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Kushinagar News: पहल करें तो मजेदार होगी इको-फ्रेंडली होली

Sat, 04 Mar 2023 09:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sat, 04 Mar 2023 09:49 AM IST
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Eco-friendly Holi will be fun if you take the initiative
पडरौना नगर में दुकानदारों ने मंगाया मोदी का मुखौटा। दो दिन पहले बाजार में नहीं थे उपलब्ध। संवाद
- मस्ती के त्योहार में हल्की सी चूक बना सकती है लोगों को बीमार
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- प्राकृतिक तरीके से सुरक्षित और सस्ते रंग बनाकर खेली जा सकती है होली
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। किसी भी त्योहार की सार्थकता तभी है, जब सेहत ठीक रहे। मस्ती के त्योहार होली का मिजाज ऐसा है कि जरा सी चूक होने पर बदन में खुजली, आंख का रोग, चर्म रोग, अस्थमा, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी फैलाने में देर नहीं लगेगी। इससे बचने के लिए रासायनिक रंगों से परहेज कर प्राकृतिक तरीके से होली खेलना अधिक सुरक्षित है।
जानकारों के अनुसार सस्ते और हर जगह उपलब्ध फूल पत्तियों से मनपसंद रंग तैयार कर जहरीले रासायनिक रंगों से बच सकते हैं। इससे चेहरा ही नहीं शरीर की दमक भी बढ़ेगी।
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इस वर्ष भी बाजार रासायनिक रंगों की भरमार है। अधिकांश दुकानों पर पैकेट में रासायनिक रंग, अबीर-गुलाल बिक रहे हैं। खुले रंग अबीर-गुलाल भी बाजार में मौजूद हैं। लोग इनकी खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि इन रंगों की अपेक्षा थोड़ी सी मशक्कत में जड़ी-बूटियों और फूल पत्तियों को मिलाकर प्राकृतिक रंग तैयार किया जा सकता है।
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घर पर ऐसे तैयार करें रंग
पीला- एक चम्मच हल्दी और चार चम्मच बेसन मिलाकर पीला रंग बनाया जा सकता है। इसी तरह गेंदे या टेसू के फूल की पंखुड़ियों को पानी में उबाल कर, अनार के छिलकों को रात भर पानी में भिगोकर और गेंदे के फूल की पत्तियों को मिलाकर भी पीला रंग तैयार कर सकते हैं।
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गुलाबी रंग
चुकंदर के टुकड़े पानी में भिगोकर गहरा गुलाबी रंग बनाया जा सकता है। इसके अलावा प्याज के छिलकों को भी पानी में उबालकर गुलाबी रंग बनाया जा सकता है।
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लाल व भूरा रंग
मेंहदी में बराबर मात्रा में आटा मिलकर हरा रंग तैयार कर सकते हैं। सूखी मेंहदी से त्वचा पर लगने पर फायदा करती है। इसी तरह पान में प्रयोग होने वाले कत्था को पानी मिलाकर भूरा रंग तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा चायपत्ती का पानी भी भूरा रंग देता है।
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रासायनिक रंगों के बहुत हैं नुकसान
रासायनिक काले रंग में लेड ऑक्साइड होती है। इससे किडनी खराब होने के साथ समझने की शक्ति में कमी होती है। हरे रंग में कॉपर सल्फेट होता है। इससे आंख की एलर्जी और अस्थाई अंधता की आशंका होती है। बैगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है। इससे अस्थमा व एलर्जी, सिल्वर में एल्यूमीनियम ब्रोमाइड होता है। इससे कैंसर और नीला रंग से स्किन एलर्जी होने की आशंका होती है। ये रंग बच्चों और बड़ों की त्वचा पर नुकसान पहुंचाते हैं।

- डॉ. कमलेश वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ
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त्वचा और बालों को केमिकल के प्रभाव से बचाने के लिए नारियल तेल लगाएं, केमिकल का प्रभाव शरीर के भीतर तक तक न हो, इसके लिए मोटे, गाढ़े रंग से शरीर का अधिकतर हिस्सा ढकने वाले कपड़े पहनें, रंग उतारने के लिए साबुन के बयाय बेसन और दही आदि का प्रयोग करें। एक बार में सारा रंग उतारने की कोशिश न करें। शरीर में जलन या लालिमा हो तो तत्काल डॉक्टर की सलाह लें।
- डॉ. ममता यादव, त्वचा रोग विशेषज्ञ
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