नाव के संचालन को देखा और नाविक को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने गंडक व बांसी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी में न जाने और मवेशियों को भी न भेजने की सलाह के साथ बाढ़ से लोगों को सतर्क रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इस दौरान प्रभारी राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता, शैलेंद्र पांडेय, प्रमोद यादव, राजकिशोर निरंकारी, लल्लन सिंह, पारसनाथ निषाद आदि मौजूद रहे।
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