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खड्डा परसौनी के मामले में कब्जा हटवाने गई टीम से उलझे लोग
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खड्डा। क्षेत्र के परसौनी खुर्द में हाईकोर्ट के निर्देश पर पट्टे की जमीन पर कब्जा हटवाने गई प्रशासन की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बाद में कड़ा रुख अख्तियार कर टीम ने पट्टाधारक को कब्जा दिला दिया। विरोध करने वाले परिवार की इंटर की छात्रा समेत तीन लोगों को पुलिस हिरासत में लेकर थाने चली गई।
नेबुआ नौरगिया क्षेत्र के ग्राम सभा परसौनी में सीताराम को मिले आवासीय पट्टे की जमीन पर गांव के ही रामभरोसा ने कई साल से कब्जा था। रामभरोसा का दावा है कि सीताराम ने पूर्व में उस जमीन को तीस हजार रुपये में उनको बेच दी थी। उसके बाद वह घर बनाकर परिवार सहित रह रहे हैं। इस जमीन के अलावा उसके पास कोई जमीन नहीं है। दूसरी तरफ सीताराम इसे अपनी अराजी बता जमीन पर अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगा रहे थे। पट्टा निरस्त करने के लिए पूर्व में डीएम न्यायालय में रामभरोसा ने वाद दाखिल किया था। कोर्ट ने सीताराम के पक्ष में फैसला दिया था।डीएम के आदेश के बाद पिछले साल कब्जा हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन हंगामा के चलते प्रशासन को वापस होना पड़ा था। कब्जा मिलता न देख सीताराम ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने समय सीमा के अंदर कब्जा दिलाने का आदेश दे दिया। उसी आदेश के क्रम में नायब तहसीलदार खड्डा अमित शेखर, नेबुआ नौरगिया,जटहां बाजार पुलिस व महिला पुलिस के साथ पहुंच गई। प्रशासन द्वारा कब्जा हटाने की शुरूआत पर रामभरोसा की लड़की व पत्नी तथा अन्य सदस्य बेघर होने पर विक्षिप्त होकर प्रतिरोध करने लगे। इसे लेकर हंगामा होने लगा। महिला पुलिस की मदद से उनको हिरासत में ले लिया गया और सीताराम को कब्जा दिला दिया गया । नायब तहसीलदार अमित शेखर ने बताया कि हाइकोर्ट के आदेश पर कब्जा दिलाया गया है। विरोध करने वाले जमीन को बहुत पहले खरीदने का दावा कर रहे थे, लेकिन इसका कोई वैधानिक साक्ष्य नहीं दे पाए थे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराते समय परिजनों ने हंगामा किया था। उनको लेखपाल की शिकायत पर पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया।
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नेबुआ नौरगिया क्षेत्र के ग्राम सभा परसौनी में सीताराम को मिले आवासीय पट्टे की जमीन पर गांव के ही रामभरोसा ने कई साल से कब्जा था। रामभरोसा का दावा है कि सीताराम ने पूर्व में उस जमीन को तीस हजार रुपये में उनको बेच दी थी। उसके बाद वह घर बनाकर परिवार सहित रह रहे हैं। इस जमीन के अलावा उसके पास कोई जमीन नहीं है। दूसरी तरफ सीताराम इसे अपनी अराजी बता जमीन पर अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगा रहे थे। पट्टा निरस्त करने के लिए पूर्व में डीएम न्यायालय में रामभरोसा ने वाद दाखिल किया था। कोर्ट ने सीताराम के पक्ष में फैसला दिया था।डीएम के आदेश के बाद पिछले साल कब्जा हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन हंगामा के चलते प्रशासन को वापस होना पड़ा था। कब्जा मिलता न देख सीताराम ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने समय सीमा के अंदर कब्जा दिलाने का आदेश दे दिया। उसी आदेश के क्रम में नायब तहसीलदार खड्डा अमित शेखर, नेबुआ नौरगिया,जटहां बाजार पुलिस व महिला पुलिस के साथ पहुंच गई। प्रशासन द्वारा कब्जा हटाने की शुरूआत पर रामभरोसा की लड़की व पत्नी तथा अन्य सदस्य बेघर होने पर विक्षिप्त होकर प्रतिरोध करने लगे। इसे लेकर हंगामा होने लगा। महिला पुलिस की मदद से उनको हिरासत में ले लिया गया और सीताराम को कब्जा दिला दिया गया । नायब तहसीलदार अमित शेखर ने बताया कि हाइकोर्ट के आदेश पर कब्जा दिलाया गया है। विरोध करने वाले जमीन को बहुत पहले खरीदने का दावा कर रहे थे, लेकिन इसका कोई वैधानिक साक्ष्य नहीं दे पाए थे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराते समय परिजनों ने हंगामा किया था। उनको लेखपाल की शिकायत पर पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया।
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