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सफेद बालू का ‘काला कारोबार’
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:44 AM IST
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बालू खनन।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना।एनजीटी की आपत्ति पर रोक के बावजूद जिले में बड़ी गंडक, छोटी गंडक और बांसी नदी के किनारे सफेद बालू का ‘काला कारोबार’ बदस्तूर जारी है। एनजीटी की अनुमति हासिल कर प्रशासन की ओर से अभी तक बड़ी गंडक में तीन स्थानों पर बालू खनन का पट्टा आवंटित किया गया है, लेकिन जिले में 25 से अधिक स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है। यह अवैध गतिविधि बड़ी गंडक, छोटी गंडक और बांसी नदी के किनारे चल रही है।
अवैध खनन का यह खेल धीरे-धीरे कानून व्यवस्था के लिए भी समस्या बनता जा रहा है। जिले में आए दिन इस मामले को लेकर विवाद हो रहा है। रविवार की रात अमवा दीगर में अवैध खनन को लेकर हंगामा हुआ था। इससे पहले खड्डा, रामकोला, जटहां बाजार और बरवापट्टी थाना क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने हंगामा किया था।
कुशीनगर की सीमा को छूते हुए बह रही बड़ी गंडक, कप्तानगंज, हाटा व कसया तहसील के बीच से होकर बहने वाली छोटी गंडक तथा पडरौना व तमकुहीराज तहसील में बहने वाली बांसी नदी की तलहटी में बड़े पैमाने पर सफेद बालू पाया जाता है। इन नदियों के किनारे वर्ष 2016 तक जिले में 16 बालू घाट थे। बाद मे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से खनन पर रोक लगा दी गई। प्रदेश में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद एनजीटी मानकों के अनुसार बालू खनन का पट्टा देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए, लेकिन एनजीटी ने अभी तक केवल बड़ी गंडक के किनारे प्रस्तावित घाटों को ही स्वीकृति दी है। छोटी गंडक व बांसी नदी के किनारे प्रस्तावित घाटों से बालू खनन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से पट्टा आवंटित नहीं किया जा सका है।
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- जिले के सोहसा, रगड़गंज, खोटहीं, पगार, सिधावें, बभनौली, अकटहा, नरायनपुर, मड़ार विंदवलिया, नौका टोला, मलाही पट्टी, लक्ष्मीपुर उर्फ कुर्मी पट्टी, रायपुर, भैंसही, कटाई भरपुरवा, मनिकौरा, बैकुंठपुर कोठी, नौगांवा, नैनहा, कोकिलपट्टी, नौगहवां, खैरवा, मिश्रौली, परोरही, बरवापट्टी, अमवा दीगर आदि स्थानों पर रात के समय अवैध बालू खनन हो रहा है।
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अवैध खनन का यह खेल धीरे-धीरे कानून व्यवस्था के लिए भी समस्या बनता जा रहा है। जिले में आए दिन इस मामले को लेकर विवाद हो रहा है। रविवार की रात अमवा दीगर में अवैध खनन को लेकर हंगामा हुआ था। इससे पहले खड्डा, रामकोला, जटहां बाजार और बरवापट्टी थाना क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने हंगामा किया था।
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कुशीनगर की सीमा को छूते हुए बह रही बड़ी गंडक, कप्तानगंज, हाटा व कसया तहसील के बीच से होकर बहने वाली छोटी गंडक तथा पडरौना व तमकुहीराज तहसील में बहने वाली बांसी नदी की तलहटी में बड़े पैमाने पर सफेद बालू पाया जाता है। इन नदियों के किनारे वर्ष 2016 तक जिले में 16 बालू घाट थे। बाद मे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से खनन पर रोक लगा दी गई। प्रदेश में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद एनजीटी मानकों के अनुसार बालू खनन का पट्टा देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए, लेकिन एनजीटी ने अभी तक केवल बड़ी गंडक के किनारे प्रस्तावित घाटों को ही स्वीकृति दी है। छोटी गंडक व बांसी नदी के किनारे प्रस्तावित घाटों से बालू खनन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से पट्टा आवंटित नहीं किया जा सका है।
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- जिले के सोहसा, रगड़गंज, खोटहीं, पगार, सिधावें, बभनौली, अकटहा, नरायनपुर, मड़ार विंदवलिया, नौका टोला, मलाही पट्टी, लक्ष्मीपुर उर्फ कुर्मी पट्टी, रायपुर, भैंसही, कटाई भरपुरवा, मनिकौरा, बैकुंठपुर कोठी, नौगांवा, नैनहा, कोकिलपट्टी, नौगहवां, खैरवा, मिश्रौली, परोरही, बरवापट्टी, अमवा दीगर आदि स्थानों पर रात के समय अवैध बालू खनन हो रहा है।