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झंडा लगाने के वक्त ही पड़ी थी बवाल की नींव
अमर उजाला ब्यूरो/कुशीनगर
Updated Tue, 27 Oct 2015 12:04 AM IST
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कसया (कुशीनगर)। कस्बे में बवाल होने की नींव तो 19 अक्टूबर की रात धार्मिक झंडा लगाने के दौरान दोनों समुदाय के युवकों के बीच हुए विवाद के साथ ही बवाल की नींव पड़ गई थी।
इस घटना को प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया और पूर्व की घटनाओं से कोई सबक भी नहीं लिया। यहां के लोग प्रशासन पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाते रहे, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
नतीजा भाईचारा बिगड़ गया और अब सौहार्द कायम करना चुनौती बन गई। दुर्गा पूजा और मोहर्रम नजदीक होने की वजह से प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफी प्रयास किया।
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इसकी तैयारी के क्रम में पीस कमेटी की बैठकें हुईं। दुर्गा पूजा और मोहर्रम को लेकर रूट चार्ट बना, जुलूस के लिए शर्तें रखी गईं। बावजूद इसके मोहर्रम के दिन कसया में बवाल हो गया।
घटनाक्रम पर नजर डालें तो सड़क और गलियों में धार्मिक झंडा लगाया जाने लगा था।
इसी बीच 19 अक्टूबर की रात को समुदाय विशेष के युवकों ने उन झंडों के बगल में अपना झंडा लगा दिया। इसको लेकर दोनों समुदाय के युवकों में तनातनी भी हुई।
इसकी जानकारी सीओ विनय कुमार सिंह और एसओ ज्ञानेंद्र नाथ शुक्ल को हुई तो वह मौके पर पहुंचकर उन्हें शांत कराया। लेकिन इस घटना के बाद तल्ख हालात का अंदाजा प्रशासन नहीं लगा पाया।
शनिवार की भोर में मोहर्रम की चौकी की रस्म करने के बाद गुलाबी चौक पर पंडाल का बांस काटकर ताजिया ले जाया गया तो एक समुदाय के लोग खुद को ठगा महसूस करने लगे।
क्योंकि ठीक एक दिन पहले झंडा जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए कौमी एकता का संदेश दिया था।
मोहर्रम के दिन जब बड़ी मस्जिद के सामने लोग ताजिया रखकर रास्ता साफ करने की जिद पर एक पक्ष के लोग अड़े तो अफसर दोनों समुदाय के लोगों को बुलाकर पंचायत करने लगे।
अगर लोग ताजिया घुमाने की रस्म शुरू कर दिए होते तो शायद प्रशासन को वक्त मिल गया होता और पंडाल का विवाद सुलझा लिया गया होता।
लेकिन लगभग ढाई घंटे तक पंचायत होती रही और प्रशासन केवल एक पक्ष को ही समझाता रहा। कुछ लोगों का मानना है कि अगर दोनों समुदाय के लोगों पर बराबर दबाव बनाया गया होता तो शायद माहौल नहीं बिगड़ा होता।
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इस घटना को प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया और पूर्व की घटनाओं से कोई सबक भी नहीं लिया। यहां के लोग प्रशासन पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाते रहे, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
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नतीजा भाईचारा बिगड़ गया और अब सौहार्द कायम करना चुनौती बन गई। दुर्गा पूजा और मोहर्रम नजदीक होने की वजह से प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफी प्रयास किया।
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इसकी तैयारी के क्रम में पीस कमेटी की बैठकें हुईं। दुर्गा पूजा और मोहर्रम को लेकर रूट चार्ट बना, जुलूस के लिए शर्तें रखी गईं। बावजूद इसके मोहर्रम के दिन कसया में बवाल हो गया।
घटनाक्रम पर नजर डालें तो सड़क और गलियों में धार्मिक झंडा लगाया जाने लगा था।
इसी बीच 19 अक्टूबर की रात को समुदाय विशेष के युवकों ने उन झंडों के बगल में अपना झंडा लगा दिया। इसको लेकर दोनों समुदाय के युवकों में तनातनी भी हुई।
इसकी जानकारी सीओ विनय कुमार सिंह और एसओ ज्ञानेंद्र नाथ शुक्ल को हुई तो वह मौके पर पहुंचकर उन्हें शांत कराया। लेकिन इस घटना के बाद तल्ख हालात का अंदाजा प्रशासन नहीं लगा पाया।
शनिवार की भोर में मोहर्रम की चौकी की रस्म करने के बाद गुलाबी चौक पर पंडाल का बांस काटकर ताजिया ले जाया गया तो एक समुदाय के लोग खुद को ठगा महसूस करने लगे।
क्योंकि ठीक एक दिन पहले झंडा जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए कौमी एकता का संदेश दिया था।
मोहर्रम के दिन जब बड़ी मस्जिद के सामने लोग ताजिया रखकर रास्ता साफ करने की जिद पर एक पक्ष के लोग अड़े तो अफसर दोनों समुदाय के लोगों को बुलाकर पंचायत करने लगे।
अगर लोग ताजिया घुमाने की रस्म शुरू कर दिए होते तो शायद प्रशासन को वक्त मिल गया होता और पंडाल का विवाद सुलझा लिया गया होता।
लेकिन लगभग ढाई घंटे तक पंचायत होती रही और प्रशासन केवल एक पक्ष को ही समझाता रहा। कुछ लोगों का मानना है कि अगर दोनों समुदाय के लोगों पर बराबर दबाव बनाया गया होता तो शायद माहौल नहीं बिगड़ा होता।