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दया और करूणा है धर्म का मूल आधार : अतुल कृष्ण
Sun, 07 Jun 2026 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:10 AM IST
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दुदही बाजार श्रीराम कथा सुनते लोगों की भीड़।संवाद
दुदही। कस्बे के सुराजी बाजार के श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम कथा के अंतिम दिन शनिवार को कथा वाचक ने धर्म के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि दया और करुणा धर्म के मूल आधार हैं। इसके बाद कथा वाचक ने सीता हरण, लंका दहन, राम रावण युद्ध, विभीषण का राज्याभिषेक, भगवान राम का राज्याभिषेक प्रसंग की कथा विस्तार से सुनाई।
कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि धर्म का मूल आधार दया और करुणा हैं। दोनों लोगों जीवन में हमेशा रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों की संपत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। 14 वर्ष वनवास करने के बाद भगवान श्री राम जब अयोध्या पहुंचे तो अयोध्या वासी खुशियों से झूम उठे। उन्होंने कहा कि रामायण लोगों को जीवन जीने के तरीके बताती है। उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं। अगर समाज में दीन दुखियों जरूरतमंदों की सेवा करें, तो भगवान खुश रहते हैं।
इस दौरान श्री राम जानकी मंदिर समिति के अध्यक्ष नन्हे जायसवाल, गिरिजेश जायसवाल, रामकुमार जायसवाल, विश्वबंधु जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, राघव ब्याहुत, हरिकेश गुप्ता, दुर्गेश जायसवाल, शम्भू जायसवाल, राजन व्याहुत, राजन जायसवाल आदि मौजूद रहे।
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कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि धर्म का मूल आधार दया और करुणा हैं। दोनों लोगों जीवन में हमेशा रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों की संपत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। 14 वर्ष वनवास करने के बाद भगवान श्री राम जब अयोध्या पहुंचे तो अयोध्या वासी खुशियों से झूम उठे। उन्होंने कहा कि रामायण लोगों को जीवन जीने के तरीके बताती है। उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं। अगर समाज में दीन दुखियों जरूरतमंदों की सेवा करें, तो भगवान खुश रहते हैं।
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इस दौरान श्री राम जानकी मंदिर समिति के अध्यक्ष नन्हे जायसवाल, गिरिजेश जायसवाल, रामकुमार जायसवाल, विश्वबंधु जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, राघव ब्याहुत, हरिकेश गुप्ता, दुर्गेश जायसवाल, शम्भू जायसवाल, राजन व्याहुत, राजन जायसवाल आदि मौजूद रहे।
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