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सन्नाटे को तोड़ रही थीं पीड़ितों की सिसकियां
कुशीनगर
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:31 PM IST
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आग से तबाह हुए लोगों को भोजन के भी लाले पड़ गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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हेमंत मधुप
दुदही। क्षेत्र के बांसगांव जमुआन में रविवार को एक छोटी सी गलती ने सैकड़ों परिवारों को खून के आंसू रोने पर विवश कर दिया। अब इन परिवारों के पास न सिर छुपाने के लिए छांव है और न खाने के लिए अनाज। जिनके तन पर जो कपड़े बचे थे, वही अब भी हैं।
सबसे अधिक बेबसी महिलाओं और नन्हे-मुन्ने बच्चों के चेहरों पर दिख रही थी, जो आने-जाने वाले लोगों को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे। गांववालों ने बताया कि किसी ने बीड़ी पीकर उसे जलते हुए फेंक दिया था, जिससे 250 घर जल गए थे। कई मवेशी भी आग की लपटों में घिरने से जल गए। सोमवार को गांव में उड़ती राख, सिसकियों और आंसू के सिवाय और कुछ नहीं बचा था।
इस गांव की तेतरी और शोभा ने बताया कि एक ओर से आग की लपटें उठीं और फिर तेज हवा के साथ एक के बाद एक घर को आगोश में लेती चलीं गईं। आग की उठती लपटों के आगे गांववालों की एक नहीं चल रही थी।
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इन दोनों लड़कियों की शादी 29 अप्रैल को होनी थी और 26 और 27 तारीख को तिलक जाना था। ऐसी ही कई लड़कियां हैं, जिनकी शादी के तैयारी कर रहे माता-पिता ने एक-एक कर सामान जुटाए थे, लेकिन आग में सब कुछ नष्ट हो गया। भूख से बिलबिला रहे बच्चों को चुप कराने के लिए उनकी माताएं आलू भुनकर उससे उनकी भूख मिटा रही हैं।
उनका कहना था कि अनाज और घरों में रखे रुपये तो जल गए। अब बच्चों का पेट भरने का यही सहारा है। परिवार के लोगों का पेट दूसरों की रहम पर भर रहा है। आग में सब कुछ जल जाने के कारण गांव के लोगों को खुले आसमान तले गुजर-बसर करना पड़ रहा है। रात तो जैसे तैसे कट जा रही है, लेकिन दिन में चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़े सहना बहुत मुश्किल हो रहा है।
लोग अपने सिर पर डलिया या अन्य सामान रखकर धूप से बचाव कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू, बसपा नेता विजय राय, ब्लॉक प्रमुख कुसुमावती वर्मा, जिला पंचायत सदस्य ओमप्रकाश वर्मा, प्रधान कन्हैया यादव ने अग्निपीड़ितों की मदद की। इस गांव में भी पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
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दुदही। क्षेत्र के बांसगांव जमुआन में रविवार को एक छोटी सी गलती ने सैकड़ों परिवारों को खून के आंसू रोने पर विवश कर दिया। अब इन परिवारों के पास न सिर छुपाने के लिए छांव है और न खाने के लिए अनाज। जिनके तन पर जो कपड़े बचे थे, वही अब भी हैं।
सबसे अधिक बेबसी महिलाओं और नन्हे-मुन्ने बच्चों के चेहरों पर दिख रही थी, जो आने-जाने वाले लोगों को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे। गांववालों ने बताया कि किसी ने बीड़ी पीकर उसे जलते हुए फेंक दिया था, जिससे 250 घर जल गए थे। कई मवेशी भी आग की लपटों में घिरने से जल गए। सोमवार को गांव में उड़ती राख, सिसकियों और आंसू के सिवाय और कुछ नहीं बचा था।
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इस गांव की तेतरी और शोभा ने बताया कि एक ओर से आग की लपटें उठीं और फिर तेज हवा के साथ एक के बाद एक घर को आगोश में लेती चलीं गईं। आग की उठती लपटों के आगे गांववालों की एक नहीं चल रही थी।
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इन दोनों लड़कियों की शादी 29 अप्रैल को होनी थी और 26 और 27 तारीख को तिलक जाना था। ऐसी ही कई लड़कियां हैं, जिनकी शादी के तैयारी कर रहे माता-पिता ने एक-एक कर सामान जुटाए थे, लेकिन आग में सब कुछ नष्ट हो गया। भूख से बिलबिला रहे बच्चों को चुप कराने के लिए उनकी माताएं आलू भुनकर उससे उनकी भूख मिटा रही हैं।
उनका कहना था कि अनाज और घरों में रखे रुपये तो जल गए। अब बच्चों का पेट भरने का यही सहारा है। परिवार के लोगों का पेट दूसरों की रहम पर भर रहा है। आग में सब कुछ जल जाने के कारण गांव के लोगों को खुले आसमान तले गुजर-बसर करना पड़ रहा है। रात तो जैसे तैसे कट जा रही है, लेकिन दिन में चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़े सहना बहुत मुश्किल हो रहा है।
लोग अपने सिर पर डलिया या अन्य सामान रखकर धूप से बचाव कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू, बसपा नेता विजय राय, ब्लॉक प्रमुख कुसुमावती वर्मा, जिला पंचायत सदस्य ओमप्रकाश वर्मा, प्रधान कन्हैया यादव ने अग्निपीड़ितों की मदद की। इस गांव में भी पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।