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लोगों को बाढ़ की चिंता 18-07-50
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‘बचाव कार्य नहीं हुआ तो बाढ़ के कहर से बचाना होगा मुश्किल’
तमकुहीरोड (कुशीनगर )। मानसून सत्र आने में पांच माह शेष हैं। लेकिन, एपी बांध के अंतिम छोर और यूपी बिहार के बॉर्डर स्थित डीह टोला निवासियों को फिर से बाढ़ की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि समय रहते विभाग की तरफ से बचाव कार्य नहीं किया गया तो वह आगामी मानसून सीजन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
यूपी-बिहार बार्डर पर स्थित अहिरौलीदान के डीह टोला के लोगों को पिछले कई वर्षों से गंडक नदी की कटान से जूझना पड़ता है। नदी के मुहाने पर बसे इस गांव का आधा से अधिक हिस्सा कटान की भेंट चढ़ चुका है। पिछले साल मानसून सत्र के पहले दिन 15 जून को ही वाल्मीकिनगर बैराज से जब चार लाख बारह हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, तब कटान के चलते पूरे गांव में बाढ़ का पानी भर गया था।
पूर्व प्रधान हीरालाल यादव ने बताया कि इस गांव में बाढ़ बचाव कार्य नहीं होने से आधा से अधिक हिस्सा नदी की धारा में विलीन हो गया है। शासन की तरफ से एपी बांध की सुरक्षा के लिए हर साल धन तो मिलता है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते इस गांव को नदी के कटान से बचाने के लिए स्थायी इंतजाम नहीं किया गया। कटान के चलते गांव से पलायन करने वाले सुरेश यादव, मिथलेश राय, योगेंद्र सिंह, सुरेंद्र यादव, त्रिलोकी राय, राजनाथ सिंह, सुभाष यादव, कलेक्टर सिंह, सुजीत यादव, सहदेव राय, पप्पू सिंह, काली राय ने बताया कि आगामी मानसून सत्र के आने में अभी पांच माह शेष है। चिंता अभी से सताने लगी है।
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तमकुहीरोड (कुशीनगर )। मानसून सत्र आने में पांच माह शेष हैं। लेकिन, एपी बांध के अंतिम छोर और यूपी बिहार के बॉर्डर स्थित डीह टोला निवासियों को फिर से बाढ़ की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि समय रहते विभाग की तरफ से बचाव कार्य नहीं किया गया तो वह आगामी मानसून सीजन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
यूपी-बिहार बार्डर पर स्थित अहिरौलीदान के डीह टोला के लोगों को पिछले कई वर्षों से गंडक नदी की कटान से जूझना पड़ता है। नदी के मुहाने पर बसे इस गांव का आधा से अधिक हिस्सा कटान की भेंट चढ़ चुका है। पिछले साल मानसून सत्र के पहले दिन 15 जून को ही वाल्मीकिनगर बैराज से जब चार लाख बारह हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, तब कटान के चलते पूरे गांव में बाढ़ का पानी भर गया था।
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पूर्व प्रधान हीरालाल यादव ने बताया कि इस गांव में बाढ़ बचाव कार्य नहीं होने से आधा से अधिक हिस्सा नदी की धारा में विलीन हो गया है। शासन की तरफ से एपी बांध की सुरक्षा के लिए हर साल धन तो मिलता है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते इस गांव को नदी के कटान से बचाने के लिए स्थायी इंतजाम नहीं किया गया। कटान के चलते गांव से पलायन करने वाले सुरेश यादव, मिथलेश राय, योगेंद्र सिंह, सुरेंद्र यादव, त्रिलोकी राय, राजनाथ सिंह, सुभाष यादव, कलेक्टर सिंह, सुजीत यादव, सहदेव राय, पप्पू सिंह, काली राय ने बताया कि आगामी मानसून सत्र के आने में अभी पांच माह शेष है। चिंता अभी से सताने लगी है।
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