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माओवादी धमक से सीमावर्ती गांवों में दहशत
kushinagar
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:11 AM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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खड्डा (कुशीनगर)। बिहार के वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र में रविवार की रात माओवादियों द्वारा पूर्व प्रधान की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद से सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल है। हत्या के तीन घंटे बाद पुलिस के जवान गांव पहुंचे। रात में ही शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया। सोमवार को शव का अंतिम संस्कार हुआ। गांव में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है।
बिहार के बगहां से 40 किलोमीटर व वाल्मीकिनगर थाना से 20 किलोमीटर दूर जंगल व नदी नालों से घिरे थारू जनजाति बहुल गांव गोनौली में रविवार शाम सब कुछ समान्य था। लोग अपने कार्यों में व्यस्त थे और गांव की महिला प्रधान (मुखिया) घुराही देवी अपने पति व पूर्व प्रधान मनोज सिंह के साथ घर में मौजूद थीं। तभी साठ सत्तर की संख्या में हथियार से लैस लोग आ धमके। वे मनोज सिंह को बाहर ले गए और पिटाई करने के बाद गोली मार दी। हथियारबंद लोगों ने धारदार हथियार से भी हमला किया। इस बीच मुखिया घुराही देवी घर के पीछे से निकलकर भाग निकलीं और गांव के लोगों को घटना की जानकारी दी। लेकिन किसी की भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई।
हथियारबंद लोग लगभग एक घंटे तक गांव में रहे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि माओवादियों ने दीवारों पर हस्तलिखित पर्चे चिपकाए और नारा लगाते हुए जंगल में लापता हो गए। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हडकंप मच गया। आनन-फानन में एसएसबी, एसटीएफ, सैफ, बीएमपी व जनपद के कई थाने की फोर्स बुलाई गई। एसपी बगहां अरविंद कुमार गुप्ता की अगुवाई में पुलिस तीन घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची।
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बिहार के बगहां से 40 किलोमीटर व वाल्मीकिनगर थाना से 20 किलोमीटर दूर जंगल व नदी नालों से घिरे थारू जनजाति बहुल गांव गोनौली में रविवार शाम सब कुछ समान्य था। लोग अपने कार्यों में व्यस्त थे और गांव की महिला प्रधान (मुखिया) घुराही देवी अपने पति व पूर्व प्रधान मनोज सिंह के साथ घर में मौजूद थीं। तभी साठ सत्तर की संख्या में हथियार से लैस लोग आ धमके। वे मनोज सिंह को बाहर ले गए और पिटाई करने के बाद गोली मार दी। हथियारबंद लोगों ने धारदार हथियार से भी हमला किया। इस बीच मुखिया घुराही देवी घर के पीछे से निकलकर भाग निकलीं और गांव के लोगों को घटना की जानकारी दी। लेकिन किसी की भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई।
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हथियारबंद लोग लगभग एक घंटे तक गांव में रहे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि माओवादियों ने दीवारों पर हस्तलिखित पर्चे चिपकाए और नारा लगाते हुए जंगल में लापता हो गए। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हडकंप मच गया। आनन-फानन में एसएसबी, एसटीएफ, सैफ, बीएमपी व जनपद के कई थाने की फोर्स बुलाई गई। एसपी बगहां अरविंद कुमार गुप्ता की अगुवाई में पुलिस तीन घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची।
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