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Kushinagar News: गंडक के उतार-चढ़ाव से तटवर्ती गांव वालों की बढ़ी चिंता
Sun, 12 Jul 2026 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 12 Jul 2026 12:25 AM IST
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नरवाजोत बांध के किमी 1.700 के ठोकर को सुरक्षित बनाने मे जुटा बाढ़ खंड विभाग।संवाद
तमकुहीरोड। गंडक नदी में डिस्चार्ज शुक्रवार की शाम 95 हजार क्यूसेक से घटकर शनिवार सुबह 70 हजार क्यूसेक पर आ गया। इस उतार-चढ़ाव से तटवर्ती गांव वालों की चिंता बढ़ गई है। नरवाजोत के ठोकर सहित अन्य कई जगहों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। नदी बांध से सटकर बह रही है। विभाग परियोजना के कार्यों को पूरा कराने के साथ ही संवेदनशील जगहों की निगरानी कर रहा है।
नरवाजोत में किमी 1.700 पर बना ठोकर बांध के साथ पिपराघाट के 12 से अधिक गांवों की सुरक्षा के लिए काफी अहम है। यह पिछले कई सालों से नदी के निशाने पर रहा है। पिछले साल कटान चलते ठोकर को काफी क्षति पहुंची थी और एक निजी स्कूल का पुराना भवन, छठ वेदी सहित कई एकड़ उपजाऊ भूमि भी नदी में समा गई थी। इस साल यहां 11.32 करोड़ की लागत से बाढ़ बचाव की परियोजनाएं पिछले तीन माह से चल रही हैं। अब जब वाल्मीकि नगर बैराज से हर घंटे गंडक नदी में हजारों क्यूसेक पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो चुका है तो लोगों को पिछले साल की तरह इस बार भी बाढ़ व कटान की चिंता सताने लगी है। बाढ़ खंड के अभियंता रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव, अमर श्रीवास्तव आदि परियोजना का कार्य पूरा कराने में लगे हैं।
यही हाल पिपराघाट, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया और अहिरौलीदान का है। जहां कई स्थानों पर नदी बांध से सट कर बह रही है और डिस्चार्ज बढ़ता है तो बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। क्षेत्र के रामप्रसाद सिंह, रामायन राय, प्रभुनाथ यादव, सकलदेव सिंह आदि का कहना है कि नदी में छोड़े जा रहे पानी से अभी कोई खतरा नहीं है, लेकिन डिस्चार्ज बढ़ने पर यह खतरा बढ़ सकता है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि परियोजना का कार्य जारी है और फिलहाल बांध को कोई खतरा नहीं है। डिस्चार्ज पर कड़ी नजर रखी जा रही है और तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
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नरवाजोत में किमी 1.700 पर बना ठोकर बांध के साथ पिपराघाट के 12 से अधिक गांवों की सुरक्षा के लिए काफी अहम है। यह पिछले कई सालों से नदी के निशाने पर रहा है। पिछले साल कटान चलते ठोकर को काफी क्षति पहुंची थी और एक निजी स्कूल का पुराना भवन, छठ वेदी सहित कई एकड़ उपजाऊ भूमि भी नदी में समा गई थी। इस साल यहां 11.32 करोड़ की लागत से बाढ़ बचाव की परियोजनाएं पिछले तीन माह से चल रही हैं। अब जब वाल्मीकि नगर बैराज से हर घंटे गंडक नदी में हजारों क्यूसेक पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो चुका है तो लोगों को पिछले साल की तरह इस बार भी बाढ़ व कटान की चिंता सताने लगी है। बाढ़ खंड के अभियंता रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव, अमर श्रीवास्तव आदि परियोजना का कार्य पूरा कराने में लगे हैं।
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यही हाल पिपराघाट, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया और अहिरौलीदान का है। जहां कई स्थानों पर नदी बांध से सट कर बह रही है और डिस्चार्ज बढ़ता है तो बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। क्षेत्र के रामप्रसाद सिंह, रामायन राय, प्रभुनाथ यादव, सकलदेव सिंह आदि का कहना है कि नदी में छोड़े जा रहे पानी से अभी कोई खतरा नहीं है, लेकिन डिस्चार्ज बढ़ने पर यह खतरा बढ़ सकता है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि परियोजना का कार्य जारी है और फिलहाल बांध को कोई खतरा नहीं है। डिस्चार्ज पर कड़ी नजर रखी जा रही है और तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
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