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Kushinagar: जिला अस्पताल में बढ़े बुखार, झटके आने के मरीज
Wed, 14 Sep 2022 12:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Sep 2022 12:05 PM IST
सार
पीडियाट्रिशियन डॉ. सतीश यादव ने बताया कि पीआईसीयू में ज्यादातर तेज बुखार और झटके आने से पीड़ित मरीज भर्ती कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए परिवार के लोग सफाई पर विशेष ध्यान दें। बेवजह धूप में न निकलने दें।
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जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती बच्चा। संवाद
- फोटो : KUSHINAGAR
विस्तार
बरसात के मौसम में तेज बुखार और झटका आने के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल के पीआईसीयू में मंगलवार को तेज बुखार, झटका, खून की कमी से संबंधित रोगों के 18 बच्चे भर्ती कराए गए थे। बीमार बच्चों को भर्ती कराने कराने का सिलसिला जारी रहा।
पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में मंगलवार को जो बच्चे भर्ती कराए गए थे, उनमें अशमीना (9) निवासी सोनवल, राज (5) निवासी बेलवा पलकधारी, समर (5) निवासी कुबेरस्थान, मधु (10) निवासी नेबुआ नौरंगिया, ऋषि (2) निवासी दुमही शामिल हैं। इसी तरह अलीना (4) निवासी तरयासुजान, आरुषि (12) निवासी तरयासुजान, सविता (7) निवासी सिसवा मठिया, जियावती (6), अमन (5) निवासी जखनिया को भी भर्ती कराया गया है। तरीखुन निशा (10) निवासी बरवापट्टी, सत्यम (2 माह) निवासी नंदनछपरा, अजीत (6) निवासी जंगल सिसवा, अनन्या (2 माह) निवासी मेला नगरी, कृति (1) निवासी बंदरवा, खामपार, बिहार, आसिम अली (2) निवासी भिटवा, बिहार और रमजान (5 माह) निवासी बाजूपट्टी को भी भर्ती कराया गया है। बाल रोग विशेषज्ञों की देखरेख में इन बच्चों का इलाज चल रहा है।
पीडियाट्रिशियन डॉ. सतीश यादव ने बताया कि पीआईसीयू में ज्यादातर तेज बुखार और झटके आने से पीड़ित मरीज भर्ती कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए परिवार के लोग सफाई पर विशेष ध्यान दें। बेवजह धूप में न निकलने दें। यदि धूप में जाना भी पड़े तो सावधानी बरतें। सर्द-गर्म से बचें। बाहर का खाना जैसे फास्ट फूड आदि न खिलाएं।
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ध्यान रखें कि बच्चे बीमार व्यक्ति के संपर्क में न आएं। बुखार आने पर शरीर को गीले कपड़े से पोछा करें। सबसे जरूरी यह कि इंडिया मार्क टू हैंडपंप, ओवरहेड टैंक या आरओ का पानी ही पिलाएं। साधारण हैंडपंप का पानी पिलाने से बचें। अगर विवशता हो तो पानी उबालने के बाद उसे ठंड करके पिलाएं। उन्होंने भर्ती कराए गए ज्यादातर बच्चों के परिवारों के लोगों ने साधारण हैंडपंप का पानी ही सेवन करना बताया।
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पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में मंगलवार को जो बच्चे भर्ती कराए गए थे, उनमें अशमीना (9) निवासी सोनवल, राज (5) निवासी बेलवा पलकधारी, समर (5) निवासी कुबेरस्थान, मधु (10) निवासी नेबुआ नौरंगिया, ऋषि (2) निवासी दुमही शामिल हैं। इसी तरह अलीना (4) निवासी तरयासुजान, आरुषि (12) निवासी तरयासुजान, सविता (7) निवासी सिसवा मठिया, जियावती (6), अमन (5) निवासी जखनिया को भी भर्ती कराया गया है। तरीखुन निशा (10) निवासी बरवापट्टी, सत्यम (2 माह) निवासी नंदनछपरा, अजीत (6) निवासी जंगल सिसवा, अनन्या (2 माह) निवासी मेला नगरी, कृति (1) निवासी बंदरवा, खामपार, बिहार, आसिम अली (2) निवासी भिटवा, बिहार और रमजान (5 माह) निवासी बाजूपट्टी को भी भर्ती कराया गया है। बाल रोग विशेषज्ञों की देखरेख में इन बच्चों का इलाज चल रहा है।
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पीडियाट्रिशियन डॉ. सतीश यादव ने बताया कि पीआईसीयू में ज्यादातर तेज बुखार और झटके आने से पीड़ित मरीज भर्ती कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए परिवार के लोग सफाई पर विशेष ध्यान दें। बेवजह धूप में न निकलने दें। यदि धूप में जाना भी पड़े तो सावधानी बरतें। सर्द-गर्म से बचें। बाहर का खाना जैसे फास्ट फूड आदि न खिलाएं।
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ध्यान रखें कि बच्चे बीमार व्यक्ति के संपर्क में न आएं। बुखार आने पर शरीर को गीले कपड़े से पोछा करें। सबसे जरूरी यह कि इंडिया मार्क टू हैंडपंप, ओवरहेड टैंक या आरओ का पानी ही पिलाएं। साधारण हैंडपंप का पानी पिलाने से बचें। अगर विवशता हो तो पानी उबालने के बाद उसे ठंड करके पिलाएं। उन्होंने भर्ती कराए गए ज्यादातर बच्चों के परिवारों के लोगों ने साधारण हैंडपंप का पानी ही सेवन करना बताया।