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Kushinagar News: बौद्ध उपासकों ने किया भिक्षुओं को संघ दान
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कुशीनगर म्यामांर बुद्ध मंदिर परिसर में संघदान लेते बौद्ध भिक्षु।संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। कुशीनगर म्यांमार बुद्ध मंदिर परिसर में मंगलवार को श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बौद्ध भिक्षुओं को उपासक ने पिंडपात्र दान किया। इसमें कई देश के उपासक शामिल हुए। टीके राय ने कहा कि बौद्ध भिक्षुओं में श्रावणी पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है। इसलिए बौद्ध उपासक इस दिन पिंड दान कर पुण्य के भागी होते हैं। उन्होंने बताया कि इस पिंडदान में भारत के अलावा म्यामार, थाईलैंड, श्रीलंका के बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। उन्होंने इस पिंडपात्र दान में बौद्ध भिक्षुओं के दैनिक उपयोग की सामग्री रहती है।
भिक्षु सोंग क्रां ने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने श्रावस्ती में कुख्यात डकैत अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तन कर बौद्ध धर्म में दीक्षित किया था। बुद्ध के निर्वाण के तीन माह बाद राजगिरि में 500 भिक्षुओं ने अजातशत्रु के शासनकाल में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया था। भिक्षुओं का वर्षावास भी श्रावण पूर्णिमा से शुरू होता है। इस दौरान भिक्षु नंदका, भिक्षु अशोक, अचान सोंग पोंग, अचान सोंग क्रां, जितिपोंग, भंते सुमित, मोरिन राय, हृदयेश गुप्ता, भिक्षु सागरा, भिक्षु शीलबंश और भिक्षु उपाली आदि मौजूद थे।
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कसया। कुशीनगर म्यांमार बुद्ध मंदिर परिसर में मंगलवार को श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बौद्ध भिक्षुओं को उपासक ने पिंडपात्र दान किया। इसमें कई देश के उपासक शामिल हुए। टीके राय ने कहा कि बौद्ध भिक्षुओं में श्रावणी पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है। इसलिए बौद्ध उपासक इस दिन पिंड दान कर पुण्य के भागी होते हैं। उन्होंने बताया कि इस पिंडदान में भारत के अलावा म्यामार, थाईलैंड, श्रीलंका के बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। उन्होंने इस पिंडपात्र दान में बौद्ध भिक्षुओं के दैनिक उपयोग की सामग्री रहती है।
भिक्षु सोंग क्रां ने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने श्रावस्ती में कुख्यात डकैत अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तन कर बौद्ध धर्म में दीक्षित किया था। बुद्ध के निर्वाण के तीन माह बाद राजगिरि में 500 भिक्षुओं ने अजातशत्रु के शासनकाल में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया था। भिक्षुओं का वर्षावास भी श्रावण पूर्णिमा से शुरू होता है। इस दौरान भिक्षु नंदका, भिक्षु अशोक, अचान सोंग पोंग, अचान सोंग क्रां, जितिपोंग, भंते सुमित, मोरिन राय, हृदयेश गुप्ता, भिक्षु सागरा, भिक्षु शीलबंश और भिक्षु उपाली आदि मौजूद थे।
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