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Kushinagar News: तटबंधों पर बाढ़ बचाव का कार्य अधूरा
Sat, 22 Jun 2024 04:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 22 Jun 2024 04:29 AM IST
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पडरौना/तमकुहीरोड। एपी व नरवाजोत तटबंध पर स्वीकृत परियोजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो सकी हैं। हालांकि, अफसर इसी महीने कार्य पूरा कराने का दावा कर रहे हैं लेकिन, कई संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ बचाव का कार्य नहीं होने से तटबंधों के किनारे बसे लोगों को बाढ़ की चिंता सता रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संवेदनशील स्थानों को सुरक्षित नहीं किया गया तो पानी आने के बाद बांध के साथ कई गांवों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
करीब 31.17 करोड़ की लागत से पांच परियोजनाओं का काम चल रहा है। जल शक्ति मंत्री के आदेश के बाद भी बाढ़ से बचाव कार्य में तेजी नहीं आई है। एक सप्ताह के अंदर कभी भी मानसून दस्तक दे सकता है। इससे गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो जाएगी। वर्तमान में गंडक नदी में रोजाना 15 से 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नरवाजोत बांध से लगायत एपी तटबंध पर विभाग परियोजना के कार्यों को पूरा कराने में जुटा है। जून के अंत तक कार्य पूरा होने की बात कही जा रही है। हालांकि, जल शक्ति मंत्री ने 20 जून तक कार्य पूरा कर लेने की हिदायत दी थी। बावजूद, बाढ़ खंड के अफसर बाढ़ से बचाव के कार्यों में तेजी नहीं लाए।
नरवाजोत में किमी 1.700 पर 5.83 करोड़ की लागत से बनने वाले ठोकर पर पिचिंग का कार्य अब भी अधूरा है। जबकि यहां गंडक नदी ठोकर से सटकर बह रही है। इसी तरह एपी बांध के चैनपट्टी गांव के किमी 2.800 व किमी 3.050 पर 8.92 करोड़ की लागत से बनने वाला ठोकर भी अधूरा है। ठोकर पर पिचिंग का कार्य चल रहा है। यहां भी नदी ठोकर से सटकर कर बह रही है।
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यही हाल एपी बांध के जवही दयाल स्थित किमी 3.500 पर 3.66 करोड़ की लागत से, एपी बांध के बाकखाश गांव के पास किमी 10.518 पर 6.82 करोड़ की लागत से और एपी बांध के अहिरौलीदान गांव के पास किमी 14.500 पर 5.92 करोड़ की लागत से ठोकर का काम सुस्त गति से हो रहा है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की यही रफ्तार रही तो जून में ठोकर का काम पूरा होना संभव नहीं है। बारिश बारिश शुरू होने के बाद निर्माण कार्य नहीं हो सकेगा। तटवर्ती गांव वालों का कहना है कि इस समय बाढ़ खंड तृतीय परियोजना के कार्यों को पूरा कराने में जुटा है। लेकिन, तटबंधों के क्षतिग्रस्त ठोकरों व अन्य कई संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ बचाव का कार्य नहीं कराया जा रहा है।
वाल्मीकिनगर बैराज से शुरू हो जाएगा पानी छोड़ने का सिलसिला
लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने के साथ ही वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पिछले साल साढ़े तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंडक नदी में छोड़ा गया था। ऐसे में परियोजना के कार्यों को पूरा कराए जाने के साथ क्षतिग्रस्त ठोकरों व मोतीराय टोला, ततवा टोला, कचहरी टोला, विरवट कोंन्हवलिया, डीह टोला सहित अन्य कई संवेदनशील जगहों पर तटबंधों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो करीब बीस हजार से अधिक लोग के लिए बाढ़ की तबाही का कारण बन सकती है।
जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, पुजारी सिंह, दूधनाथ शर्मा, ध्रुव निषाद, प्रदीप सिंह, प्रभुनाथ यादव आदि ने बाढ़ व कटान के खतरे को देखते हुए तटबंधों पर पर्याप्त सुरक्षा बंदोबस्त कराने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ रमेश यादव का कहना है कि सभी परियोजना स्थलों पर डेंजर जोन के कार्यों को पूरा करा लिया गया है। बाकी कार्य भी इस महीने में पूरा करा लिए जाएंगे। तटबंधों के सभी संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
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करीब 31.17 करोड़ की लागत से पांच परियोजनाओं का काम चल रहा है। जल शक्ति मंत्री के आदेश के बाद भी बाढ़ से बचाव कार्य में तेजी नहीं आई है। एक सप्ताह के अंदर कभी भी मानसून दस्तक दे सकता है। इससे गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो जाएगी। वर्तमान में गंडक नदी में रोजाना 15 से 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नरवाजोत बांध से लगायत एपी तटबंध पर विभाग परियोजना के कार्यों को पूरा कराने में जुटा है। जून के अंत तक कार्य पूरा होने की बात कही जा रही है। हालांकि, जल शक्ति मंत्री ने 20 जून तक कार्य पूरा कर लेने की हिदायत दी थी। बावजूद, बाढ़ खंड के अफसर बाढ़ से बचाव के कार्यों में तेजी नहीं लाए।
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नरवाजोत में किमी 1.700 पर 5.83 करोड़ की लागत से बनने वाले ठोकर पर पिचिंग का कार्य अब भी अधूरा है। जबकि यहां गंडक नदी ठोकर से सटकर बह रही है। इसी तरह एपी बांध के चैनपट्टी गांव के किमी 2.800 व किमी 3.050 पर 8.92 करोड़ की लागत से बनने वाला ठोकर भी अधूरा है। ठोकर पर पिचिंग का कार्य चल रहा है। यहां भी नदी ठोकर से सटकर कर बह रही है।
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यही हाल एपी बांध के जवही दयाल स्थित किमी 3.500 पर 3.66 करोड़ की लागत से, एपी बांध के बाकखाश गांव के पास किमी 10.518 पर 6.82 करोड़ की लागत से और एपी बांध के अहिरौलीदान गांव के पास किमी 14.500 पर 5.92 करोड़ की लागत से ठोकर का काम सुस्त गति से हो रहा है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की यही रफ्तार रही तो जून में ठोकर का काम पूरा होना संभव नहीं है। बारिश बारिश शुरू होने के बाद निर्माण कार्य नहीं हो सकेगा। तटवर्ती गांव वालों का कहना है कि इस समय बाढ़ खंड तृतीय परियोजना के कार्यों को पूरा कराने में जुटा है। लेकिन, तटबंधों के क्षतिग्रस्त ठोकरों व अन्य कई संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ बचाव का कार्य नहीं कराया जा रहा है।
वाल्मीकिनगर बैराज से शुरू हो जाएगा पानी छोड़ने का सिलसिला
लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने के साथ ही वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पिछले साल साढ़े तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंडक नदी में छोड़ा गया था। ऐसे में परियोजना के कार्यों को पूरा कराए जाने के साथ क्षतिग्रस्त ठोकरों व मोतीराय टोला, ततवा टोला, कचहरी टोला, विरवट कोंन्हवलिया, डीह टोला सहित अन्य कई संवेदनशील जगहों पर तटबंधों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो करीब बीस हजार से अधिक लोग के लिए बाढ़ की तबाही का कारण बन सकती है।
जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, पुजारी सिंह, दूधनाथ शर्मा, ध्रुव निषाद, प्रदीप सिंह, प्रभुनाथ यादव आदि ने बाढ़ व कटान के खतरे को देखते हुए तटबंधों पर पर्याप्त सुरक्षा बंदोबस्त कराने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ रमेश यादव का कहना है कि सभी परियोजना स्थलों पर डेंजर जोन के कार्यों को पूरा करा लिया गया है। बाकी कार्य भी इस महीने में पूरा करा लिए जाएंगे। तटबंधों के सभी संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।