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किसानों को पानी की जरूरत, नहरें बेपानी
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हाटा क्षेत्र की सूखी नहर।संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
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किसानों को पानी की जरूरत, नहरें बेपानी
धान का बेहन डालने के लिए किसानों को पानी का इंतजार
सहायक अभियंता बोले- दो जून से नहरों में आ जाएगा पानी
हाटा(कुशीनगर)। धान का बेहन डालने के लिए किसानों को इस समय पानी की जरूरत है, लेकिन सिंचाई विभाग की नहरें बेपानी हैं। ऐसे में किसानों को वैकल्पिक स्रोतों से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। इससे खेती में लागत बढ़ रही है। किसानों ने नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार दावे कर रही है, लेकिन खेती के लिए जरूरी पानी ही समय नहीं मिल पर रही है। किसान चंदन गुप्ता ने कहा कि खेतों को पानी की सबसे अधिक जरूरत है, लेकिन सिंचाई विभाग बेपरवाह बना हुआ है। बरवा गांव के राधेश्याम ने कहा कि गांवों में सिंचाई सुविधा नहर के माध्यम से की गई है। धान का बेहन डालने का समय है। अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है।
पैकौली के संजय प्रकाश ने कहा कि तेज धूप की वजह से खेत की मिट्टी इतनी सख्त हो गई है कि उसकी जुताई के लिए भी खेतों में पानी की जरूरत है। नहरों में पानी नहीं आने से किसान निराश और परेशान हैं। किसान श्रीराम का कहना है कि कुछ लोग पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान का बेहन डाल रहे हैं, लेकिन सभी किसानों के पास यह सुविधा नहीं है। किसान नहरों में पानी के आने के इंतजार में हैं।
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इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अक्षय कुमार झा ने बताया कि नहरों के ऊपर कई जगह पुलियों का निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए कुछ देरी हुई है। पिछले बुधवार को डिमांड भेज दी गई है। दो जून को पानी आने की संभावना है।
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धान का बेहन डालने के लिए किसानों को पानी का इंतजार
सहायक अभियंता बोले- दो जून से नहरों में आ जाएगा पानी
हाटा(कुशीनगर)। धान का बेहन डालने के लिए किसानों को इस समय पानी की जरूरत है, लेकिन सिंचाई विभाग की नहरें बेपानी हैं। ऐसे में किसानों को वैकल्पिक स्रोतों से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। इससे खेती में लागत बढ़ रही है। किसानों ने नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार दावे कर रही है, लेकिन खेती के लिए जरूरी पानी ही समय नहीं मिल पर रही है। किसान चंदन गुप्ता ने कहा कि खेतों को पानी की सबसे अधिक जरूरत है, लेकिन सिंचाई विभाग बेपरवाह बना हुआ है। बरवा गांव के राधेश्याम ने कहा कि गांवों में सिंचाई सुविधा नहर के माध्यम से की गई है। धान का बेहन डालने का समय है। अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है।
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पैकौली के संजय प्रकाश ने कहा कि तेज धूप की वजह से खेत की मिट्टी इतनी सख्त हो गई है कि उसकी जुताई के लिए भी खेतों में पानी की जरूरत है। नहरों में पानी नहीं आने से किसान निराश और परेशान हैं। किसान श्रीराम का कहना है कि कुछ लोग पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान का बेहन डाल रहे हैं, लेकिन सभी किसानों के पास यह सुविधा नहीं है। किसान नहरों में पानी के आने के इंतजार में हैं।
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इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अक्षय कुमार झा ने बताया कि नहरों के ऊपर कई जगह पुलियों का निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए कुछ देरी हुई है। पिछले बुधवार को डिमांड भेज दी गई है। दो जून को पानी आने की संभावना है।