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फिर सदानीरा होगी हिरण्यवती नदी 

Tue, 10 Apr 2018 11:34 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Tue, 10 Apr 2018 11:34 PM IST
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Cleanliness started from Hirayawati river
सफाई कार्य। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पडरौना/ कसया।    बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए गंगा के समान पवित्र हिरण्यवती नदी की सफाई को जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस नदी में वर्ष भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुशीनगर विशेष विकास प्राधिकरण (कसाडा) ने सिल्ट की सफाई का काम शुरू करा दिया है। सफाई परासखाड़ गांव से शुरू हुई है। सिल्ट सफाई का काम कसया-देवरिया मार्ग स्थित रामाभार तिराहे के निकट स्थित पुल तक होगा। काम अगले महीने तक पूरा किया जाना है, जिस पर 64 लाख रुपये का खर्च आएगा। नदी के दोनों किनारों पर पटरी का भी निर्माण कराया जाएगा। 
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कसाडा सूत्रों के अनुसार नदी की सिल्ट सफाई की कार्ययोजना अक्टूबर में बनी थी। कुशीनगर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सफाई कार्य का औपचारिक उद्घाटन भी किया था। सफाई के साथ नदी की गहराई भी लगभग तीन मीटर बढ़ाई जाएगी। नदी को और आकर्षक बनाने के लिए दोनों किनारों पर चौड़ी पटरी का भी निर्माण कराया जाएगा। नदी में हमेशा पानी का बहाव बना रहे इसके लिए रामाभार तिराहे के निकट देवरिया मार्ग स्थित पुल पर एक फ्लैप गेट लगवाया जाएगा। इसकी मदद से नदी के जल को आवश्यकतानुसार रोका जा सकेगा। इसके अलावा नदी में नालों का गंदा पानी भी नहीं आने दिया जाएगा। 
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 इतिहासकारों के अनुसार हिरण्यवती नदी के किनारे ही कुशीनारा (आज का कुशीनगर) राज्य था। पावानगर से अपने घर कपिलवस्तु जाने के लिए निकले भगवान बुद्घ ने हिरण्यवती नदी के किनारे विश्राम किया था। नदी के किनारे स्थित शाल्व वन में उन्होंने अपने शिष्य आनंद को उपदेश देने के बाद महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था। 19 वीं शताब्दी में कुशीनगर की खोज के साथ ही हिरण्यवती नदी के इतिहास की जानकारी हुई थी। परंतु नदी का उद्गम स्थल बंद होने के कारण अब यह महज बरसाती नाला बनकर रह गई है। आसपास के गांवों का गंदा पानी भी इसमें गिरता है। बरसात के दिनों में ही इसमें पानी रहता है। कुशीनगर में भगवान बुद्घ का दर्शन करने आए श्रद्घालु हिरण्यवती नदी का भी दर्शन करते हैं और उसका जल अपने साथ ले जाते हैं। कई वर्षों से इस नदी में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास चल रहा है।
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 वर्ष 2013 में प्रख्यात गांधीवादी चिंतक डॉक्टर एसएन सुब्बा राव ने हिरण्यवती नदी की सफाई के लिए खुद फावड़ा चलाकर युवाओं को प्रेरित किया था। यह अभियान पांच दिनों तक चला था। जिसमें बौद्ध भिक्षुओं के अलावा स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा डीएम रहे शंभू कुमार ने भी नदी की सफाई कराई थी। रामाभार स्तूप के निकट नदी की गहराई बढ़ाकर पक्का घाट का निर्माण कराया गया था। नदी पर एक पुल का भी निर्माण कराया गया है।  

   
- डीएम आंद्रा वामसी ने नदी की साफ-सफाई के लिए सितंबर में प्रयास शुरू किया था। उन्होंने नदी के उद्गम स्थल तक जाकर इसमें पानी के प्रवाह को बनाए रखने की संभावनाओं को देखा था। जलस्रोत के नए इंतजाम के तहत परासखांड़ के पास इस नदी में नहरों का पानी पहुंचाने की कार्य योजना बनाई गई थी। इसके अलावा नदी की गहराई बढ़ाने व किनारे के सुंदरीकरण की योजना भी बनी थी। डीएम की इस योजना के तहत ही कार्य शुरू हुआ है। 
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