सात लाख रुपये के लिए की थी सुनीता की हत्या
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एसपी राजीव नारायन मिश्र ने बताया कि उर्दहा गांव की 33 वर्षीय सुनीता पत्नी राम भवन 17 सितंबर की रात घर से निकली और वापस नहीं लौटी। 23 सितंबर को महिला की सास फूलकली देवी ने तहरीर दी कि उसकी बहू सुनीता को बुला कर गांव के शेष विश्वकर्मा ले गए। तभी से वह गायब है। आरोपी के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच पड़ताल कर रही थी।
पुलिस टीम ने आरोपी उर्दहा गांव निवासी शेष विश्वकर्मा पुत्र सुभाष विश्वकर्मा को रामकोला रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया। आरोपी शेष विश्वकर्मा ने पूछताछ में बताया कि सुनीता से उसके नजदीकी संबंध थे। उसने 17 सितंबर की रात करीब आठ बजे मोबाइल से सुनीता देवी से बातचीत की और गांव के बाहर बुलाया।
सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर से सुनीता को साथ लेकर गोरखपुर जा रहा था। रास्ते में सुनीता ने उसे बताया कि उसके पास एक पन्नी में सात लाख रुपये हैं। उसके मन में लालच आ गया। गोरखपुर हाईवे पर पहुंचने के बाद उसने रॉड से प्रहार कर सुनीता की हत्या कर दी और शव को राप्ती नदी में फेंक दिया। आरोपी के पास से 2000 की 108 नोट व 500 की 900 नोट यानी कुल कुल छह लाख छाछठ हजार रुपये व एक अदद मोबाइल, घटना में प्रयुक्त कार और खून के धब्बायुक्त कपड़े आदि बरामद हुए।
पकड़े गए आरोपी को अपहरण करके हत्या करने और साक्ष्य मिटाने के मामले में जेल भेज दिया गया। एसपी ने पर्दाफाश करने वाली टीम में शामिल एसओ राहुल सिंह, एसआई मिथिलेश मिश्र, कांस्टेबल विशाल यादव, लालजीत यादव, शिवबहादुर राजभर को शाबासी दी।
करीबी ही निकला सुनीता का कातिल
रामकोला। क्षेत्र के उर्दहा गांव की रहने वाली सुनीता भरोसे और अतिविश्वास में अपने करीबी शेष विश्वकर्मा के बुलाने पर चली गई। आरोपी शेष ने गोरखपुर ले जाने के बहाने रास्ते में रुपये की लालच में सुनीता की हत्या कर शव को राप्ती में फेंक दिया। जैसे ही पुलिस ने मामले का पर्दाफाश किया और गांव वालों को घटना की सत्यता की जानकारी हुई तो सभी अवाक रह गए। पति,बच्चे और सास को रो- रो कर बुरा हाल था। परिजन यहीं कह रहे थे कि सुनीता की लाश तक नहीं मिली।
उर्दहा निवासी सुनीता देवी पत्नी रामभवन अपने पूरे परिवार के साथ हंसी खुशी से जिंदगी बिता रही थी। उसके पति रोजगार के सिलसिले में बाहर गए थे। इधर बगल के रहने वाले आरोपी 26 वर्षीय शेष विश्वकर्मा से सुनीता के नजदीकी संबंध हो गए। सुनीता पूर्व में बेचे गए जमीन का सात लाख रुपये रखी थी। इसकी जानकारी आरोपी को थी। सोची समझी साजिश के तहत आरोपी ने फोन कर सुनीता को बुलाया और गोरखपुर ले जाते दौरान रास्ते में मौत के घाट उतार कर शव को नदी में फेंक दिया। गांव वाले यहीं कह रहे थे कि आरोपी को कानून तो सजा देंगा ही,भगवान भी उसे नहीं छोडे़ंगे।