{"_id":"5741f0ee4f1c1bb615690af4","slug":"no-one-left-to-lit","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुखाग्नि देने के लिए कोई नहीं बचा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मुखाग्नि देने के लिए कोई नहीं बचा
कुशीनगर
Updated Sun, 22 May 2016 11:18 PM IST
विज्ञापन
कृष्णमोहन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुबेरस्थान। नियति ने ऐसा क्रूर खेल खेला कि सखवनिया गांव के शिवराजपुर टोला में कृष्णमोहन सिंह का हंसता खेलता परिवार तबाह हो गया। परिवार के चार लोगों की मध्यप्रदेश में मौत के बाद अब इन शवों को मुखाग्नि देने के लिए भी घर में कोई नहीं है।
विनम्र और व्यवहारकुशल कृष्णमोहन सिंह प्रवक्ता पद से रिटायर होने के बाद गांव और गृहस्थी में पूरी तरह से रम गए थे। जरूरतमंदों की मदद और उनके सुख-दुख में भागीदारी ने उन्हें और उनके बेटे ऋषि को सबका अजीज बना दिया था।
शनिवार को सड़क हादसे में अपने परिवार के साथ काल कलवित होने वाले कृष्णमोहन सिंह पौत्र शिवांश की मनौती पूरी करने के लिए सिंहस्थ के महाकुंभ में गए थे। उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज पडरौना से पिछले साल में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार के साथ गांव पर रहकर खेती कराते थे।
विज्ञापन
गांव के लोग उनके स्वभाव से काफी प्रभावित थे। गांव के गरीब घरों की बिटिया या बहन की शादी में नि:स्वार्थ भाव से सहयोग करते थे। उनके पुत्र ऋषि भी लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे। लोगों का कहना था कि कृष्णमोहन का पूरा परिवार सरल और मिलनसार था।
यही कारण है कि इस परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर से गांव का हर शख्स शोकाकुल है। लोगों का कहना था कि भरा-पूरा परिवार एक झटके में ही मौत के मुंह में समा गया।
ऋषि अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनके पुत्र शिवांश की सड़क हादसे में मौत हो गई। बेटी और पत्नी जिंदगी व मौत के बीच झूल रही हैं। ऐसी दशा में मृतकों की चिताओं को आग देने वाला भी घर का कोई नहीं है।
विज्ञापन
विनम्र और व्यवहारकुशल कृष्णमोहन सिंह प्रवक्ता पद से रिटायर होने के बाद गांव और गृहस्थी में पूरी तरह से रम गए थे। जरूरतमंदों की मदद और उनके सुख-दुख में भागीदारी ने उन्हें और उनके बेटे ऋषि को सबका अजीज बना दिया था।
विज्ञापन
शनिवार को सड़क हादसे में अपने परिवार के साथ काल कलवित होने वाले कृष्णमोहन सिंह पौत्र शिवांश की मनौती पूरी करने के लिए सिंहस्थ के महाकुंभ में गए थे। उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज पडरौना से पिछले साल में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार के साथ गांव पर रहकर खेती कराते थे।
विज्ञापन
गांव के लोग उनके स्वभाव से काफी प्रभावित थे। गांव के गरीब घरों की बिटिया या बहन की शादी में नि:स्वार्थ भाव से सहयोग करते थे। उनके पुत्र ऋषि भी लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे। लोगों का कहना था कि कृष्णमोहन का पूरा परिवार सरल और मिलनसार था।
यही कारण है कि इस परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर से गांव का हर शख्स शोकाकुल है। लोगों का कहना था कि भरा-पूरा परिवार एक झटके में ही मौत के मुंह में समा गया।
ऋषि अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनके पुत्र शिवांश की सड़क हादसे में मौत हो गई। बेटी और पत्नी जिंदगी व मौत के बीच झूल रही हैं। ऐसी दशा में मृतकों की चिताओं को आग देने वाला भी घर का कोई नहीं है।