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गंडक खतरे के निशान के करीब पहुंची, सात गांव बाढ़ की चपेट में
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गंडक खतरे के निशान के करीब पहुंची, सात गांव बाढ़ की चपेट में
- वाल्मीकि बैराज से छोड़ा गया 4.12 लाख क्यूसेक पानी, फंसे लोगों नावों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा
- खड्डा क्षेत्र के पांच और तमकुहीराज क्षेत्र एक गांव के दस टोले अब तक हुए हैं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर। वाल्मीकि बैराज से बुधवार शाम चार बजे 4.12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने और लगातार हो रही बारिश से गंडक खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। जलस्तर बढ़ने से जिले के सात गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि बैराज से मंगलवार की रात में 10 बजे तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार सुबह साढ़े तीन लाख और सुबह 10 बजे चार लाख चार हजार और शाम चार बजे 4.12 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाने लगा। अधिक पानी छोड़े जाने के चलते गंडक का जलस्तर भैंसहा गेज पर 95.90 मीटर पर पहुंच गया। यहां खतरे के निशान 96 मीटर पर है। ऐेसे में नदी खतरे के निशान से केवल 10 सेंटीमीटर नीचे है। नदी का पानी यूपी के छितौनी से लेकर बिहार के बगहा के पास तक फैलकर बह रहा है।
नदी का पानी खड्डा क्षेत्र के शिवपुर, सालिकपुर, महदेवा, नारायनपुर, हरिहरपुर, मरचहवा आदि गांवों में भरने लगा है। विंध्याचलपुर गांव में अचानक पानी बढ़ने से 100 से अधिक लोग फंस गए। इन्हें बड़ी नाव से बाहर निकाला जा रहा है।
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मरचहवा दक्षिण टोला से बसंतपुर जाने वाली सड़क डूब गई है। मरचहवा उत्तर टोला से बसंतपुर संपर्क मार्ग पर पानी बह रहा है। बसंतपुर गांव के अंदर सड़क पर पानी बह रहा है। मरचहवा, बसंतपुर प्राथमिक स्कूल में पानी भर गया है। बाढ़ में घिरे इन लोगों को सुरक्षित सोहगीबरवा तक ले जाने के लिए मरचहवा से नाव का प्रबंध किया गया है। शिवपुर पुलिस चौकी व प्राथमिक विद्यालय में भी पानी भर गया है। हरिहरपुर व नरायनपुर गांव में पानी तेजी से भर रहा है। मरचहवा के ग्राम प्रधान इजहार तथा ग्रामीण जवाहिर,ध्रुव, मुंशी ,बाबूलाल, झब्बर, नथुनी, फूलेमान आदि ने बताया कि स्थिति बहुत खराब हो रही है।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार, नदी का जलस्तर बढ़ने से सेवरही ब्लॉक के पिपराघाट मुस्तकिल, पिपराघाट एहतमाली गांवों के 16 से अधिक टोले बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई स्थानों पर नदी एपी बांध व नरवाजोत बांध से सटकर बह रही है। पिपराघाट के निचले हिस्सों में भर गया और पिपपराघट के तवकल, दहारी, शिव, चौकी, हनुमान, जोगनी, इमिलिया, मोतीराय, मुसहरी, रानीगंज, जयपुर, नरवा, गोलाघाट, सुब्बाखान, भंगी, बुटन टोला आदि बाढ़ से घिर गए। नरवाजोत व नोनियापट्टी में बांध पर पानी का दबाव है। नरवाजोत से अहिरौलीदान तक बांध की सुरक्षा में लगे एसडीओ श्रवण कुमार प्रियदर्शी, जेई चंद्रप्रकाश, जेई संजय कुमार मौर्य, जेई रमेशधर दुबे,जेई सुनील यादव, जेई राकेश कुमार,जेई राजेश कुमार सिंह आदि का कहना है कि नरवाजोत और नोनियापट्टी में बचाव कार्य जारी है। फिलहाल बांध पूरी तरह सुरक्षित है। सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है।
बारिश के बीच नाव से गांवों में पहुंचे एसडीएम
खड्डा। बाढ़ में फंसे लोगों की पीड़ा को जानने के लिए एसडीएम खड्डा अरविन्द कुमार बुधवार को बारिश में ही नाव से शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर आदि गांवों में पहुंचे। एसडीएम ने नाव सहित अन्य सहायता तुरंत प्रदान करने हेतु राजस्व टीम को निर्देश दिया। एसडीएम ने गांव के अंदर जाकर लोगों से मुलाकात की। एसडीएम के साथ नायब तहसीलदार रवि यादव, थानाध्यक्ष आरके यादव, लेखपाल विपिन मणि आदि पुलिस कर्मी मौजूद रहे ।
जून में कभी चार लाख से ऊपर नहीं पहुंचा डिस्चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने से लोग हैरत में हैं। लोगों ने कहा, बीते दो दशक में जून में ऐसा नहीं देखा। लोगों के अनुसार इस दौरान डिस्चार्ज तीन लाख के आसपास ही रहता था।
तमकुहीराज क्षेत्र में वर्ष 1984 और 2007 में बांध टूटने की बर्बादी देख चुके लोगों का कहना है कि बीते दो दशक में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, जब मानसून की शुरूआत में ही तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया हो। आमतौर पर 15 जून को गंडक नदी में 50-60 हजार क्यूसेक पानी होता था। इस बार पहले दिन 15 जून को ही वाल्मीकि बैराज से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। एपी बांध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, बिनटोली,बजवही दयाल,चैनपट्टी, विरवट कोन्हवलिया, नोनियापट्टी, बाकखास, बाघाचौर, खैरखुटा, कचहरी टोला, डीह टोला, अहिरौलीदान आदि गांवों के लोगों का कहना है कि अभी तो जलस्तर बढ़ने के बाद जब घटेगा, असली मुश्किल तब शुरू होगी। वर्ष 1984 में नरवाजोत व पिरोजहा तथा वर्ष 2007 में घघवा जगदीश गांव के पास बांध टूटने से तबाही आ चुकी है।
बड़ी कठिन डगर है मरचहवा की
खड्डा। ब्लाक मुख्यालय का बाढ़ प्रभावित मरचहवा गांव जाने के लिए कठिन रास्ता तय करना पड़ता है। पहले खड्डा से पनियहवा होकर एन एच 727 पर छितौनी-बगहा पुल पारकर सालिकपुर पुलिस चौकी पहुंचना होगा। यहां से बिहार की सीमा में प्रवेश करके वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जंगल के बीच से मदनपुर देवी स्थान के पास से मदनपुर वन कार्यालय होकर, बगहां-भैसालोटन मार्ग से सिरसिया गांव पहुंचना होगा। कुछ आगे जंगल से निकलने वाला बरसाती नाले का पानी मुख्य मार्ग पर कमर भर तेजी से बह रहा है। इसे पार कर बिहार प्रांत के नौरंगिया गांव तक पहुंचना होगा। वहां से सोहगीबरवां जाने वाली कच्ची सड़क है जिस पर पानी बह रहा है। आगे रोहुआ नाले को नाव से पार करना होगा। इसके बाद कच्चे मार्ग से सोहगीबरवा तक पहुंचा जा सकता है। अगर मरचहवा-बसंतपुर जाना है तो नाव से डेढ़ से दो किलोमीटर का सफर करने के बाद ही पहुंचा जा सकता है। अगर किसी की तबियत खराब हो जाय या इमरजेंसी हो तो यही एक मात्र रास्ता है जो गंतव्य तक ले जा सकता है।
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- वाल्मीकि बैराज से छोड़ा गया 4.12 लाख क्यूसेक पानी, फंसे लोगों नावों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा
- खड्डा क्षेत्र के पांच और तमकुहीराज क्षेत्र एक गांव के दस टोले अब तक हुए हैं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर। वाल्मीकि बैराज से बुधवार शाम चार बजे 4.12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने और लगातार हो रही बारिश से गंडक खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। जलस्तर बढ़ने से जिले के सात गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि बैराज से मंगलवार की रात में 10 बजे तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार सुबह साढ़े तीन लाख और सुबह 10 बजे चार लाख चार हजार और शाम चार बजे 4.12 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाने लगा। अधिक पानी छोड़े जाने के चलते गंडक का जलस्तर भैंसहा गेज पर 95.90 मीटर पर पहुंच गया। यहां खतरे के निशान 96 मीटर पर है। ऐेसे में नदी खतरे के निशान से केवल 10 सेंटीमीटर नीचे है। नदी का पानी यूपी के छितौनी से लेकर बिहार के बगहा के पास तक फैलकर बह रहा है।
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नदी का पानी खड्डा क्षेत्र के शिवपुर, सालिकपुर, महदेवा, नारायनपुर, हरिहरपुर, मरचहवा आदि गांवों में भरने लगा है। विंध्याचलपुर गांव में अचानक पानी बढ़ने से 100 से अधिक लोग फंस गए। इन्हें बड़ी नाव से बाहर निकाला जा रहा है।
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मरचहवा दक्षिण टोला से बसंतपुर जाने वाली सड़क डूब गई है। मरचहवा उत्तर टोला से बसंतपुर संपर्क मार्ग पर पानी बह रहा है। बसंतपुर गांव के अंदर सड़क पर पानी बह रहा है। मरचहवा, बसंतपुर प्राथमिक स्कूल में पानी भर गया है। बाढ़ में घिरे इन लोगों को सुरक्षित सोहगीबरवा तक ले जाने के लिए मरचहवा से नाव का प्रबंध किया गया है। शिवपुर पुलिस चौकी व प्राथमिक विद्यालय में भी पानी भर गया है। हरिहरपुर व नरायनपुर गांव में पानी तेजी से भर रहा है। मरचहवा के ग्राम प्रधान इजहार तथा ग्रामीण जवाहिर,ध्रुव, मुंशी ,बाबूलाल, झब्बर, नथुनी, फूलेमान आदि ने बताया कि स्थिति बहुत खराब हो रही है।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार, नदी का जलस्तर बढ़ने से सेवरही ब्लॉक के पिपराघाट मुस्तकिल, पिपराघाट एहतमाली गांवों के 16 से अधिक टोले बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई स्थानों पर नदी एपी बांध व नरवाजोत बांध से सटकर बह रही है। पिपराघाट के निचले हिस्सों में भर गया और पिपपराघट के तवकल, दहारी, शिव, चौकी, हनुमान, जोगनी, इमिलिया, मोतीराय, मुसहरी, रानीगंज, जयपुर, नरवा, गोलाघाट, सुब्बाखान, भंगी, बुटन टोला आदि बाढ़ से घिर गए। नरवाजोत व नोनियापट्टी में बांध पर पानी का दबाव है। नरवाजोत से अहिरौलीदान तक बांध की सुरक्षा में लगे एसडीओ श्रवण कुमार प्रियदर्शी, जेई चंद्रप्रकाश, जेई संजय कुमार मौर्य, जेई रमेशधर दुबे,जेई सुनील यादव, जेई राकेश कुमार,जेई राजेश कुमार सिंह आदि का कहना है कि नरवाजोत और नोनियापट्टी में बचाव कार्य जारी है। फिलहाल बांध पूरी तरह सुरक्षित है। सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है।
बारिश के बीच नाव से गांवों में पहुंचे एसडीएम
खड्डा। बाढ़ में फंसे लोगों की पीड़ा को जानने के लिए एसडीएम खड्डा अरविन्द कुमार बुधवार को बारिश में ही नाव से शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर आदि गांवों में पहुंचे। एसडीएम ने नाव सहित अन्य सहायता तुरंत प्रदान करने हेतु राजस्व टीम को निर्देश दिया। एसडीएम ने गांव के अंदर जाकर लोगों से मुलाकात की। एसडीएम के साथ नायब तहसीलदार रवि यादव, थानाध्यक्ष आरके यादव, लेखपाल विपिन मणि आदि पुलिस कर्मी मौजूद रहे ।
जून में कभी चार लाख से ऊपर नहीं पहुंचा डिस्चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने से लोग हैरत में हैं। लोगों ने कहा, बीते दो दशक में जून में ऐसा नहीं देखा। लोगों के अनुसार इस दौरान डिस्चार्ज तीन लाख के आसपास ही रहता था।
तमकुहीराज क्षेत्र में वर्ष 1984 और 2007 में बांध टूटने की बर्बादी देख चुके लोगों का कहना है कि बीते दो दशक में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, जब मानसून की शुरूआत में ही तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया हो। आमतौर पर 15 जून को गंडक नदी में 50-60 हजार क्यूसेक पानी होता था। इस बार पहले दिन 15 जून को ही वाल्मीकि बैराज से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। एपी बांध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, बिनटोली,बजवही दयाल,चैनपट्टी, विरवट कोन्हवलिया, नोनियापट्टी, बाकखास, बाघाचौर, खैरखुटा, कचहरी टोला, डीह टोला, अहिरौलीदान आदि गांवों के लोगों का कहना है कि अभी तो जलस्तर बढ़ने के बाद जब घटेगा, असली मुश्किल तब शुरू होगी। वर्ष 1984 में नरवाजोत व पिरोजहा तथा वर्ष 2007 में घघवा जगदीश गांव के पास बांध टूटने से तबाही आ चुकी है।
बड़ी कठिन डगर है मरचहवा की
खड्डा। ब्लाक मुख्यालय का बाढ़ प्रभावित मरचहवा गांव जाने के लिए कठिन रास्ता तय करना पड़ता है। पहले खड्डा से पनियहवा होकर एन एच 727 पर छितौनी-बगहा पुल पारकर सालिकपुर पुलिस चौकी पहुंचना होगा। यहां से बिहार की सीमा में प्रवेश करके वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जंगल के बीच से मदनपुर देवी स्थान के पास से मदनपुर वन कार्यालय होकर, बगहां-भैसालोटन मार्ग से सिरसिया गांव पहुंचना होगा। कुछ आगे जंगल से निकलने वाला बरसाती नाले का पानी मुख्य मार्ग पर कमर भर तेजी से बह रहा है। इसे पार कर बिहार प्रांत के नौरंगिया गांव तक पहुंचना होगा। वहां से सोहगीबरवां जाने वाली कच्ची सड़क है जिस पर पानी बह रहा है। आगे रोहुआ नाले को नाव से पार करना होगा। इसके बाद कच्चे मार्ग से सोहगीबरवा तक पहुंचा जा सकता है। अगर मरचहवा-बसंतपुर जाना है तो नाव से डेढ़ से दो किलोमीटर का सफर करने के बाद ही पहुंचा जा सकता है। अगर किसी की तबियत खराब हो जाय या इमरजेंसी हो तो यही एक मात्र रास्ता है जो गंतव्य तक ले जा सकता है।