{"_id":"652ed64c9683995d68030584","slug":"buddhist-monks-of-thailand-performed-special-worship-of-mahatma-buddha-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-6292-2023-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं ने की महात्मा बुद्ध की विशेष पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं ने की महात्मा बुद्ध की विशेष पूजा
Wed, 18 Oct 2023 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 18 Oct 2023 12:15 AM IST
विज्ञापन
- बोधगया में मंत्रोच्चार व पूजा अर्चना के बीच धारण किया चीवर
पकवा इनार। थाईलैंड के बौद्ध उपासक-उपासिकाओं ने चीवर धारण कर विशेष पूजा की। इसमें बौद्ध भिक्षु बने 76 सदस्यीय दल ने मंगलवार की शाम रामाभार स्तूप के सामने बैठकर विशेष पूजा-अर्चना की गई।
दल का अगुवाई कर रहे गाइड राजा कुमार ने बताया कि थाईलैंड में परंपरा है कि पुरुष को अपने जीवन काल में एक बार चीवर धारण करना आवश्यक होता है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए 30 बच्चों ने चीवर धारण कर श्रामणेर की दीक्षा ली है।
अब ये सभी जब तक चीवर में रहेंगे, भिक्षु धर्म का पालन करेंगे। जिन्हें आजीवन ग्रहण करने की इच्छा होगी, वे आजीवन भी ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रामणेर की दीक्षा लेने वाले सभी बोधगया में रहकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं। इसके बाद अन्य बौद्ध परिपथ का परिभ्रमण कर रहे हैं।
विज्ञापन
बुधवार की सुबह यह दल महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) के लिए रवाना हो जाएंगे। लुंबिनी में दो दिवसीय पूजा-अर्चना किया जाएगा। वहां से 20 को श्रावस्ती रवाना होंगे। फिर बनारस व बोधगया में 23 अक्तूबर को बैंकाक थाइलैंड के लिए रवाना हो जाएंगे।
विज्ञापन
पकवा इनार। थाईलैंड के बौद्ध उपासक-उपासिकाओं ने चीवर धारण कर विशेष पूजा की। इसमें बौद्ध भिक्षु बने 76 सदस्यीय दल ने मंगलवार की शाम रामाभार स्तूप के सामने बैठकर विशेष पूजा-अर्चना की गई।
दल का अगुवाई कर रहे गाइड राजा कुमार ने बताया कि थाईलैंड में परंपरा है कि पुरुष को अपने जीवन काल में एक बार चीवर धारण करना आवश्यक होता है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए 30 बच्चों ने चीवर धारण कर श्रामणेर की दीक्षा ली है।
विज्ञापन
अब ये सभी जब तक चीवर में रहेंगे, भिक्षु धर्म का पालन करेंगे। जिन्हें आजीवन ग्रहण करने की इच्छा होगी, वे आजीवन भी ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रामणेर की दीक्षा लेने वाले सभी बोधगया में रहकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं। इसके बाद अन्य बौद्ध परिपथ का परिभ्रमण कर रहे हैं।
विज्ञापन
बुधवार की सुबह यह दल महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) के लिए रवाना हो जाएंगे। लुंबिनी में दो दिवसीय पूजा-अर्चना किया जाएगा। वहां से 20 को श्रावस्ती रवाना होंगे। फिर बनारस व बोधगया में 23 अक्तूबर को बैंकाक थाइलैंड के लिए रवाना हो जाएंगे।