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Kushinagar News: जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण का दिया संदेश
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बुद्ध पीजी कालेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के बाद छात्र और शिक्
कसया। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर बृहस्पतिवार को बुद्ध पीजी काॅलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई। विद्यार्थियों ने पोस्टरों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहयोग, सकारात्मक संवाद और जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण का संदेश दिया।
इस वर्ष दिवस की थीम ‘चेंजिंग द नैरेटिव’ रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्रा ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी है। तनाव, असफलता और निराशा जीवन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन ऐसे समय में व्यक्ति को अकेला महसूस न होने देना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे मित्रों और सहपाठियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को गंभीरता से लें, उनकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेने के लिए प्रेरित करें।
मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमृतांशु शुक्ला ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल एक दिन का विषय नहीं है। समाज में इस मुद्दे को लेकर व्याप्त चुप्पी और कलंक को खत्म करने के लिए खुलकर और संवेदनशीलता के साथ संवाद करना जरूरी है। समय पर की गई बातचीत और भावनात्मक सहयोग किसी व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
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डॉ. रीना मालवीय ने कहा कि आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत समस्या मानने के बजाय उसके मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं को समझना चाहिए। किसी परेशान व्यक्ति की बात बिना पूर्वाग्रह के सुनना और उसे सहयोग देना मानसिक स्वास्थ्य के प्रति हम सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. विशेषता मिश्रा ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। प्रो. सत्य प्रकाश ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई। वीरेंद्र कुमार साहू ने युवाओं से स्वयं के साथ-साथ आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।
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इस वर्ष दिवस की थीम ‘चेंजिंग द नैरेटिव’ रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्रा ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी है। तनाव, असफलता और निराशा जीवन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन ऐसे समय में व्यक्ति को अकेला महसूस न होने देना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे मित्रों और सहपाठियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को गंभीरता से लें, उनकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेने के लिए प्रेरित करें।
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मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमृतांशु शुक्ला ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल एक दिन का विषय नहीं है। समाज में इस मुद्दे को लेकर व्याप्त चुप्पी और कलंक को खत्म करने के लिए खुलकर और संवेदनशीलता के साथ संवाद करना जरूरी है। समय पर की गई बातचीत और भावनात्मक सहयोग किसी व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
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डॉ. रीना मालवीय ने कहा कि आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत समस्या मानने के बजाय उसके मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं को समझना चाहिए। किसी परेशान व्यक्ति की बात बिना पूर्वाग्रह के सुनना और उसे सहयोग देना मानसिक स्वास्थ्य के प्रति हम सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. विशेषता मिश्रा ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। प्रो. सत्य प्रकाश ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई। वीरेंद्र कुमार साहू ने युवाओं से स्वयं के साथ-साथ आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।