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अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामा
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:36 PM IST
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दुदही। विशुनपुरा थानाक्षेत्र के दुदही बाजार स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में मरीज की मौत के बाद उसके परिवारवालों ने हंगामा किया। वे लोग मरीज को गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा रहे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और पूछताछ के लिए डॉक्टर को लेकर थाने चली गई।
सोमवार को सुबह आठ बजे बिहार के डिहीपकड़ी गांव के निवासी सुनील अपनी 60 वर्षीया माता यशोदा का इलाज कराने दुदही लेकर आए थे। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। वह पहले से दमा की मरीज थी। हंगामा कर रहे सुनील का कहना था कि सुबह आठ बजे अपनी मां को लेकर दुदही के एक प्राइवेट डॉक्टर के पास पहुंचे।
उस समय डॉक्टर नहीं थे। वहां कार्यरत कंपाउंडर ने उनकी मां को इंजेक्शन लगाया और उसके दस मिनट बाद ही मां की मौत हो गई। उसके बाद कंपाउंडर अस्पताल छोड़कर भाग गया। सुनील के शोरशराबा करने पर वहां भीड़ जुट गई। किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। तब तक डॉक्टर भी आ गए थे।
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पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डॉक्टर को हिरासत में ले लिया और थाने लेकर चली गई। दिन के तीन बजे तक सुलह समझौते की कोशिश चलती रही। बाद में सुनील ने बिना कोई तहरीर दिए अपनी मां का शव लेकर घर चले गए। पुलिस शाम तक तहरीर मिलने का इंतजार करती रही।
डॉक्टर का कहना था कि वह अस्पताल में नहीं थे। दिन के 12 बजे पहुंचे तो महिला का शव पड़ा था। इस संबंध में एसओ विनय पाठक का कहना था कि महिला बीमार थीं।
परिवार के लोग खुद लिखकर दिए हैं कि इसके लिए डॉक्टर दोषी नहीं है। दुदही सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एके पांडेय का कहना था कि सूचना मिली है। सीएमओ का आदेश भी मिला है कि चिह्नित कर ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाए।
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सोमवार को सुबह आठ बजे बिहार के डिहीपकड़ी गांव के निवासी सुनील अपनी 60 वर्षीया माता यशोदा का इलाज कराने दुदही लेकर आए थे। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। वह पहले से दमा की मरीज थी। हंगामा कर रहे सुनील का कहना था कि सुबह आठ बजे अपनी मां को लेकर दुदही के एक प्राइवेट डॉक्टर के पास पहुंचे।
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उस समय डॉक्टर नहीं थे। वहां कार्यरत कंपाउंडर ने उनकी मां को इंजेक्शन लगाया और उसके दस मिनट बाद ही मां की मौत हो गई। उसके बाद कंपाउंडर अस्पताल छोड़कर भाग गया। सुनील के शोरशराबा करने पर वहां भीड़ जुट गई। किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। तब तक डॉक्टर भी आ गए थे।
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पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डॉक्टर को हिरासत में ले लिया और थाने लेकर चली गई। दिन के तीन बजे तक सुलह समझौते की कोशिश चलती रही। बाद में सुनील ने बिना कोई तहरीर दिए अपनी मां का शव लेकर घर चले गए। पुलिस शाम तक तहरीर मिलने का इंतजार करती रही।
डॉक्टर का कहना था कि वह अस्पताल में नहीं थे। दिन के 12 बजे पहुंचे तो महिला का शव पड़ा था। इस संबंध में एसओ विनय पाठक का कहना था कि महिला बीमार थीं।
परिवार के लोग खुद लिखकर दिए हैं कि इसके लिए डॉक्टर दोषी नहीं है। दुदही सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एके पांडेय का कहना था कि सूचना मिली है। सीएमओ का आदेश भी मिला है कि चिह्नित कर ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाए।