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आठ हजार हैंडपंप खराब, पिछले साल मिले थे 8.5 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला कुश्ाीनगर
Updated Fri, 13 Apr 2018 11:13 PM IST
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खराब हैंडपंप
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पडरौना। जिले में आठ हजार से अधिक इंडिया मार्का टू हैंडपंप खराब हैं। इसकी वजह से पीने के पानी की किल्लत हो गई है। खराब हैंडपंपों में करीब दो हजार को रिबोर कराने की जरूरत है, जबकि छह हजार हैंडपंपों की मरम्मत करानी पड़ेगी। खराब पड़े कुछ हैंडपंपों से दूषित पानी आ रहा है, जबकि कुछ बिल्कुल ही बेकार हो चुके हैं। इन हैंडपंपों को ठीक कराने के लिए पिछले वित्त वर्ष में ग्राम पंचायतों को 8.5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। बावजूद इसके इनकी स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं आया है। बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इन्हें ठीक कराने के लिए बार-बार शिकायत की, लेकिन जिम्मेदार सुनने को तैयार नहीं हैं।
जल निगम के पास उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में 50687 तथा शहरी क्षेत्रों में 1440 हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में 2250 हैंडपंपों को रिबोर कराने की जरूरत है, जबकि 6440 हैंडपंपों की मरम्मत करानी होगी। शहरी क्षेत्रों में भी हैंडपंपों की स्थिति बेहद दयनीय है। जनपद की तीन नगरपालिका और चार नगर पंचायतों में कुल 40 हैंडपंप को रिबोर कराने की जरूरत है। नगरी क्षेत्रों में 40 नए हैंडपंप भी लगने हैं। जलनिगम की तरफ से खराब हैंडपंपों की सूची सीडीओ के माध्यम से पंचायतीराज विभाग को भेज दी गई है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2017-18 में सांसद और विधायकों की संस्तुति पर जनपद के विभिन्न हिस्सों में 748 नए हैंडपंप लगवाए गए हैं।
उधर, समस्या से परेशान मोतीचक ब्लॉक के सिकटिया गांव के अजय पटेल ने बताया कि उनके घर से कुछ दूरी पर स्थित इंडिया मार्क टू हैंडपंप के खराब हो जाने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। अब उन्हें पानी लाने के लिए दूर स्थित दूसरे इंडिया मार्क टू हैंडपंप तक जाना होता है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई नहीं सुनता। भूड़ाडीह निवासी रमाशंकर साहनी भी हैंडपंप खराब होने से परेशान हैं। उनका कहना है कि हैंडपंप से दूषित पानी आता है। ऐसे में साधारण हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी शुद्ध नहीं होने की वजह से कई बार घर के लोग बीमार भी पड़ जाते हैं। बहुआस गांव के शैलेश सिंह ने कहा कि महीनों से हैंडपंप खराब है, लेकिन जिम्मेदार उसे ठीक नहीं करा रहे। ग्राम प्रधान से लेकर पंचायतीराज विभाग तक से इसकी शिकायत की गई है। इसी गांव के जयहिंद साहनी ने कहा कि खराब पड़े हैंडपंप को ठीक कराने में जिम्मेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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जल निगम के पास उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में 50687 तथा शहरी क्षेत्रों में 1440 हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में 2250 हैंडपंपों को रिबोर कराने की जरूरत है, जबकि 6440 हैंडपंपों की मरम्मत करानी होगी। शहरी क्षेत्रों में भी हैंडपंपों की स्थिति बेहद दयनीय है। जनपद की तीन नगरपालिका और चार नगर पंचायतों में कुल 40 हैंडपंप को रिबोर कराने की जरूरत है। नगरी क्षेत्रों में 40 नए हैंडपंप भी लगने हैं। जलनिगम की तरफ से खराब हैंडपंपों की सूची सीडीओ के माध्यम से पंचायतीराज विभाग को भेज दी गई है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2017-18 में सांसद और विधायकों की संस्तुति पर जनपद के विभिन्न हिस्सों में 748 नए हैंडपंप लगवाए गए हैं।
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उधर, समस्या से परेशान मोतीचक ब्लॉक के सिकटिया गांव के अजय पटेल ने बताया कि उनके घर से कुछ दूरी पर स्थित इंडिया मार्क टू हैंडपंप के खराब हो जाने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। अब उन्हें पानी लाने के लिए दूर स्थित दूसरे इंडिया मार्क टू हैंडपंप तक जाना होता है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई नहीं सुनता। भूड़ाडीह निवासी रमाशंकर साहनी भी हैंडपंप खराब होने से परेशान हैं। उनका कहना है कि हैंडपंप से दूषित पानी आता है। ऐसे में साधारण हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी शुद्ध नहीं होने की वजह से कई बार घर के लोग बीमार भी पड़ जाते हैं। बहुआस गांव के शैलेश सिंह ने कहा कि महीनों से हैंडपंप खराब है, लेकिन जिम्मेदार उसे ठीक नहीं करा रहे। ग्राम प्रधान से लेकर पंचायतीराज विभाग तक से इसकी शिकायत की गई है। इसी गांव के जयहिंद साहनी ने कहा कि खराब पड़े हैंडपंप को ठीक कराने में जिम्मेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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