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Kushinagar News: पंपों पर डीजल-पेट्रोल का अकाल, सीमित आपूर्ति से बढ़ीं मुश्किलें
Sun, 17 May 2026 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 17 May 2026 02:20 AM IST
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पेट्रोल पंप पर तेल के टैंकर पहुंचने का इंतजार करते ग्राहक।संवाद
पडरौना। ईंधन की चल रही किल्लत के बीच शनिवार को पंपों पर डीजल-पेट्रोल का अकाल रहा। कई पंप पूरी तरह से सूखे पड़े हुए थे। इसके चलते डीजल-पेट्रोल के लिए पहुंच रहे ग्राहकों व वाहन चालकों को परेशानी हुई। अगर, कहीं पर ईंधन था तो वहां पर सीमित मात्रा में ही सिर्फ वाहनों के टैंकों में तेल दिया जा रहा था। ईंधन की किल्लत से अधिक परेशानी कृषि कार्य में खेतों की जुताई को लेकर ट्रैक्टर संचालकों को हो रही है। वे काफी परेशान हैं और डीजल की अनुपलब्धता के चलते उनके पहिए कुछ घंटों में ही थम जा रहे हैं। ऐसे में खेती की जुताई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा जहां पर अगर ईंधन कुछ मात्रा में उपलब्ध है,वहां पर पेट्रोल कर्मी सीमित मात्रा में ही वाहनों के टैंकों में भर रहे हैं। पेट्राल पंप कर्मियों का कहना है कि आपूर्ति में वृद्धि होगी तो पहले जैसे ईंधन की आपूर्ति की जाएगी।
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कोट:-
ईंधन की किल्लत के बीच ग्राहकों व लोगों को कोई असुविधा न हो प्रयास किया जा रहा है। कंपनियों के अधिकारियों से बातचीत कर लगातार बेहतर आपूर्ति बनाए जाने का काम किया जा रहा है। ईंधन के अभाव में बंद पड़े पंपों को आपूर्ति बहाल कराए जाने के लिए लगातार माॅनीटरिंग की जा रही है। -कृष्ण गोपाल पांडेय,जिला पूर्ति अधिकारी,कुशीनगर
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पपों पर डीजल नहीं के बोर्ड लटके
पिछले दो-तीन दिनों से स्थानीय और ग्रामीण इलाकों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन का संकट गहरा गया है। तेल कंपनियों से आपूर्ति न मिलने के कारण कई पंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं। जो वाहन चालक लंबी दूरी तय करके पंपों पर पहुंच रहे हैं, उन्हें ''''नो स्टॉक'''' का बोर्ड देखकर लौटना पड़ रहा है।
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खेती-किसानी प्रभावित, किसान परेशान:-
यह समय खेतों की जुताई का है, जिसके कारण डीजल की मांग चरम पर है। ट्रैक्टर संचालकों को डीजल नहीं मिल पा रहा है। किसान खेतों से ट्रैक्टर लेकर या हाथों में गैलन (डिब्बे) थामे एक पंप से दूसरे पंप की खाक छान रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय पर जुताई नहीं हुई तो पूरी फसल चक्र प्रभावित हो जाएगी। ईंधन के अभाव में खेतों में चल रहे ट्रैक्टर कुछ ही घंटों में थम जा रहे हैं।
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सिर्फ 100-200 रुपये का मिल रहा तेल
संकट को देखते हुए कुछ पंप संचालकों ने सीमित स्टॉक को बचाने के लिए नया रास्ता निकाला है। चार पहिया वाहनों को सीमित मात्रा में 500 -1000 का तेल दिया जा रहा है, जबकि दो पहिया वाहनों को महज 100 से 200 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा है ताकि सभी को थोड़ा-बहुत ईंधन मिल सके। गैलन या डिब्बों में तेल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे किसानों की नाराजगी और बढ़ गई है।
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पंपों के मैनेजर बोले:-
पहले से ही सप्लाई बेहद कम मिल रही है। हमारे टैंकर डिपो पर खड़े हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। स्टॉक खत्म होने के कारण हमें पंप बंद करने पड़ रहे हैं। जैसे ही आपूर्ति बहाल होगी, स्थिति सामान्य हो जाएगी। -श्यामबदन कुशवाहा
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ईंधन की किल्लत की वजह कंपनियों की तरफ से कटौती को बरकरार रखना है। रेट वृद्धि के बावजूद अब भी आपूर्ति को लेकर कोई वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में पंप ड्राई हो रहे हैं। इसके बावजूद कंपनियों की ओर से आपूर्ति को लेकर कोई इंतजाम होता नहीं दिखाई दे रहा है। जब तक आपूर्ति में वृद्धि नहीं होगी,तब तक स्थिति में सुधार होने की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है। -आदित्य त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन,कुशीनगर
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कोट:-
ईंधन की किल्लत के बीच ग्राहकों व लोगों को कोई असुविधा न हो प्रयास किया जा रहा है। कंपनियों के अधिकारियों से बातचीत कर लगातार बेहतर आपूर्ति बनाए जाने का काम किया जा रहा है। ईंधन के अभाव में बंद पड़े पंपों को आपूर्ति बहाल कराए जाने के लिए लगातार माॅनीटरिंग की जा रही है। -कृष्ण गोपाल पांडेय,जिला पूर्ति अधिकारी,कुशीनगर
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पपों पर डीजल नहीं के बोर्ड लटके
पिछले दो-तीन दिनों से स्थानीय और ग्रामीण इलाकों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन का संकट गहरा गया है। तेल कंपनियों से आपूर्ति न मिलने के कारण कई पंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं। जो वाहन चालक लंबी दूरी तय करके पंपों पर पहुंच रहे हैं, उन्हें ''''नो स्टॉक'''' का बोर्ड देखकर लौटना पड़ रहा है।
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खेती-किसानी प्रभावित, किसान परेशान:-
यह समय खेतों की जुताई का है, जिसके कारण डीजल की मांग चरम पर है। ट्रैक्टर संचालकों को डीजल नहीं मिल पा रहा है। किसान खेतों से ट्रैक्टर लेकर या हाथों में गैलन (डिब्बे) थामे एक पंप से दूसरे पंप की खाक छान रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय पर जुताई नहीं हुई तो पूरी फसल चक्र प्रभावित हो जाएगी। ईंधन के अभाव में खेतों में चल रहे ट्रैक्टर कुछ ही घंटों में थम जा रहे हैं।
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सिर्फ 100-200 रुपये का मिल रहा तेल
संकट को देखते हुए कुछ पंप संचालकों ने सीमित स्टॉक को बचाने के लिए नया रास्ता निकाला है। चार पहिया वाहनों को सीमित मात्रा में 500 -1000 का तेल दिया जा रहा है, जबकि दो पहिया वाहनों को महज 100 से 200 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा है ताकि सभी को थोड़ा-बहुत ईंधन मिल सके। गैलन या डिब्बों में तेल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे किसानों की नाराजगी और बढ़ गई है।
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पंपों के मैनेजर बोले:-
पहले से ही सप्लाई बेहद कम मिल रही है। हमारे टैंकर डिपो पर खड़े हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। स्टॉक खत्म होने के कारण हमें पंप बंद करने पड़ रहे हैं। जैसे ही आपूर्ति बहाल होगी, स्थिति सामान्य हो जाएगी। -श्यामबदन कुशवाहा
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ईंधन की किल्लत की वजह कंपनियों की तरफ से कटौती को बरकरार रखना है। रेट वृद्धि के बावजूद अब भी आपूर्ति को लेकर कोई वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में पंप ड्राई हो रहे हैं। इसके बावजूद कंपनियों की ओर से आपूर्ति को लेकर कोई इंतजाम होता नहीं दिखाई दे रहा है। जब तक आपूर्ति में वृद्धि नहीं होगी,तब तक स्थिति में सुधार होने की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है। -आदित्य त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन,कुशीनगर

पेट्रोल पंप पर तेल के टैंकर पहुंचने का इंतजार करते ग्राहक।संवाद