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गंडक फिर करने लगी कटान, ग्रामीण चिंतित
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Thu, 15 Mar 2018 12:09 AM IST
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गंडक फिर करने लगी कटान, ग्रामीण चिंतित
- फोटो : अमर उजाला
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बरवापट्टी (कुशीनगर)। अमवां तटबंध को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड की तरफ से किए जा रहे उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। कटान रोकने के लिए प्लास्टिक की बोरियों में बालू भरकर गिराया जा रहा है लेकिन नदी अपनी रफ्तार से बंधे की तरफ बढ़ रही है। इससे आसपास के गांवों के लोग कटान की आशंका से चिंतित हैं।
गंडक नदी इस बार बरसात से काफी पहले ही कटान करने लगी है। अमवा तटबंध के स्पर वन के सामने तेजी से नदी बंधे के नजदीक आ रही है। अब बांध व नदी के बीच 50 मीटर से भी कम दूरी बची है, जबकि पिछले बरसात में नदी का पानी यहां से करीब 300 मीटर दूर था। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग की तरफ बांस के खंभों के आगे प्लास्टिक की बोरियों में बालू भरकर गिराया जा रहा है। बोरियों को बहने से रोकने के लिए उन्हें प्लास्टिक की रस्सियों के जाल में डाला जा रहा है। इसके बाद भी अब तक कटान रुक नहीं सका है। कटान से बरवापट्टी, पिपरही, हीरासोती, बिचपटवा, लिलहट, कपरधिका, दशहवां आदि गांवों के लोग सहमे हुए हैं। इस संबंध में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरत प्रसाद का कहना है कि कटान रोकने के लिए वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं। बांध की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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गंडक नदी इस बार बरसात से काफी पहले ही कटान करने लगी है। अमवा तटबंध के स्पर वन के सामने तेजी से नदी बंधे के नजदीक आ रही है। अब बांध व नदी के बीच 50 मीटर से भी कम दूरी बची है, जबकि पिछले बरसात में नदी का पानी यहां से करीब 300 मीटर दूर था। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग की तरफ बांस के खंभों के आगे प्लास्टिक की बोरियों में बालू भरकर गिराया जा रहा है। बोरियों को बहने से रोकने के लिए उन्हें प्लास्टिक की रस्सियों के जाल में डाला जा रहा है। इसके बाद भी अब तक कटान रुक नहीं सका है। कटान से बरवापट्टी, पिपरही, हीरासोती, बिचपटवा, लिलहट, कपरधिका, दशहवां आदि गांवों के लोग सहमे हुए हैं। इस संबंध में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरत प्रसाद का कहना है कि कटान रोकने के लिए वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं। बांध की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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