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Kushinagar News: मासूम से दरिंदगी के दोषी को उम्रकैद, तीन लाख जुर्माना भी
Fri, 03 Apr 2026 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:11 AM IST
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पडरौना। तरयासुजान थाना क्षेत्र में पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा और तीन लाख रुपये जुर्माने लगाया है। अदालत ने जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता के परिजनों को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश भी दिया है।
अदालत में विचाराधीन वर्ष 2016 के इस मामले में इमरान, निवासी तमकुहीराज, थाना तरयासुजान पर आरोप था कि उसने 19 मई की शाम घर के बाहर खेल रही पांच वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर घर के पीछे ले गया और दुष्कर्म के बाद भाग गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उसे जीवनकाल तक जेल में रहना होगा। साथ ही तीन लाख रुपये अर्थदंड लगाया।
अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी धनराशि पीड़िता के प्राकृतिक संरक्षक के माध्यम से उसे प्रतिकर के रूप में दी जाए। फैसले में अदालत ने कड़ी टिप्पणी की है कि इस तरह के जघन्य अपराध समाज के नैतिक ढांचे पर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। नवजात और छोटी बच्चियों से हो रहे दुष्कर्म की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और यह दर्शाती हैं कि समाज अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल हो रहा है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर निर्देश दिया गया है कि लंबित मामलों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराई जाए और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
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अदालत में विचाराधीन वर्ष 2016 के इस मामले में इमरान, निवासी तमकुहीराज, थाना तरयासुजान पर आरोप था कि उसने 19 मई की शाम घर के बाहर खेल रही पांच वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर घर के पीछे ले गया और दुष्कर्म के बाद भाग गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उसे जीवनकाल तक जेल में रहना होगा। साथ ही तीन लाख रुपये अर्थदंड लगाया।
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अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी धनराशि पीड़िता के प्राकृतिक संरक्षक के माध्यम से उसे प्रतिकर के रूप में दी जाए। फैसले में अदालत ने कड़ी टिप्पणी की है कि इस तरह के जघन्य अपराध समाज के नैतिक ढांचे पर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। नवजात और छोटी बच्चियों से हो रहे दुष्कर्म की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और यह दर्शाती हैं कि समाज अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल हो रहा है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर निर्देश दिया गया है कि लंबित मामलों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराई जाए और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
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