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सर्वे के तीन माह बाद भी नहीं मिला किसानों को मुआवजा
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सर्वे के तीन माह बाद भी नहीं मिला मुआवजा
जलभराव के चलते सूख गई है कई किसानों की गन्ने की फसल
जिला प्रशासन के निर्देश पर लेखपालों ने नवंबर में किया था सर्वे
पकड़ियार बाजार(कुशीनगर)। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के अधिकतर किसानों की गन्ने की फसल सितंबर माह में बारिश होने की वजह से सूख गई थी। प्रशासन ने नवंबर माह में इसका सर्वे कराया, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं दिया है। इससे किसानों में आक्रोश है। नाराज किसान सर्वे को महज दिखावा बता रहे हैं।
बीते साल सितंबर माह में लगातार बारिश होने की वजह से क्षेत्र के कई किसानों के गन्ने के खेत में जलभराव हो गया था। इससे गन्ने की फसल सूख गई। प्रशासन के निर्देश पर संबंधित गांवों के लेखपालों ने नवंबर माह में सूखी गन्ने की फसल का सर्वे किया। सौरहा खुर्द के किसान राम बहल, पिपरा बुजुर्ग के रमाशंकर, योगेंद्र पांडेय, पिपरावर सिवान के राकेश मोहन का कहना है कि खेत में जलभराव के चलते गन्ने की अधिकांश फसल सूख गई। नवंबर में प्रशासन ने सर्वे कराकर क्षति का आकलन किया था। तब उम्मीद जगी थी कि लागत मूल्य के हिसाब से मुआवजा मिल जाएगा। इससे खरीफ की फसल की बुआई में मदद मिल जाएगी। लेकिन, तीन माह बीतने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने कहा कि इस संबंध में लेखपाल से बात की जाती है तो उनका कहना होता है कि मेरा काम केवल सर्वे करना था। पडरौना के तहसीलदार दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गन्ना क्षतिपूर्ति के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने पर मुआवजा दिया जाएगा।
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जलभराव के चलते सूख गई है कई किसानों की गन्ने की फसल
जिला प्रशासन के निर्देश पर लेखपालों ने नवंबर में किया था सर्वे
पकड़ियार बाजार(कुशीनगर)। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के अधिकतर किसानों की गन्ने की फसल सितंबर माह में बारिश होने की वजह से सूख गई थी। प्रशासन ने नवंबर माह में इसका सर्वे कराया, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं दिया है। इससे किसानों में आक्रोश है। नाराज किसान सर्वे को महज दिखावा बता रहे हैं।
बीते साल सितंबर माह में लगातार बारिश होने की वजह से क्षेत्र के कई किसानों के गन्ने के खेत में जलभराव हो गया था। इससे गन्ने की फसल सूख गई। प्रशासन के निर्देश पर संबंधित गांवों के लेखपालों ने नवंबर माह में सूखी गन्ने की फसल का सर्वे किया। सौरहा खुर्द के किसान राम बहल, पिपरा बुजुर्ग के रमाशंकर, योगेंद्र पांडेय, पिपरावर सिवान के राकेश मोहन का कहना है कि खेत में जलभराव के चलते गन्ने की अधिकांश फसल सूख गई। नवंबर में प्रशासन ने सर्वे कराकर क्षति का आकलन किया था। तब उम्मीद जगी थी कि लागत मूल्य के हिसाब से मुआवजा मिल जाएगा। इससे खरीफ की फसल की बुआई में मदद मिल जाएगी। लेकिन, तीन माह बीतने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने कहा कि इस संबंध में लेखपाल से बात की जाती है तो उनका कहना होता है कि मेरा काम केवल सर्वे करना था। पडरौना के तहसीलदार दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गन्ना क्षतिपूर्ति के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने पर मुआवजा दिया जाएगा।
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