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वजूद में आने से पहले ही सूख गईं 580 पोषण वाटिकाएं
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वजूद में आने से पहले ही सूख गईं 580 पोषण वाटिकाएं
सब हेड
कुपोषित, अति कुपोषित बच्चों और खून की कमी वाली महिलाएं के लिए बनी थी वाटिकाएं
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को मिली थी वाटिका की जिम्मेदारी
अब गर्मी के मौसम के अनुकूल पौधे और सब्जियां लगाने की है तैयारी
4,134
आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाते हैं जनपद में
3,482
आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसर में चलते हैं
राकेश कुमार गौड़
कुशीनगर। जनपद में 580 स्थानों पर पोषण वाटिका स्थापित करने का दावा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग करता है। इन पोषण वाटिकाओं में लगवाए गए औषधीय गुणों वाले पौधे, फल और मौसमी सब्जियां देखरेख के अभाव में वजूद में आने से पहले ही सूख गए। विभाग अब गर्मी के मौसम वाली सब्जियों और पौधों को लगाने की बात कह रहा है।
बता दें कि कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों तथा खून की कमी वाली महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें पौष्टिक फल, औषधीय गुणों वाले पौधे व मौसमी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग को पोषण वाटिकाएं लगाने की जिम्मेदारी मिली थीं। शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में खाली पड़ी जगह में पोषण वाटिका लगाने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिले में 580 स्थानों पर पोषण वाटिका स्थापित करने का दावा संबंधित विभाग ने किया था। वहीं, विभाग के मुताबिक, जिले में 4,134 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 3,482 आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसर में संचालित होते हैं। 652 आंगनबाड़ी केंद्र स्वयं के भवन या किराए के मकान में संचालित होते हैं। जाहिर है सभी जगहों पर पोषण वाटिकाएं बनाई भी नहीं गईं थीं।
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पोषण वाटिका लगाने का उद्देश्य लोगों को सब्जी की खेती की ओर प्रेरित करना
आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में पोषण वाटिका लगाने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उगने वाली सब्जियों की खेती के लिए लोगों को प्रेरित करना, घर-घर पोषण वाटिका की स्थापना करना, हरी सब्जियां जैसे पालक, चौराई, लौकी, हरी मटर, गोभी और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले औषधीय पौधे जैसे तुलसी, करौदा व सहजन आदि उगाने के लिए लोगों को प्रेरित करना था। इसके लिए पांच हजार रुपये खर्च किए जाते हैं।
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आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में 580 पोषण वाटिका सक्रिय हैं। इसमें मौसमी सब्जियां और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले औषधीय पौधे लगाए जाते हैं। ठंड के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों और औषधीय पौधे लगाए गए थे। गर्मी का मौसम आने पर वाटिका में लगे पौधे सूख गए हैं। इनके स्थान पर गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए संबंधित को निर्देश दे दिया गया है।
- शैलेंद्र राय, डीपीओ, कुशीनगर
केस-एक
दस गांवों में लगाई गई थीं पोषण वाटिकाएं
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के दस गांवों में बीते सितंबर में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में पोषण वाटिका लगाई गई थीं, लेकिन अब वाटिकाएं सूख गई हैं। यह वाटिकाएं नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के पिपरा वरसिवान, कोहरगड्डी, नौरंगिया, लौकरिया, देवतहां, रायपुर फुलवरिया आदि गांवों में लगाई गई थीं। इसमें पौष्टिक फल, सहजन, सब्जियों के पौधे लगाए गए थे। प्रभारी सीडीपीओ सीता देवी का कहना था कि पोषण वाटिका लगाई गई थी, लेकिन कार्यकर्ताओं के ध्यान नहीं देने से सूख गईं।
केस दो-
कागजों में सिमटकर रह गई पोषण वाटिका योजना
सुकरौली क्षेत्र में पोषण वाटिका बनाकर उनमें सब्जियां उगाने की योजना कागजों में सिमट गई है। कोरोना महामारी से पहले परिषदीय स्कूलों में पोषण वाटिका का निर्माण कर पौष्टिक सब्जियां उगाने की योजना पर काम शुरू किया गया। क्षेत्र के सहजौली में बनाई गई वाटिका में न तो हरियाली है और न हरी सब्जियां हैं। इस क्षेत्र में 241 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 231 कार्यकर्ता और 234 सहायिकाएं हैं। इनकी देखरेख के लिए पांच सुपरवाइजर तैनात हैं। पोषण वाटिका में इन कर्मियों को श्रमदान कर हरी सब्जियां उगानी थीं, लेकिन सब सूख गईं। सीडीपीओ अब्दुल कयूम ने कहा कि क्षेत्र में दस जगह पोषण वाटिका लगाई गई, लेकिन देखरेख के अभाव में पौधे सूख गए। निरीक्षण कर फिर से पौधे लगाए जाएंगे।
केस-तीन
पंद्रह जगह लगाई गई थीं पोषण वाटिकाएं
दुदही क्षेत्र के ठाड़ीभार, गौरीश्रीराम, कोरेया, रकबा दुलमापट्टी और माधोपुर सहित 15 गांवों के परिषदीय विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों की खाली जमीन में पोषण वाटिकाएं लगाई गई थीं। इन्हें पिछले सितंबर में लगाया गया था, लेकिन समुचित देखरेख के अभाव में सूख गईं। दुदही की मुख्य सेविका शांति पांडेय ने बताया कि पोषण वाटिकाएं लगाई गई थीं, लेकिन कई स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण सूख गईं। कुछ मौसमी सब्जियों के पौधे भी थे, जो सूख गए।
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सब हेड
कुपोषित, अति कुपोषित बच्चों और खून की कमी वाली महिलाएं के लिए बनी थी वाटिकाएं
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को मिली थी वाटिका की जिम्मेदारी
अब गर्मी के मौसम के अनुकूल पौधे और सब्जियां लगाने की है तैयारी
4,134
आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाते हैं जनपद में
3,482
आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसर में चलते हैं
राकेश कुमार गौड़
कुशीनगर। जनपद में 580 स्थानों पर पोषण वाटिका स्थापित करने का दावा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग करता है। इन पोषण वाटिकाओं में लगवाए गए औषधीय गुणों वाले पौधे, फल और मौसमी सब्जियां देखरेख के अभाव में वजूद में आने से पहले ही सूख गए। विभाग अब गर्मी के मौसम वाली सब्जियों और पौधों को लगाने की बात कह रहा है।
बता दें कि कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों तथा खून की कमी वाली महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें पौष्टिक फल, औषधीय गुणों वाले पौधे व मौसमी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग को पोषण वाटिकाएं लगाने की जिम्मेदारी मिली थीं। शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में खाली पड़ी जगह में पोषण वाटिका लगाने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिले में 580 स्थानों पर पोषण वाटिका स्थापित करने का दावा संबंधित विभाग ने किया था। वहीं, विभाग के मुताबिक, जिले में 4,134 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 3,482 आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसर में संचालित होते हैं। 652 आंगनबाड़ी केंद्र स्वयं के भवन या किराए के मकान में संचालित होते हैं। जाहिर है सभी जगहों पर पोषण वाटिकाएं बनाई भी नहीं गईं थीं।
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पोषण वाटिका लगाने का उद्देश्य लोगों को सब्जी की खेती की ओर प्रेरित करना
आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में पोषण वाटिका लगाने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उगने वाली सब्जियों की खेती के लिए लोगों को प्रेरित करना, घर-घर पोषण वाटिका की स्थापना करना, हरी सब्जियां जैसे पालक, चौराई, लौकी, हरी मटर, गोभी और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले औषधीय पौधे जैसे तुलसी, करौदा व सहजन आदि उगाने के लिए लोगों को प्रेरित करना था। इसके लिए पांच हजार रुपये खर्च किए जाते हैं।
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आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में 580 पोषण वाटिका सक्रिय हैं। इसमें मौसमी सब्जियां और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले औषधीय पौधे लगाए जाते हैं। ठंड के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों और औषधीय पौधे लगाए गए थे। गर्मी का मौसम आने पर वाटिका में लगे पौधे सूख गए हैं। इनके स्थान पर गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए संबंधित को निर्देश दे दिया गया है।
- शैलेंद्र राय, डीपीओ, कुशीनगर
केस-एक
दस गांवों में लगाई गई थीं पोषण वाटिकाएं
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के दस गांवों में बीते सितंबर में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसर में पोषण वाटिका लगाई गई थीं, लेकिन अब वाटिकाएं सूख गई हैं। यह वाटिकाएं नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के पिपरा वरसिवान, कोहरगड्डी, नौरंगिया, लौकरिया, देवतहां, रायपुर फुलवरिया आदि गांवों में लगाई गई थीं। इसमें पौष्टिक फल, सहजन, सब्जियों के पौधे लगाए गए थे। प्रभारी सीडीपीओ सीता देवी का कहना था कि पोषण वाटिका लगाई गई थी, लेकिन कार्यकर्ताओं के ध्यान नहीं देने से सूख गईं।
केस दो-
कागजों में सिमटकर रह गई पोषण वाटिका योजना
सुकरौली क्षेत्र में पोषण वाटिका बनाकर उनमें सब्जियां उगाने की योजना कागजों में सिमट गई है। कोरोना महामारी से पहले परिषदीय स्कूलों में पोषण वाटिका का निर्माण कर पौष्टिक सब्जियां उगाने की योजना पर काम शुरू किया गया। क्षेत्र के सहजौली में बनाई गई वाटिका में न तो हरियाली है और न हरी सब्जियां हैं। इस क्षेत्र में 241 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 231 कार्यकर्ता और 234 सहायिकाएं हैं। इनकी देखरेख के लिए पांच सुपरवाइजर तैनात हैं। पोषण वाटिका में इन कर्मियों को श्रमदान कर हरी सब्जियां उगानी थीं, लेकिन सब सूख गईं। सीडीपीओ अब्दुल कयूम ने कहा कि क्षेत्र में दस जगह पोषण वाटिका लगाई गई, लेकिन देखरेख के अभाव में पौधे सूख गए। निरीक्षण कर फिर से पौधे लगाए जाएंगे।
केस-तीन
पंद्रह जगह लगाई गई थीं पोषण वाटिकाएं
दुदही क्षेत्र के ठाड़ीभार, गौरीश्रीराम, कोरेया, रकबा दुलमापट्टी और माधोपुर सहित 15 गांवों के परिषदीय विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों की खाली जमीन में पोषण वाटिकाएं लगाई गई थीं। इन्हें पिछले सितंबर में लगाया गया था, लेकिन समुचित देखरेख के अभाव में सूख गईं। दुदही की मुख्य सेविका शांति पांडेय ने बताया कि पोषण वाटिकाएं लगाई गई थीं, लेकिन कई स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण सूख गईं। कुछ मौसमी सब्जियों के पौधे भी थे, जो सूख गए।