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अपहरण कर हत्या में आजीवन कारावास
kushinagar
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:12 PM IST
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टक्कर इतनी जोरदार थी कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समीर दत्ता सड़क से करीब 25 फुट नीचे जा गिरे।
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पडरौना। चार साल पहले पडरौना कोतवाली थाना क्षेत्र के अरनहवा गांव से हुए अपहरण और हत्या के एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। मामले की सुनवाई कर रहे जिला जज ने इस मामले के एक अन्य आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।
जटहां बाजार थाना क्षेत्र के पुर्नहा बुजुर्ग गांव निवासी विरेंद्र दूबे पुत्र रामबहाल दूबे ने जिला पंचायत सदस्य राजेश गौंड़ को ठेका पाने के लिए 50 हजार रुपये दिया था। काम न मिलने पर विरेंद्र रुपयों की मांग कर रहा था। दो जुलाई 2012 की शाम को आरोपी राजेश गौंड़ ने विरेंद्र दूबे को पैसा देने के लिए अपने घर पडरौना कोतवाली के गांव अरनहवा जंगल टोला बुलाया था। बाद में विरेंद्र का शव बिहार के पिपरासी थाना क्षेत्र स्थित गंडक नदी में मिली थी। इस मामले में पडरौना कोतवाली में अपहरण और हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने 12 जुलाई को अभियुक्त राजेश की गिरफ्तारी कर ली थी। मामले में राजेश गौंड़ के अलावा ज्वाला उर्फ जोगेंद्र को आरोपी मानते हुए सुनवाई जिला जज की अदालत में शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी क्रिमिनल गोरख प्रसाद यादव ने मामले की पैरवी करते हुए 10 गवाह प्रस्तुत किए। मंगलवार को जिला जज सुभाष चंद ने मुख्य आरोपी राजेश गौंड़ को हत्या के मामले में आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माना, अपहरण के मामले में 10 वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना तथा आर्म्स एक्ट के मामले में दो वर्ष की सजा और एक हजार रुपये जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया। डीजीसी के अनुसार जिला जज ने इसी मामले में एक अन्य आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य न होने के चलते बरी कर दिया।
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जटहां बाजार थाना क्षेत्र के पुर्नहा बुजुर्ग गांव निवासी विरेंद्र दूबे पुत्र रामबहाल दूबे ने जिला पंचायत सदस्य राजेश गौंड़ को ठेका पाने के लिए 50 हजार रुपये दिया था। काम न मिलने पर विरेंद्र रुपयों की मांग कर रहा था। दो जुलाई 2012 की शाम को आरोपी राजेश गौंड़ ने विरेंद्र दूबे को पैसा देने के लिए अपने घर पडरौना कोतवाली के गांव अरनहवा जंगल टोला बुलाया था। बाद में विरेंद्र का शव बिहार के पिपरासी थाना क्षेत्र स्थित गंडक नदी में मिली थी। इस मामले में पडरौना कोतवाली में अपहरण और हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने 12 जुलाई को अभियुक्त राजेश की गिरफ्तारी कर ली थी। मामले में राजेश गौंड़ के अलावा ज्वाला उर्फ जोगेंद्र को आरोपी मानते हुए सुनवाई जिला जज की अदालत में शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी क्रिमिनल गोरख प्रसाद यादव ने मामले की पैरवी करते हुए 10 गवाह प्रस्तुत किए। मंगलवार को जिला जज सुभाष चंद ने मुख्य आरोपी राजेश गौंड़ को हत्या के मामले में आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माना, अपहरण के मामले में 10 वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना तथा आर्म्स एक्ट के मामले में दो वर्ष की सजा और एक हजार रुपये जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया। डीजीसी के अनुसार जिला जज ने इसी मामले में एक अन्य आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य न होने के चलते बरी कर दिया।
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