Kushinagar News: आंखों के सामने ही उजड़ गई नौमी की दुनिया, जिंदा जल गई पत्नी और पांच बच्चे
गांव वालों की मानें तो पत्नी और बच्चों की मौत के बाद नौमी बदहवास हो गया। उसे लोग संभालने में जुट गए। झोपड़ी में रखा सामान और चार बाइकें भी जलकर राख हो गईं। समय रहते अगर गांव वाले पहुंच गए हाेते तो शायद पत्नी और बच्चों की जान बच गई होती।
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कुशीनगर जिले के नगर पंचायत रामकोला में दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को रुला दिया। आग ने ऐसी तबाही मचाई कि नौमी खटिक की दुनिया उजड़ गई। रात के अंधेरे में आग की लपटों में तड़पकर पत्नी और पांच बच्चाें ने दम तोड़ दिया। गलगी की घटना के बाद जो भी मौके पर पहुंचा, उसकी आंखें भर आईं।
बापूनगर ग्राम उर्दहा वार्ड नंबर दो निवासी नौमी की शादी करीब 12 साल पूर्व संगीता के साथ हुई थी। नौमी गांवों में फेरी लगाकर मौसमी फल बेचकर परिवार का पेट पालता था। दोनों के बीच बेटा अंकित (10), लक्ष्मीना (9), रीता (3), गीता (5), बाबू (1) थे। जिंदगी की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर आ रही थी, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।
किसी बात को लेकर तीन दिनों से पत्नी से नौमी की अनबन थी। इसलिए पति दरवाजे और पत्नी पांचों बच्चों के साथ झोपड़ी में सो रही थी। आंखों में आंसू लिए नौमी ने बताया कि कोई खास विवाद नहीं था। मेरी नींद रात को खुली तो झोपड़ी से आग की लपट निकल रही थी। शोर मचाया लेकिन आबादी से दूर होने के कारण देरी से लोग पहुंचे। चाह कर भी पत्नी और बच्चों को आग के आगोश से नहीं बचा पाया। इसका अफसोस ताउम्र रहेगा।
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पेट्रोमैक्स सिलिंडर फटने की आवाज सुनकर खुली लोगों की नींद
आधी रात को आग लगने के बाद नौमी पत्नी और बच्चों को बचाने की कोशिश कर रहा था और शोर मचा रहा था। लेकिन झाेपड़ी आबादी से दूर होने के कारण लाेगों तक आवाज नहीं पहुंच पा रही थी। झोपड़ी में रखा पेट्रोमैक्स सिलिंडर फटा तो मोहल्ले वालों की नींद खुली और आग की लपटें देखकर दौड़ पड़े लेकिन काफी देर हो चुकी थी और छह जिंदगियां राख हो गई थीं।
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आग लगने की घटना के दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड का वाहन पहुंचा। नौमी की झोपड़ी से निकली आग की चिंगारी से भाई और पिता की झोपड़ी भी जल गई थी। भाई की झोपड़ी में सिर्फ सामान था, जबकि नौमी के पिता सरयू बाहर सो रहे थे। पास में सागौन का बगीचा भी आग की चपेट में आ गया। इसलिए गांव वालों को यह लगा कि बगीचे में आग लगी है। जबब झोपड़ी में रखा सिलिंडर फटा तो तेज आवाज सुनकर गांव वालों की नींद खुली।
गांव वालों की मानें तो पत्नी और बच्चों की मौत के बाद नौमी बदहवास हो गया। उसे लोग संभालने में जुट गए। झोपड़ी में रखा सामान और चार बाइकें भी जलकर राख हो गईं। समय रहते अगर गांव वाले पहुंच गए हाेते तो शायद पत्नी और बच्चों की जान बच गई होती।