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सुबुधिया के अधिकांश घरों में बनती है कच्ची शराब
Updated Fri, 14 Jul 2017 04:46 PM IST
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कुशीनगर। अहिरौली थाना क्षेत्र के सुबुधियां गांव में कच्ची शराब के चलते हर साल होने वाली मौत के बावजूद कारोबार पर पुलिस लगाम नहीं लग पा रही है। बड़ी घटना होने पर आबकारी व पुलिस टीमें गांव पहुंचकर कुछ भट्ठियों को तोड़ने व लहन नष्ट करने की खानापूर्ति तो करती हैं, लेकिन गांव को बर्बाद कर रहे इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए ठोस प्रयास नहीं होता।
दो दशक पहले तक सुबुधिया गांव भी अगल-बगल के अन्य गांवों की तरह ही सामान्य था, लेकिन कच्ची शराब के अवैध कारोबार ने अचानक इस गांव का माहौल प्रदूषित कर दिया। धीरे-धीरे इस गांव से सामान्य लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी। अब तो यह गांव कुशीनगर ही नहीं पड़ोसी जिला देवरिया, गोरखपुर व महराजगंज में भी कच्ची शराब के चलते ही बदनाम है। इस अवैध कारोबार ने गांव के कई घरों की खुशियां छीन ली हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनमें विधवाओं की संख्या बढ़ रही है। गांव में हर साल दो-चार नौजवान कच्ची शराब के चलते ही अपने परिवार को रोता-बिलखता छोड़ जाते हैं। बीते 12 जुलाई को पिपराइच क्षेत्र के एक युवक की मौत इस गांव के सामने ही सड़क पार करते वक्त हो गई थी। सुबुधिया गांव निवासी विंदेश्वरी प्रसाद कुछ महीने पहले सड़क के किनारे कच्ची शराब बनाने के लिए बनाई गई टंकी में गिरकर जल गए थे। बगल के गांव कोहरौली की हरिजन बस्ती के एक परिवार में तीन भाइयों की मौत इस गांव में बिकने वाली कच्ची शराब को पीने से हो चुकी है। गांव के लोगों का कहना है कि जब भी शासन स्तर से अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने की बात होती है तो सबसे पहले सुबुधियां गांव में कार्रवाई होती है, कुछ भट्ठियां तोड़ी जाती हैं, लहन नष्ट किया जाता है और खानापूर्ति के बाद फिर कारोबार शुरू हो जाता है।
इस क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक ज्ञान प्रकाश सिंह का कहना है कि सुबुधिया में कई बार अभियान चलाकर लहन व कच्ची शराब नष्ट की जा चुकी है। कई लोग जेल भी जा चुके हैं, लेकिन कारोबार पूरी तरह से बंद नहीं हो पा रहा है। इस गंभीर मामले पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है।
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दो दशक पहले तक सुबुधिया गांव भी अगल-बगल के अन्य गांवों की तरह ही सामान्य था, लेकिन कच्ची शराब के अवैध कारोबार ने अचानक इस गांव का माहौल प्रदूषित कर दिया। धीरे-धीरे इस गांव से सामान्य लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी। अब तो यह गांव कुशीनगर ही नहीं पड़ोसी जिला देवरिया, गोरखपुर व महराजगंज में भी कच्ची शराब के चलते ही बदनाम है। इस अवैध कारोबार ने गांव के कई घरों की खुशियां छीन ली हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनमें विधवाओं की संख्या बढ़ रही है। गांव में हर साल दो-चार नौजवान कच्ची शराब के चलते ही अपने परिवार को रोता-बिलखता छोड़ जाते हैं। बीते 12 जुलाई को पिपराइच क्षेत्र के एक युवक की मौत इस गांव के सामने ही सड़क पार करते वक्त हो गई थी। सुबुधिया गांव निवासी विंदेश्वरी प्रसाद कुछ महीने पहले सड़क के किनारे कच्ची शराब बनाने के लिए बनाई गई टंकी में गिरकर जल गए थे। बगल के गांव कोहरौली की हरिजन बस्ती के एक परिवार में तीन भाइयों की मौत इस गांव में बिकने वाली कच्ची शराब को पीने से हो चुकी है। गांव के लोगों का कहना है कि जब भी शासन स्तर से अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने की बात होती है तो सबसे पहले सुबुधियां गांव में कार्रवाई होती है, कुछ भट्ठियां तोड़ी जाती हैं, लहन नष्ट किया जाता है और खानापूर्ति के बाद फिर कारोबार शुरू हो जाता है।
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इस क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक ज्ञान प्रकाश सिंह का कहना है कि सुबुधिया में कई बार अभियान चलाकर लहन व कच्ची शराब नष्ट की जा चुकी है। कई लोग जेल भी जा चुके हैं, लेकिन कारोबार पूरी तरह से बंद नहीं हो पा रहा है। इस गंभीर मामले पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है।
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